कई खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने से पहले कई लड़ाइयां लड़नी पड़ती हैं। भारत की होनहार महिला पहलवान पूजा गहलोत ने अखाड़े में उतरने से पहले कई ऐसी ही 'जंग' लड़ी। आर्थिक तंगी के साथ-साथ पूजा के पिता उन्हें कुश्ती खेलते हुए नहीं देखना चाहते थे। हालांकि, पूजा के बुलंद हौसलों के आगे एक दिन पिता को भी झुकना पड़ा।
पूजा गहलोत का जन्म दिल्ली के लांपुर गांव में हुआ। बचपन से ही पूजा को खेलों में खास रुचि थी। कुश्ती का खेल पूजा के दिल के थोड़ा ज्यादा करीब था। हालांकि, उस दौर में लड़कियों का कुश्ती खेलना सामान्य बात नहीं माना जाता था। खुद पूजा के पिता नहीं चाहते थे कि वह इस खेल में करियर बनाएं। पूजा की प्रतिभा को चाचा धर्मवीर सिंह ने पहचाना, और वह ही उनको महज 6 साल की उम्र में अखाड़े लेकर गए।
पिता की सख्ती के चलते पूजा ने पहले वॉलीबॉल खेलना शुरू किया लेकिन बाद में वह कुश्ती के खेल में रम गईं। चाचा धर्मवीर ने पूजा को कुश्ती की बारीकियां सिखाईं और इसके बाद पूजा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पूजा ने 2017 में एशियन जूनियर चैंपियनशिप में लाजवाब प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक जीता।