Commonwealth Games: 'रात नहीं ख्वाब बदला है, मंजिल नहीं कारवां बदलता है, जज्बा रखो जीतने का क्योंकि किस्मत बदले न बदले, पर वक्त जरूर बदलता है।' यह लाइनें पूरी तरह से भारतीय वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह पर फिट बैठती हैं। आर्थिक तंगी और संघर्ष की तपस्या में तपकर लवप्रीत कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के मंच पर क्या खूब चमके।
लवप्रीत ने कुल 388 किलोग्राम का भार उठाते हुए देश को वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल दिलाया। लवप्रीत एक किलो के भार से गोल्ड लाने से चूक गए, लेकिन उन्होंने स्नैच राउंड में 176 किलो का वजन उठाने के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स में नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। हालांकि, लवप्रीत का गले में सिल्वर मेडल पहनने तक का सफर चुनौतियों से भरा रहा।
लवप्रीत एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता पेशे से दर्जी है, जबकि दादा सब्जियां बेचते हैं। शुरुआत से ही परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। हालांकि, माता-पिता ने लवप्रीत के हाथों में अपनी तरह सुई और धागे की डोर नहीं थमाई, बल्कि उन्हें देश के लिए मेडल लाने का सपना देखने की इजाजत दी। परिवार बेशक आर्थिक तंगी से लड़ाई लड़ता रहा, लेकिन इसका असर पिता ने कभी भी लवप्रीत की ट्रेनिंग पर नहीं पड़ने दिया।