Jacob martin legal case: Cricket News & Match Updates
क्रिकेट की पिच से कोर्टरूम तक, 22 साल बाद खत्म हुई जैकब मार्टिन की लड़ाई
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ज्यादातर क्रिकेटर जिंदगी की सबसे लंबी पारी क्रिकेट ग्राउंड में खेलते हैं लेकिन जैकब मार्टिन ने सबसे लंबी पारी खेली कोर्टरूम में। आपने खबर पढ़ी होगी कि भारत के इस क्रिकेटर की कोर्टरूम में कानूनी लड़ाई आखिरकार 22 साल बाद खत्म हुई और दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें उन सभी आरोप से बरी कर दिया है जो यूके के एक विवादित क्रिकेट टूर से जुड़े थे। इनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और पासपोर्ट से जुड़े अपराध भी शामिल थे और ये अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि ऐसे आरोप जिंदगी खराब कर देते हैं।
कोर्ट के इस फैसले ने जैकब मार्टिन की जिंदगी का वह अजीब सा चेप्टर खत्म कर दिया जिसमें वे एक कामयाब क्रिकेट करियर की उम्मीद से बाहर, गिरफ्तार हुए और जेल तक पहुंच गए; रेलवे की नौकरी चली गई और ऐसे आरोप के बाद नई नौकरी मिली नहीं। यहां तक कि बीसीसीआई ने भी इसी वजह से कोई भी असाइनमेंट देने से इनकार कर दिया। दुनियाभर में जो बदनामी हुई वह अलग, जो क्रिकेट जानते थे वह किसी काम न आया और उसके बाद एक जानलेवा रोड एक्सीडेंट में बड़ी मुश्किल से बचे तथा इस सब के आलावा सालों तक उन आरोपों के साये में जिए जिन्हें वे हमेशा गलत बताते रहे। अब, 54 साल की उम्र में, जैकब मार्टिन का इंतजार खत्म हुआ और कोर्ट ने सभी आरोप से बरी कर दिया है।
पुलिस रिकॉर्ड और कोर्ट केस में फंसने से बहुत पहले, जैकब जोसेफ मार्टिन का परिचय था: रन बनाना। बड़ौदा में जन्म, दाएं हाथ के मिडिल-ऑर्डर बल्लेबाज और शुरु के उन क्रिकेटर में से एक थे जो लिमिटेड ओवर क्रिकेट में ज्यादा फिट थे। तब भी एक भरोसेमंद, बड़ी एकाग्रता और लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी के तौर पर पहचान बनाई और भारत के सबसे कामयाब घरेलू क्रिकेटरों में से एक बने। बड़ी सफलता की बात करें तो 1998-99 रणजी ट्रॉफी सीजन का जिक्र होगा जब 1000 से ज्यादा रन बनाए और तब रणजी ट्रॉफी में एक सीजन में 1000+ रन बनाने वाले वे सिर्फ 6 वें बल्लेबाज थे। इसी शानदार प्रदर्शन की बदौलत टीम इंडिया से कॉल आ गया और भारत के लिए खेले भी।
मार्टिन का कुल मिलाकर फर्स्ट-क्लास रिकॉर्ड एक बेहतरीन घरेलू क्रिकेटर के तौर पर उनका परिचय है: 138 फर्स्ट-क्लास मैच, 9000 से ज्यादा रन, 23 शतक और औसत 46+ रहा। 2000-01 में बड़ौदा ने अपना पांचवां और अब तक का आखिरी रणजी ट्रॉफी टाइटल जैकब मार्टिन की कप्तानी में ही जीता था। ये इस टीम के क्रिकेट इतिहास की सबसे खास उपलब्धियों में से एक है। संयोग से सालों बाद, वे कोच के तौर पर बड़ौदा क्रिकेट में लौटे।
इसके मुकाबले हालांकि, उनका इंडिया के लिए करियर काफी छोटा रहा। 1999 में टोरंटो में वेस्टइंडीज के विरुद्ध वनडे डेब्यू किया और 1999 से 2001 के बीच कुल 10 वनडे मैच जिसमें 158 रन बनाए। इस रिकॉर्ड से कभी भी टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की नहीं कर पाए पर घरेलू क्रिकेट में एक दमदार बल्लेबाज के तौर पर उनकी पहचान से इनकार नहीं कर सकते।
