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भारत ने 36 साल के इंतजार के बाद पहली बार न्यूजीलैंड को हराकर विदेश में जीती टेस्ट सीरीज, जानिए एतिहासिक जीत की कहानी !

by Vishal Bhagat Feb 16, 2020 • 14:18 PM

भारतीय टीम 21 फरवरी से न्यूजीलैंड के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट मैच खेलने हेमिल्टन में मैदान पर उतरेगी। भारत और न्यजीलैंड की टीम के बीच अबतक 57 टेस्ट मैच खेले गए हैं जिसमें 21 टेस्ट में भारत को जीत मिली है तो वहीं 10 टेस्ट मैच में हार का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा 26 टेस्ट मैच ड्रा रहे हैं।

भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर पहली बार जीती थी विदेश में टेस्ट सीरीज
भारतीय टीम को विदेश में पहली टेस्ट सीरीज जीतने में 36 साल लगे जब साल 1967-68 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में भारतीय टीम 3-1 से सीरीज जीतने में सफल रही थी।  आईए जानते हैं उस टेस्ट सीरीज को भारतीय टीम ने कैसे बनाया ऐतिहासिक

15 फरवरी- 20 फरवरी 1968 ( पहला टेस्ट मैच), भारतीय बल्लेबाजों के कारण मैच का पासा पलटा
4 टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट मैच दुनेदिन में खेला गया। मंसूर अली खान पटौदी की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को पहले टेस्ट में 5 विकेट से हराया। न्यूजीलैंड के कप्तान बैरी सिंक्लेयर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। न्यूजीलैंड के ओपनर ग्राहम डॉवलिंग के शानदार 143 रन, बेवन कांगडॉन के 58 रन के साथ - साथ मार्क बर्गेस के 50 रनों की बदौलत पहली पारी में 350 रन बनाए।

भारत की ओर से सैयद आबिद अली ने 4 विकेट निकाले। ऐसे में अब भारतीय टीम के बल्लेबाजों ने इसके जबाव में शानदार बल्लेबाजी की और फारूख इंजीनियर 63, अजीत वाडेकर, 80 रन तो बनाए ही बल्कि सभी बल्लेबाजों ने दहाई का आंकड़ा पार कर भारत के स्कोर को न्यजीलैंड के स्कोर से 9 रन आगे ले जाने में सफल रहे। भारतीय टीम 359 रन बनाकर पहली पारी में आउट हुई। भारतीय टीम ने पहली पारी के आधार पर 9 रनों की बढ़त ली जिसके बाद मैच अपने रोमांचक सीमा की ओर अग्रसर होने लगा।

न्यूजीलैंड की दूसरी पारी में भारतीय स्पिनर ई ए एस प्रसन्ना ने कहर बरपाया और 6 विकेट निकालकर न्यूजीलैंड की दूसरी पारी को 208 रन पर आउट कर दिया। दूसरी पारी में न्यूजीलैंड के तरफ से केवल ब्रूस मर्रे ने अर्धशतकीय पारी खेली और 54 रन बना सके। ऐसे में अब भारत को टेस्ट मैच जीतने के लिए 200 रनों का लक्ष्य मिला। भारतीय टीम ने दूसरी पारी में 5 विकेट खोकर 200 रन बनाकर मैच को जीत लिया। भारत की ओर से दूसरी पारी में अजीत वाडेकर ने 71 रन और रुसी सुरती ने 44 रनों की पारी खेली। इस जीत के साथ ही भारतीय टीम 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में 1- 0 से बढ़त लेने में सफल हो गई।

दूसरा टेस्ट मैच (क्राइस्टचर्च, फरवरी 22-27, 1968), न्यूजीलैंड कप्तान ग्राहम दौलिंग ने जमाया ऐतिहासिक दोहरा शतक
भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरा टेस्ट मैच क्राइस्टचर्च में फरवरी 22 से 27 फरवरी के बीच खेला गया। इस टेस्ट मैच में न्यजीलैंड की टीम ने वापसी की और भारत को 6 विकेट से हरा पाने में सफल रही। भारत के कप्तान मंसूर अली खान पटौदी ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला किया। पहले खेलते हुए न्यूजीलैंड ने पहली पारी में कप्तान ग्राहम दौलिंग के दोहरे शतक के दम पर 502 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। ग्राहम दौलिंग ने 519 गेंद पर 239 रनों की पारी खेली। ग्राहम दौलिंग की पारी ने ही दूसरे टेस्ट मैच में अंतर पैदा कर दिया। ग्राहम दौलिंग के अलावा ओपनर ब्रूस मर्रे ने 74 रनों की पारी खेली। भारत की ओर भले ही स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने 6 विकेट चटकाए थे लेकिन न्यूजीलैंड को बड़ा स्कोर करने से नहीं रोक पाए। इसके बाद भारतीय टीम केवल 288 रन ही बना पाई।

