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पिछले 6 भारतीय कोच औऱ उनके पहले सीरीज में भारत का कैसा परफॉरमेंस रहा ?

Saurabh Sharma
By Saurabh Sharma
July 08, 2016 • 19:55 PM View: 3927

8 जुलाई, नई दिल्ली (CRICKETNMORE). भारत की टीम अपने नए हेड कोच अनिल कुंबले की कोचिंग में वेस्टइंडीज दौरे पर पहुंच गई है। जहां भारत की टीम 4 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी। भारत की टीम 21 जुलाई को पहला टेस्ट मैच एंटीगुआ में खेलेगी। ऐसे में अनिल कुंबले के कंधे पर बुहुत बड़ी जिम्मेदारी होगी । लगभग 16 साल के बाद भारतीय क्रिकेट टीम में किसी देसी कोच को कोचिंग के लिए नियुक्त किया गया है। इससे पहले भारत के टीम के पास आखरी भारतीय कोच कपिल देव थे जिन्होंने 1999/2000 तक भारत के कोच पद पर रहे थे। "नाम है फुटसाल": कोहली का दिखा अलग अंदाज

अनिल कुंबले को 1 साल के लिए भारत का कोच बनाया गया है जिससे कुंबले के ऊपर खुद को साबित करने के लिए 1 साल का समय है।  क्रिकेट फ्रैंस से लेकर भारतीय क्रिकेट पंडित को कुंबले से काफी उम्मीदें हैं। हेड कोच के रूप में कुंबले की शुरुआत होने जा रही है ऐसे में आईए जानते हैं पहले के कोचों ने अपने पहले सीरीज में क्या मुकाम पाया था। आईए एक नजर-

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# कपिल देव (1999-2000): कपिल देव को भारतीय क्रिकेट टीम के कोच पद पर साल 1999 में बनाया गया था. कपिल देव के कोच बनने के समय भारत की कमान महान सचिन तेंदुलकर के हाथ में थी। अपने पहली ही इंटरनेशनल चैंलेंज में कपिल देव कुछ हद तक सफल रहे थे। मोहाली में खेले गए पहले ही टेस्ट में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की टीम पहली पारी में केवल 83 रन पर आउट हो गई लेकिन इसके जबाव में भारत के गेंदबाज ने भारत को मैच में वापसी कराई और न्यूजीलैंड की पहली पारी को 215 रन पर आउट कर दिया। भारत की टीम ने दूसरी पारी में कमाल का खेल दिखाया और द्रविड़ और तेंदलुकर के शतक के बदौलत स्कोर को 505 तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जिससे पहला टेस्ट मैच ड्रा रहा था। इसके अलावा कानपुर में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में भारत की टीम ने 8 विकेट से जीत दर्ज कर कपिल देव की कोचिंग में पहला टेस्ट मैच जीतने में कामयाब रही थी। तीसरा टेस्ट मैच में ड्रा रहा था। यानि कपिल देव के कोचिंग बननें के बाद पहली सीरीज में जीत प्राप्त करने में सफल रही थी।  कपिल देव की कोचिंग में भारत की टीम का परफॉर्मेंस विदेशी जमीन पर बेहद ही खराब रहा था। अपने खेले भारत से बाहर 15 वनडे मैच में सिर्फ 3 मैच जीतने में भारत की टीम सफल हो पाई थी। तो वहीं टेस्ट क्रिकेट में भारत की टीम का परफॉर्मेंस बेहद ही खराब रहा था। 8 टेस्ट मैचों में भारत की टीम को सिर्फ 1 में जीत मिली थी तो वहीं 5 टेस्ट मैचों में हार का स्वाद चखना पड़ा था और 2 टेस्ट मैच ड्रा रहे थे। प्रैक्टिस मैच से पहले टीम इंडिया ने बॉलीबॉल का लुत्फ उठाया

# जॉन राइट ( 2001- 2005).  न्यूजीलैंड के पूर्व खिलाड़ी जॉल राइट की कोचिंग में भारतीय टीम का उदय फिर से हुआ था।  जॉन राइट ने अपने कोचिंग कार्यकाल भारतीय क्रिकेट में बड़े बदलाव आए। खासकर सौरव गांगुली के नेतृत्व में भारत की टीम ने जो कमाल किया वो एक मिसाल की तरह है। जॉन राइट के कोचिंग में भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ अपना पहला सीरीज खेला था।  साल 2000/2001 में हुई जिम्बाब्वे के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों की सीरीज को 1- 0 से जीतनें में सफलता पाई थी। टेस्ट क्रिकोट में भारत की टीम ने जोरदार खेल दिखाया और 5 मैचों की वनडे सीरीज को 4- 1 से जीतने में सफलता पाई। जॉन राइट की कोचिंग में ही भारत की टीम सौरव गांगुली के कप्तानी में साल 2003 के वर्ल्ड के फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थी। जॉन राइट को भारतीय क्रिकेट में एक सफल कोच के तौर पर याद किया जाता है।