इसके बाद वह दौर आया जिसने सब बदल दिया। शायद आज जैकब मार्टिन की ज़िंदगी में सबसे खास गिनती न तो 10 (टीम इंडिया के लिए खेले मैच) और न ही 9000+ (फर्स्ट-क्लास रन) है, वह नंबर 22 है जो इस विवाद से जुड़ा है।
यूके टूर जिसने सब कुछ बदल दिया, उसके आरोप से बरी होने के बाद मार्टिन ने बताया कि 2004 में एक प्राइवेट टीम (जिसके साथ वे जुड़े थे) यूके टूर पर गई थी। टीम का एक खिलाड़ी वहीं गायब हो गया और बाकी सभी वापस लौट आए। वह खिलाड़ी वीजा खत्म होने के बाद भी वहां रुका रहा, नकली इमिग्रेशन स्टैम्प के साथ डॉक्यूमेंट बना लिए पर आखिर में पकड़ा गया। उसे ब्रिटेन से डिपोर्ट कर दिया गया और भारत लौटने पर उसे दिल्ली में हिरासत में ले लिया। इसलिए केस दिल्ली का बन गया।
मार्टिन के अनुसार जो पहली FIR लिखी गई उसमें उनका नाम नहीं था पर जांच के दौरान, बाद में उन्हें इसमें फंसा दिया। शायद एक पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर होने के नाते इस केस को सुर्खियों में लाने के लिए पुलिस ने उन पर ज्यादा ध्यान दिया। पुलिस का आरोप बिल्कुल अलग था। जांच रिपोर्ट में लिखा था कि मार्टिन और उनके एक साथी ने क्रिकेट खेलने के बहाने, उस युवा को ब्रिटेन ले जाने जाने का इंतजाम किया और इसके लिए पैसा लिया। इस इंतजाम में 'अजवा स्पोर्ट्स क्लब' नाम का एक फर्जी क्रिकेट क्लब बनाया और उसकी टीम इंग्लैंड ले गए। मार्टिन पर इस सारी तिकड़म में शामिल होने का आरोप लगा और पुलिस के अनुसार ये ह्यूमन ट्रेफिकिंग (गैरकानूनी इमिग्रेशन) रैकेट था।
मार्टिन को दिल्ली में गिरफ्तार किया और तिहाड़ जेल में बंद कर दिया। लंबे समय बाद जमानत हुई। सालों तक केस चलता रहा। 2016 में, बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन ने उन्हें अपनी रणजी ट्रॉफी टीम का कोच बनाया तो इस पर बड़ा बवाल हुआ। चूंकि अभी कोर्ट केस चल रहा था इसलिए उन्हें कोच बनाना हर किसी को रास नहीं आया। सवाल उठा कि जिस पर इतने गंभीर आरोप लगे हों उसे कैसे टीम का कोच बना सकते हैं?
सिर्फ ये लंबा कोर्ट केस जैकब मार्टिन की अकेली मुश्किल नहीं था। दिसंबर 2018 में, वडोदरा में एक रोड एक्सीडेंट में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसमें उनके फेफड़े और लिवर को भी भारी नुकसान पहुंचा। बड़ी खराब हालत थी। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा और लगभग एक महीना आईसीयू में रहे। परिवार के पास उनके इलाज के लिए भी पैसे नहीं थे। तब कई भारतीय क्रिकेटरों, एडमिनिस्ट्रेटर और अन्य लोग ने मदद की और इलाज हुआ।
मार्टिन की इस स्टोरी का सबसे दर्दनाक हिस्सा उनकी गिरफ्तारी या जेल में रहना नहीं है। इस लंबी कानूनी लड़ाई के कारण जो और हुआ उसने तो हमेशा के लिए मुश्किल खड़ी कर दी। रेलवे की नौकरी चली गई। बीसीसीआई ने भी कोई असाइनमेंट न दिया। स्पष्ट है ये सारे साल बड़े तनाव वाले रहे और इसलिए कोर्ट का हालिया फैसला उनकी जिंदगी को बदलने वाला एक बड़ा मोड़ है।
बरी हो गए पर...वह खोए हुए साल वापस नहीं आएंगे। केस शुरू होने के 22 साल बाद, आखिरकार उन्हें राहत मिली है। चलो एक बार तो, स्कोरबोर्ड पर उनके नाम के साथ कुछ अच्छा लिखा गया।
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- 27 Jul 2026 07:16