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खेलो इंडिया पैरा गेम्स के जरिए अपने सपनों को सच करने के करीब तूलिका

Khelo India Para Games: रविवार को शुरू हुए खेलो इंडिया पैरा गेम्स में बैडमिंटन कोर्ट पर कदम रखने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिभागियों में से एक महाराष्ट्र की तूलिका जाधाओ अपने आदर्श पैरालिंपियन पलक जोशी और प्रमोद भगत की तरह भारत का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद कर रही हैं।

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IANS News
By IANS News December 10, 2023 • 19:50 PM
Khelo India Para Games: Cerebral Palsy, not a challenge for Maharashtra shuttler Tulika Jadhao in pu
Khelo India Para Games: Cerebral Palsy, not a challenge for Maharashtra shuttler Tulika Jadhao in pu (Image Source: IANS)
Khelo India Para Games: रविवार को शुरू हुए खेलो इंडिया पैरा गेम्स में बैडमिंटन कोर्ट पर कदम रखने वाली सबसे कम उम्र की प्रतिभागियों में से एक महाराष्ट्र की तूलिका जाधाओ अपने आदर्श पैरालिंपियन पलक जोशी और प्रमोद भगत की तरह भारत का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद कर रही हैं।

रविवार को तूलिका ने यहां प्रतिष्ठित आईजी स्टेडियम में खेलो इंडिया पैरा गेम्स में उत्तर प्रदेश की पूर्णिमा पांडे को सीधे गेमों में 21-6, 21-4 से हराकर एसएल3 वर्ग में महिला एकल क्वार्टर फाइनल जीता।

महाराष्ट्र के बुलदाना की 15 वर्षीय तूलिका का जन्म सेरेब्रल पाल्सी के साथ हुआ था, जो एक जन्मजात विकार है जो गति, मांसपेशियों की टोन और मुद्रा को प्रभावित करता है। हालांकि, उसकी बीमारी एक दिन भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखने वाली इस चुलबुली किशोरी के आड़े नहीं आई।

तूलिका ने कहा, "मैंने 2018 में सिर्फ मनोरंजन के लिए बैडमिंटन खेलना शुरू किया था, लेकिन जब मैंने टोक्यो पैरालिंपिक देखा तो मैं बहुत आश्चर्यचकित हो गई। विशेष रूप से फलक जोशी और प्रमोद भगत को देखना मेरे लिए प्रेरणादायक था और मैं भी एक दिन उनके जैसा बनना चाहती हूं।"

लेकिन उनकी हालत ऐसी है कि, उन्हें हर दिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

तूलिका ने अपनी चुनौतियों के बारे में कहा, "मैं एसएल3 श्रेणी में खेलती हूं और यह कठिन हो जाता है क्योंकि मैं अपने शरीर के दाहिने हिस्से के साथ ज्यादा कुछ नहीं कर सकती। चूंकि मेरा सारा वजन एक पैर पर पड़ता है, इसलिए मुझे अक्सर चोट लगने का भी खतरा रहता है। सेरेब्रल पाल्सी के कारण मेरी आंखे भी कमजोर हो गई है। इसलिए मैं चश्मे के साथ खेलती हूं जिससे शटल को मापना कठिन हो जाता है।"

हालांकि, बैडमिंटन खेल ने तूलिका को एक नई पहचान दी है। वह कहती हैं, "जब मैं बच्ची थी, तो लोग मेरे हाथ और पैर को देखकर सोचते थे कि मुझमें क्या खराबी है और इससे मुझे हमेशा दूसरों से अलग होने का एहसास होता था। लेकिन बैडमिंटन खेलने के बाद मुझे लगता है कि मैं अपनी एक नई पहचान बना सकती हूं। मेरे कई दोस्त और परिवार पहले से ही मेरे लिए बहुत उत्साहित हैं।"

भारत का प्रतिनिधित्व करने के तूलिका के दृढ़ संकल्प ने उसे अपने प्रशिक्षण के लिए शहरों का रुख करने पर मजबूर कर दिया है। वह अब लखनऊ में रहती हैं जहां वह गौरव खन्ना के अधीन प्रशिक्षण लेती हैं और उन्हें लगता है कि वहां का पारिस्थितिकी तंत्र आत्मविश्वास पैदा करता है।

खेलो इंडिया पर अपनी बात रखते हुए तूलिका ने कहा, "मैं खेलो इंडिया पैरा गेम्स के लिए यहां आने और इस जर्सी को पहनने के लिए बहुत उत्साहित हूं। यह वास्तव में मेरे जैसे युवाओं के लिए अपने सामने आने वाली सभी चुनौतियों को स्वीकार करने और आगे बढ़ने का एक बेहतरीन मंच है। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे ऐसे माता-पिता मिले जो बहुत सहयोगी हैं और हर कदम पर मेरी मदद करते हैं। मैं मैचों का इंतजार कर रही हूं और यहां रहने के हर पल का आनंद ले रही हूं।''


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