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Ashes: मार्नस लाबुशेन ऑस्ट्रेलिया का एक उभरता सितारा

2014 में तत्कालीन 20 वर्षीय मार्नस लाबुशेन को बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के दौरान गाबा में एक अतिरिक्त फिल्डर के रूप में मैदान पर उतरने का मौका मिला था। इसके बाद, उन्हें बल्लेबाज के रूप में ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में जगह बनाई

IANS News
By IANS News December 22, 2021 • 20:28 PM
Cricket Image for Ashes: मार्नस लाबुशेन ऑ्स्ट्रेलिया का एक उभरता सितारा
Cricket Image for Ashes: मार्नस लाबुशेन ऑ्स्ट्रेलिया का एक उभरता सितारा (Image Source: Google)
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2014 में तत्कालीन 20 वर्षीय मार्नस लाबुशेन को बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के दौरान गाबा में एक अतिरिक्त फिल्डर के रूप में मैदान पर उतरने का मौका मिला था। इसके बाद, उन्हें बल्लेबाज के रूप में ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट टीम में जगह बनाने में लगभग चार साल का समय लग गया। लाबुशेन की शुरुआत उतनी प्रभावशाली नहीं थी जितनी वह चाहते थे, लेकिन कुछ पारियों के बाद इस ऑस्ट्रेलियाई स्टाइलिश बल्लेबाज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों को अपना दिवाना बना लिया है। उन्होंने बहुत कम समय में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया दिग्गजों का विश्वास भी हासिल किया है।

आईसीसी ने बुधवार को आईसीसी टेस्ट बल्लेबाजी की रैंकिंग जारी की है जिसमें लाबुशेन ने पहला पायदान प्राप्त कर लिया है। डेब्यू करने के तीन साल बाद, लाबुशेन ने अपने पहले 20 टेस्ट में छह शतक और 12 अर्धशतक बनाए है, इस दौरान उनका औसत 62.14 का रहा है। कम से कम 20 टेस्ट पारियां खेलने वाले बल्लेबाजों में केवल ऑस्ट्रलियाई दिग्गज बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन का ही औसत (99.94) अधिक रहा है।

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लाबुशेन ने अक्टूबर, 2018 में पाकिस्तान के खिलाफ दुबई में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। वह पहली पारी में दूसरी गेंद पर बिना खाता खोले ही आउट हो गए थे, तो वहीं दूसरी पारी में सिर्फ 13 रन ही बनाए पाए थे। हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान की हर पारी में एक विकेट लिया, साथ ही बाबर आजम को भी रन आउट भी किया था। उन्होंने उस सीरीज के दूसरे टेस्ट में 25 और 43 रन बनाकर खुद को साबित किया था।


बॉर्डर-गावस्कर सीरीज में मिला था मौका

इस सीरीज के लिए लाबुशेन को ऑस्ट्रेलिया द्वारा टीम में चुना गया। इसके बाद बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के पहले तीन मैचों के लिए टीम से बाहर रहने के बाद, उन्हें सिडनी टेस्ट में मौका दिया गया। यह सीरीज ऑस्ट्रेलिया 2-1 से हार गई थी।

सीरीज में उनका नंबर 3 पर आकर बल्लेबाजी करना बड़ी बात थी। यह देखते हुए कि ये पोजिशन ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट बल्लेबाजी क्रम में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। आईसीसी क्रिकेट डॉट कॉम के अनुसार, उन्हें एक ऐसे खिलाड़ी के साथ भूमिका सौंपना आश्चर्य की बात थी, जिसका औसत 33.17 का औसत नहीं था।

लाबुशेन ने मौके को भुनाया

लाबुशेन के पहले चार टेस्ट ऐसे दौर में आए जब ऑस्ट्रेलिया अपने दो सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों डेविड वार्नर और स्टीव स्मिथ के बिना खेल रहा था। उनकी वापसी के बाद उनको प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया, लेकिन वे फिर भी एशेज टीम में बने रहे।

स्मिथ की गैरमौजूदगी में लाबुशेन ने टीम में वापसी की और उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। दूसरे एशेज टेस्ट की ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी में स्मिथ के लिए एक विकल्प के रूप में ऑस्ट्रेलिया के लिए खेलने पर दाएं हाथ के बल्लेबाज ने 59 रनों की पारी खेली, जिससे लॉर्डस में ऑस्ट्रेलिया को एक महत्वपूर्ण ड्रॉ हासिल करने में मदद मिली। काउंटी क्रिकेट में एक कार्यकाल के दौरान अपनी तकनीक का लाभ उठाते हुए लाबुशेन एक रूपांतरित बल्लेबाज थे, जिन्होंने चार अर्धशतक के साथ 50.42 के औसत से सीरीज को समाप्त की।

विरोधी गेंदबाजों पर हावी रहे लाबुशेन

एशेज के दौरान इस बात के संकेत मिले थे कि लाबुशेन आने वाली सीरीज में विरोधी टीम के गेंदबाजों पर हावी हो सकते हैं। गर्मियों की शुरुआती में गाबा टेस्ट में उन्होंने अपना पहला टेस्ट शतक बनाया। जिसमें उन्होंने 279 गेंदों का सामना करते हुए 185 रन बनाए। उन्होंने एडिलेड ओवल डे-नाइट में 162 रन बनाकर पाकिस्तान के खिलाफ दो मैचों की सीरीज में 347 के औसत से रन बनाए।

लाबुशेन ने न्यूजीलैंड के खिलाफ 143 रन के साथ लगातार तीन पारियों में तीन शतक बनाए। उन्होंने अपना पहला दोहरा शतक भी इसी सीरीज में बनाया। इस पूरे सीजन में उन्होंने चार शतक और तीन अर्धशतक के साथ 896 रन बनाए थे। 2019 में 20.25 औसत से बढ़कर जनवरी 2020 की शुरुआत में उनका औसत 63.43 हो गया।

भारत के खिलाफ संकल्प

जब लाबुशेन 2020/21 में भारत का सामना किया था, तब नंबर 3 पर एक आश्चर्यजनक चयन के बाद वह ऑस्ट्रेलियाई टीम के एक वास्तविक स्टार थे। विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे की टीम ने सीरीज की शुरुआती मैचों में कुछ खास प्रदर्शन नहीं किया था। एडिलेड ओवल में उन्होंने महत्वपूर्ण 48 और 28 रन बनाए। लेकिन इससे टीम को फायदा नहीं हो सका और ऑस्ट्रेलियाई टीम मैच हार गई।

लेकिन सीरीज के दूसरे भाग में वापसी करते हुए एससीजी में 91 और 73 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दुर्भाग्य से ऑस्ट्रेलिया के लिए उनकी शानदार पारी काम नहीं आई, क्योंकि भारत ने सीरीज 2-1 से जीत ली।

एशेज में लाबुशेन का शानदार प्रदर्शन

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एशेज सीरीज में अब तक लाबुशेन ने इंग्लैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया है और इसी एशेज सीरीज में आईसीसी टेस्ट बल्लेबाजी रैंकिंग के शीर्ष पर पहुंचे हैं। 27 वर्षीय खिलाड़ी ने गाबा में 74 रनों की पारी से सीरीज की शुरुआत की थी। इसके बाद एडिलेड ओवल में पहली पारी में एक शतक और दूसरी पारी में 51 रन बनाए, जिससे उनको दूसरे एशेज टेस्ट में प्लेयर ऑफ द मैच के पुरस्कार से नवाजा गया। एशेज में यह लाबुशेन का पहला शतक था और वह अब तक छह शतक लगा चुके हैं।

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