Commonwealth Games: 'कॉमनवेल्थ गेम्स' में आर्मी के मुक्केबाजों ने 8 मेडल जीते, जिसने भारतीय बॉक्सिंग में एएसआई का योगदान अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। ओलंपिक की उम्मीदों से लेकर कॉमनवेल्थ चैंपियन तक, यह संस्थान ऐसे एथलीट तैयार कर रहा है जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का मुकाबला करने और उन्हें हराने में सक्षम हैं।
ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय सेना के एथलीट्स की शानदार सफलता सिर्फ मेडल जीतने तक सीमित नहीं है। यह वर्षों की वैज्ञानिक योजना, लगातार अनुशासन और संस्थागत उत्कृष्टता का नतीजा है। इस सफलता के केंद्र में पुणे स्थित आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (एएसआई) है, जो भारत का प्रमुख मिलिट्री हाई-परफॉर्मेंस सेंटर है। इसने एक बार फिर साबित कर दिया है कि क्यों इसे देश में बेहतरीन एथलीट्स तैयार करने वाले सबसे अच्छे सेंटर्स में से एक माना जाता है।
सिर्फ एथलीट नहीं, चैंपियन बनाना इस इंस्टीट्यूट का मकसद है। साल 2005 में स्थापित, आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट की कल्पना भारतीय सेना के एक प्रमुख प्रोजेक्ट के तौर पर की गई थी, जिसका मकसद खेल में उत्कृष्टता की पहचान करना, उसे बढ़ावा देकर विकसित करना था। दो दशकों के बाद बाद, वह सोच देश के सबसे सफल हाई-परफॉर्मेंस इकोसिस्टम में से एक बन गई है।