# ग्रेग चैपल (2005- 2007)। भारतीय क्रिकेट में सबसे विवादस्पद कोच के रूप में ग्रेग चैपल को याद किया जाता है। ग्रैग चैपल ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए 2 साल तक कोचिंग की। ग्रैग चैपल की कोचिंग में भारत की टीम ने अपना पहला सीरीज साल 2005 में श्रीलंका में आयोजित इंडियन ऑयल कप खेला। इस सीरीज में भारत, श्रीलंका और वेस्टइंडीज की टीम आमने- सामने थी। भारत की टीम का परफॉर्मेस हालांकि कोई खास नहीं था क्योंकि भारत की टीम श्रीलंका के हाथो सभी मैचों में हार का स्वाद चखना पड़ा था।  फाइनल में भी श्रीलंका ने भारत को हरा दिया था। ग्रैग चैपल अपने कोचिंग में सफल नहीं रहे और खासकर कप्तान गांगुली के साथ उनका मतभेद काफी था जो भारतीय क्रिकेट टीम के लिए आहत देने वाला था।

# गैरी कर्स्टन (2007-2011)।  साउथ अफ्रीका के गैरी कर्स्टन भारत के लिए कोच की भूमिका में सबसे सफल रहे। गैरी कर्स्टन की कोचिंग में ही भारत की टीम वर्ल्ड कप 2011 जीतने में कामयाब हो पाई थी। गैरी कर्स्टन की कोचिंग में भारत ने पहला सीरीज साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेला था। अपने पहली ही सीरीज में साउथ अफ्रीका जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ भारत की टीम सीरीज बराबरी करने में सफल रही थी। गैरी कर्स्टन के कार्यकाल में ही भारत की टीम टेस्ट क्रिकेट में नंबर वन पर पहुंचने में सफल रही थी। गैरी कर्स्टन की कोचिंग में धोनी की किस्मत भी बदली और वो एक सफलतम कप्तान के तौर पर उभरे। कोहली, धोनी नहीं गांगुली हैं फेवरेट कप्तान: इस दिग्गज ने किया खुलासा

# डंकन प्लेचर (2011- 2015): जिम्बाब्वे के डंकन फ्लेचर ने भारत की टीम के लिए कोच पद का कार्यभार अप्रैल 2011 में संभाला।  डंकन फ्लेचर की कोचिंग में भारत ने अपना पहला सीरीज वेस्टइंडीज के खिलाफ वेस्टइंडीज के घर पर खेली ।  जहां भारत ने 1 टी- 20, 5 वनडे मैचों की सीरीज के अलावा 3 टेस्ट मैच खेले। भारत की टीम ने डंकन फ्लेचर के कोचिंग में टी- 20 सीरीज, वनडे सीरीज और टेस्ट सीरीज को जीतमें कामयाबी पाई थी। भारत ने वनडे सीरीज को 3- 2 से अपने नाम किया था तो वहीं 3 टेस्ट मैचों की सीरीज को भारत ने 1- 0 से जीतने में सफलता पाई थी। डंकन फ्लेचर की कोचिंग की शुरुआत अच्छी तो रही थी लेकिन विदेशी दौरे में बेहद ही खराब परफॉर्मेंस भारत का रहा था।

# रवि शास्त्री ( 2015- 2016): शास्त्री की कोचिंग में भारत की टीम ने अपना पहला सीरीज साल 2015 में बांग्लादेश का दौरा किया । 1 टेस्ट और 3 वनडे मैचों वाले दौरे में भारत का परफॉर्मेंस बेहद ही खराब रहा और जहां टेस्ट मैच बारिश की वजह से ड्रा रहा तो वही वनडे में भारत को 2-1 से करारी हार झेलनी पड़ी थी। ब्रिटिश एयरवेज ने क्रिकेट के अंदाज में कुंबले से मांगी माफी

लेकिन शास्त्री की कोचिंग में बाद में भारत की टीम ने अपने परफॉर्मेंस में कुछ सुधार किया औऱ टी- 20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल के अलावा साल 2015- 16 के ऑस्ट्रेलिया दौरे में काफी अच्छा  खेल दिखाया।

अब अनिल कुंबले को भारत की कोचिंग की जिम्मेदारी दी गई है जो करीब 1 साल का है। अनिल कुंबले की कोचिंग में भारत की टीम अपना पहला सीरीज वेस्टइंडीज दौरे पर 4 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी। अब देखना हैं कि कुंबले की कोचिंग में भारत की टीम कैसी शुरुआत करती है। वेस्टइंडीज दौरे पर जाने वाली टीम इंडिया को धोनी का मिला साथ


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