भारत की ओर से रुसी सुरती ने 67, कप्तान मंसूर अली खान पटौदी ने 52 और चंदू बोर्डे ने 57 रन बनाए। न्यूजीलैंड के लिए डिक मोट्ज़ ने 6 विकेट और रिचर्ड कोलिंग ने 3 विकेट लिए। भारत को 288 रनों पर आउट कर न्यूजीलैंड ने पहली पारी के आधार पर 214 रनों की बढ़त लेने के साथ भारत फॉलोऑन भी दिया। भारतीय टीम फिर दोबारा बल्लेबाजी करने उतरी लेकिन दूसरी पारी में केवल 301 रन ही बना सकी। भारत की दूसरी पारी में फारूख इंजीनियर ने 63, रुसी सुरती ने 45, कप्तान पटौदी ने 47 रनों की पारी जरूर खेली लेकिन अपनी पारी को बड़े स्कोर में तब्दील करने में असफल रहे। यही कारण रहा कि भारतीय टीम दूसरी पारी में केवल 301 रन बनाकर आउट हो गई। कीवी टीम की ओर से इस बार गेंदबाज गैरी बार्टलेट ने कहर बरपाया और 6 विकेट लेकर मैच को न्यूजीलैंड के खेमें में पहुंचा दिया। भारतीय टीम के 301 रन पर आउट हो जाने के बाद न्यूजीलैंड को जीत के लिए केवल 88 रनों का लक्ष्य मिला जिसे 4 विकेट खोकर मेजबान टीम ने हासिल कर लिया। न्यूजीलैंड के दूसरी पारी में बेवन किंगड़ों ने नाबाद 61 रन बनाए और अपनी टीम को शानदार जीत दिलाई।


तीसरा टेस्ट, वेलिंगटन, 29 फरवरी - 4 मार्च 1968, ई ए एस प्रसन्ना बने जीत के हीरो 

भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा टेस्ट मैच वेलिंगटन में खेला गया। दोनों टीम सीरीज में बराबरी पर थी। ऐसे में यह टेस्ट मैच सीरीज में बढ़त बनानें के लिए दोनों टीमों के लिए अहम था। कीवी कप्तान ग्राहम दौलिंग ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। ग्राहम दौलिंग का यह फैसला गलत साबित हुआ और न्यूजीलैंड पहली पारी में केवल 186 रन पर आउट हो गई। भारत के स्पिनर ई ए एस प्रसन्ना ने गजब की गेंदबाजी की और 5 विकेट हॉल करने में सफल रहे। न्यूजीलैंड की ओर से पहली पारी में सर्वाधिक रन मार्क बर्गेस ने बनाए। मार्क बर्गेस ने 66 रनों की पारी खेली। न्यूजीलैंड को 186 रन पर आउट करने के बाद भारतीय टीम ने अपनी पारी शुरू की और अजीत वाडेकर ने शतक 143 रन बनाकर भारतीय पारी को 300 से आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाई।

भारतीय टीम पहली पारी में 327 रन पर आउट हुई जिससे बढ़त भारत के पास 141 रन की थी। न्यूजीलैंड पर बढ़त बनानें से भारतीय टीम के पास सीरीज में उलटफेर करने का मौका था। ऐसे में जब न्यूजीलैंड की दूसरी पारी शुरू हुई तो भारतीय गेंदबाजों ने मिले मौके का फायदा उठाया और शानदार गेंदबाजी कर न्यूजीलैंड की दूसरी पारी को 199 रन पर सिमेट दिया। भारत की ओर से एक बार फिर ई ए एस प्रसन्ना ने 3 विकेट चटकाए तो वहीं बापू नाडकर्णी ने 6 विकेट लेकर न्यूजीलैंड बल्लेबाजों को जमकर बल्लेबाजी करने नहीं दिया। अब भारतीय टीम को जीत के लिए केवल 59 रनों का लक्ष्य मिला जिसे भारत ने 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया। भारत ने 8 विकेट के बड़े अंतर से मैच को जीतने में सफलता पाई।

