डार्विन में बांग्लादेश के विरुद्ध टेस्ट न तो कोई बड़ा मंच था, न शोर मचाती भीड़ और न ही कोई भव्य जश्न दिखा पर जोश हेजलवुड ने तेज गेंदबाजी के सबसे बड़े पड़ाव में से एक को लगभग वैसे ही हासिल किया जैसे पूरे करियर में खेलते आए हैं: चुपचाप, गजब की गेंदबाजी पर बिना किसी हंगामे के। हेजलवुड ने मेहदी हसन मिराज को आउट कर अपना 300वां टेस्ट विकेट लिया और इस मंजिल पर पहुंचे सिर्फ 9वें ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज (इनमें से 7 तेज गेंदबाज) बने।
डार्विन टेस्ट शुरू हुआ तो ऑस्ट्रेलिया के टेस्ट में 300 विकेट के क्लब में शामिल होने के लिए हेजलवुड को 5 विकेट की जरूरत थी और पहली पारी में ही 89 रन देकर 6 विकेट लिए (टेस्ट में 14 बार 5 विकेट)। इससे भी खास बात ये कि चोट और अनिश्चितता से भरे एक निराशाजनक साल के बाद हेजलवुड टेस्ट क्रिकेट में लौट रहे थे और ऑस्ट्रेलिया को ये अहसास कराने में देर नहीं लगाई कि वे मौजूदा पीढ़ी के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाज में से एक हैं।
35 साल की उम्र और उस पर हेजलवुड लगभग पिछले 12 महीने में कोई टेस्ट नहीं खेले थे, जिसमें घरेलू एशेज सीरीज भी निकल गई। इस दौर में 300 विकेट का रिकॉर्ड बड़ा करीब होने के बावजूद उनकी पहुंच से दूर ही रहा। 300 टेस्ट विकेट के रिकॉर्ड की बात करें तो, डेनिस लिली नवंबर 1981 में इस मंजिल पर पहुंचने वाले पहले ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज थे। उसके बाद ग्लेन मैक्ग्रा, ब्रेट ली, मिशेल जॉनसन, मिशेल स्टार्क और पैट कमिंस भी इस रिकॉर्ड पर पहुंचे। अब हेजलवुड का इस क्लब में शामिल होना ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजी की स्टोरी में एक और शानदार चेप्टर पूरा करने जैसा है।