भारत की पूर्व डबल्स स्टार ज्वाला गुट्टा ने भारतीय बैडमिंटन सिस्टम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि इसमें एकाधिकार, पक्षपात और खिलाड़ियों के विकास के लिए दूरगामी सोच की कमी है। साथ ही, उन्होंने इस खेल में अपने योगदान को उचित सम्मान न मिलने पर भी सवाल उठाए हैं।
'आईएएनएस' से खास बातचीत में गुट्टा ने कहा कि भारतीय बैडमिंटन के भीतर की समस्याएं किसी एक व्यक्ति के फैसलों से कहीं ज्यादा गहरी हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स की पूर्व गोल्ड मेडलिस्ट ने बताया कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से संपर्क करके अपनी अकादमी के जरिए जमीनी स्तर पर योगदान देने के प्रस्ताव रखे, लेकिन उन्हें ज्यादातर नजरअंदाज ही किया गया।
गुट्टा ने कहा, "पूरा सिस्टम ही एक समस्या है। इस पर पूरी तरह से एकाधिकार है। सब कुछ सिर्फ एक ही व्यक्ति तय करता है। मैं पिछले चार सालों से कह रही हूं कि मेरी भी एक अकादमी है। मुझे अंडर-19 या सीनियर कैंप मत दो, मुझे अंडर-13 या अंडर-15 के खिलाड़ी दो। मुझे भी शामिल करो। बच्चे अच्छा खेलेंगे, और फिर वे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।"