3 जुलाई, उत्तराखंड (CRICKETNMORE) :  टीम इंडिया के फास्ट बॉलर जसप्रीत बुमराह आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। वह अपनी शानदार बॉलिंग के दम पर टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी के रूप में फैंस के दिल पर छाये हुए हैं। लेकिन अगर हम उनके परिवार की बात करें तो उनके दादा संतोख सिंह बुमराह आज ऑटो रिक्सा चलाकर अपना गुजर-बसर करतें हैं।

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जसप्रीत सिंह बुमराह के पिता जसवीर सिंह बुमराह का नाम करोड़पति लोगों में शुमार हैं अहमदाबाद में उनकी तीन फैक्ट्रिया जे. के. इण्डस्ट्रीज़, जे.के. मशीनरी इकोमेंट प्राइवेट लिमिटेड और जे.के. इकोमेंट हुआ करतीं थी इसके अलावा दो सिस्टर कंसर्न गुरुनानक इंजीनियरिंग वर्क्स और अजीत फैब्रीकेटर भी थी। लेकिन 2001 में जसप्रीत के पिता की मौत के बाद सारा कारोबार खत्म हो गया। बैंको का कर्जा चुकाने के लिए उन्हें अपनी सारी फैक्ट्रियों को बेचना पड़ा। और जिसके कारण उनकी अच्छी चल रही जिन्दगी में एक भूंचाल सा आ गया।

 

उसके बाद जसप्रीत के दादा संतोख सिंह बुमराह अपने छोटे बेटे जसविंदर सिंह के साथ अहमदाबाद को छोड़ कर उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के एक छोटे से कस्वे में किराये के मकान में जा कर रहने लगे । वहां पर वह ऑटो रिक्सा चलाकर अपना गुजारा करते हैं।

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84 साल के हो चुके संतोख सिंह बुमराह को आज भी अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं हैं। वे कहते हैं कि ये सबकुछ तो कुदरत का करिश्मा हैं। उनकों अपनी इस हालत से ज्यादा अपने पोते को भारतीय टीम के लिए खेलता हुआ देख काफी खुशी मिलती हैं।

 

संतोख सिंह बुमराह ने कहा कि जिसे कभी में अपनी गोद में खिलाता था आज वो अपने देश के लिए खेलता हैं और ये मेरे लिए बड़ी गर्व की बात हैं। मैं एक बार मरने से पहले उससे मिलना चाहता हूं और उसके सिर पर हाथ रख कर उसे आशीर्वाद देना चाहता हूं। उन्होनें अपने पोते जसप्रीत बुमराह की बचपन की तस्वीर आज भी संभाल कर रखी हुई हैं। 

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क्रिकेटर जसप्रीत बुमराह के दादा की आर्थिक स्थिति की जानकारी जब उनके क्षेत्र के एसडीएम नरेश दुर्गापाल को मिली तब उन्होनें संतोख जी को बुलाकर उनसे बातचीत की और उन्हें आर्थिक मदद देने का भरोसा दिलाया। नरेश दुर्गापाल जी का कहना है कि संतोख जी के बारें में, मैं मुख्यमंत्री जी को अवगत करा उनसे मदद दिलाने का प्रयास करूंगा ।

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Lokesh Dhakad / Cricketnmore

लेखक के बारे में

Saurabh Sharma
An ardent cricket fan, Saurabh is covering cricket for last 12 years. He has started his professional journey with the Hindi publication, Navbharat Times (Times of India Group). Later on, he moved to TV (Sadhna News). In 2014, he joined Cricketnmore. Currently, he is serving as the editor of cricketnmore.com. His grasp on cricket statistics and ability to find an interesting angle in a news story make him a perfect fit for the online publishing business. He is also acting as a show producer for our ongoing video series - Cricket Tales, Cricket Flashback, & Cricket Trivia Read More
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