चौथा टेस्ट, ऑकलैंड, मार्च 7 से 12 मार्च 1968, भारतीय स्पिनरों के जाल में फंसा न्यूजीलैंड

सीरीज में 2 - 1 की बढ़त के बाद आखिरी टेस्ट मैच खेलने भारतीय टीम ऑकलैंड पहुंची। 2 टेस्ट मैच जीतकर भारतीय टीम अब न्यूजीलैंड पर दबाव बनानें में सफल हो गई। चौथे टेस्ट में एक बार फिर न्यूजीलैंड ने टॉस जीतकर फील्डिंग करने का फैसला किया। ऐसे में पहली पारी में भारतीय टीम बल्लेबाजी करने उतरी। न्यूजीलैंड तेज गेंदबाजों ने कसी हुई गेंदबाजी कर भारत की पारी को 252 रन पर सिमेट दिया।

न्यूजीलैंड के डिक मोट्ज़ ने 4 विकेट औऱ गैरी बार्टलेट ने 3 विकेट लिए। भारतीय पारी को 252 रन पर पहुंचाने में खास भूमिका फारूख इंजीनियर 44, मंसूर अली खान पटौदी 51 और चंदू बोर्डे 41 रन निभाई। न्यूजीलैंड की पारी शुरू हुई तो भारतीय स्पिन गेंदबाजों ने मोर्चा संभाला और न्यूजीलैंड की पहली पारी को केवल 140 रन पर आउट कर मैच में पकड़ मजबूत कर ली। भारत की ओर से रुसी सुरती ने 2 विकेट, 4 विकेट प्रसन्ना और 2 विकेट बिशन सिंह बेदी ने चटकाए। न्यूजीलैंड की ओर से सर्वाधिक स्कोर केवल 27 रन रहा जो बेवन किंगड़ों ने बनाए थे। भारत ने पहली पारी के आधार पर 112 रनों की अहम बढ़त ले ली थी।

ऐसे में बढ़त लेकर दूसरी पारी खेलने भारत के बल्लेबाज उतरे तो बल्लेबाजी शानदार की। रुसी सुरती भले ही शतक से चूक गए लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत की नींव रख दी। रुसी सुरती  99 रन पर आउट हुए तो वहीं फारूख इंजीनियर ने 48 रन और चंदू बोर्डे ने 65 रन बनाकर भारत के स्कोर को दूसरी पारी में 5 विकेट पर 261 रन पर ले जाने में सफल रहे। 261 रन के स्कोर पर कप्तान मंसूर अली खान पटौदी ने भारतीय पारी की घोषणा कर दी।

ऐसे में अब न्यूजीलैंड को जीत के लिए 374 रन बनानें थे। ऐसे में इतने बड़े लक्ष्य के दबाव में आकर न्यूजीलैंड की दूसरी पारी केवल 101 रन पर आउट हो गई। भारत के गेंदबाजों ने शानदार परफॉर्मेंस किया। प्रसन्ना ने 4, बिशन सिंह बेदी ने 3 और 2 विकेट रूसी सुरती ने चटकाए। भारतीय गेंदबाजों के कमाल के कारण भारत की टीम चौथा और आखिरी टेस्ट मैच 272 रनों के अंतर से जीतकर सीरीज पर कब्जा जमाया और भारत ने विदेश में पहली टेस्ट सीरीज जीतने का कमाल कर दिखाया। मंसूर अली खान पटौदी की कप्तानी में भारत ने अपने टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में ऐतिहासिक जीत हासिल की।

''न्यूजीलैंड की पिच काफी मुश्किल थी और साथ ही न्यूजीलैंड एक ताकतवर टीम थी, न्यूजीलैंड को हराना काफी मुश्किल था, लेकिन जैसे- जैसे टेस्ट सीरीज आगे बढ़ी हम एक होकर खेलने लगे जिससे हम टेस्ट सीरीज जीतने में सफल रहे। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज से पहले हमने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज खेला था जिससे हमें न्यूजीलैंड दौरे पर काफी फायदा पहुचा - उप कप्तान चंदू बोर्डे''