इंग्लैंड की मेजबानी में हुए 1983 के वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने इंग्लैंड को मात देकर फाइनल में जगह बनाई थी और फिर वर्ल्ड चैंपियन बना था। इसके बाद 1987 के वर्ल्ड कप में भारत ने पाकिस्तान के साथ मिलकर संयुक्त रूप से मेजबानी करी और भारत ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। इस बार भी सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला इंग्लैंड से ही था लेकिन इस परिणाम वह नहीं जो 1983 में था। इंग्लैंड ने भारत को उसी की धरती पर हराकर पिछली हार का बदला लिया औऱ फाइनल की टिकट प्राप्त करी। 

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5 नवंबर 1987 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में पिच की मिजाज के मद्देनजर कपिल देव ने टॉस जीतकर पहले फिल्डिंग करने का फैसला किया। लेकिन पिच ने गेंदबाजों की उतनी मदद नहीं की जितनी की कप्तान को उम्मीद थी। सलामी बल्लेबाज ग्राहम गूच और टिम रॉबिनसन की जोड़ी मैदान पर बल्लेबाजी करने उतरी औऱ पहले विकेट के लिए 40 रन की साझेदारी करी। स्पिन गेंदबाज मनिंदर सिंह ने रॉबिनसन (13रन) को आउट कर पहली सफलता दिलाई और इसके बाद बल्लेबाजी करने आए बिल अथेय भी केवल 4 रन ही बना पाए। हैट्रिक बॉय चेतन शर्मा ने अथेय को अपना शिकार बनाया। अब बल्लेबाजी के लिए कप्तान माइक गैटिंग मैदान पर आए और उन्होंने ग्राहम गूच के साथ मिलकर तीसरे विकेट के लिए 19 ओवर में 117 रन की साझेदारी करी। इस साझेदारी ने मैच को पूरी तरह से बदल दिया।  ग्राहम गूच ने 136 गेदों में 11 चौकों की मदद से 115 रन की पारी खेली और कप्तान गैटिंग ने 62 गेंदों में 56 रन की पारी खेली।


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माइक गेटिंग औऱ गूच ने भारत के मध्यम गति के गेंदबाजों के साथ – साथ भारतीय स्पिनरों को पूरे मैच के दौरान हावी होने नहीं दिया। दोनों बल्लेबाजो ने स्वीप और पूल शॉट खेलकर भारतीय गेंदबाजों को खूब परेशान किया। 41वें ओवर में माइक गेटिंग को मनिंदर सिंह ने 56 रन पर आउट कर दोनों के बीच पनप रही अचर साझेदारी को तोड़ा। इसके 2 ओवर के बाद ही 43वें ओवर में मनिंदर सिंह ने मिड विकेट पर श्रीकांत के हाथों कैच कराकर ग्राहम गूच के बेहतरीन पारी का अंत किया। आउट होने से पहले तक ग्राहम गूच ने इंग्लैंड को बेहतर स्थिति में पहुंचा दिया था। अगले बल्लेबाज एलन लैंब 29 गेंद में तेजी से 32 रन बनाकर इंग्लैंड के स्कोर को अंतिम 7 ओवरों में 51 रन जोड़कर स्कोर 254 तक पहुंचने में निर्णायक भूमिका अदा करी थी। 

भारत के लिए जब 254 रन बनानें की चुनौती शुरू हुई तो दिलीप वेंगसरकर के पेट में तकलीफ के कारण मैदान पर बल्लेबाजी करने नहीं उतर पाए थे। भारत के लिए इससे बड़ी मुश्किल उस समय और खड़ी हो गई जब सुनील गावस्कर(4) ने डेफ्रेइटस की गेंद पर अपना ऑफ स्टंप खो बैठे। गावस्कर का विकेट बड़ी आसानी से इंग्लैंड को मिलना इंग्लिश खेमें के लिए बड़ी राहत थी। वैसे श्रीकांत और नवजोत सिंह सिद्धु ने इंग्लैंड गेंदबाजों के सामने जमकर खेलने की भरसक कोशिश करी। वैसे तो दोनों भारत के बेहतरीन बल्लेबाजों में शुमार किए जाते थे पर वानखेड़े के पिच पर दोनों बल्लेबाज इंग्लैंड गेंदबाजों के सामने बेहद ही असहज नजर आए। यही कारण था कि श्रीकांत और सिद्धु की क्रमश: 31 और 22 रन की पारी में कोई भी बाउंड्री शामिल नहीं थी । केवल मोहम्मद अजहररूद्धीन ने अर्धशतकीय पारी (64 रन) की पारी खेली और भारत के लिए मैच को बचाए रखने में खास भुमिका निभाई। भारत के कप्तान कपिल देव 30 रन (22) गेंद पर हमेशा की तरह भारत को मुश्किल घड़ी में बचाने की कोशिश की पर हेम्मिंग्स ने अजहर और कपिल देव दोनों को आउट कर इंग्लैंड को जीत के मुहाने पर पहुंचा दिया था । भारत के पुछल्ले बल्लेबाज एड्डी हेम्मिंग्स का सामना नहीं कर पाए और पूरी भारतीय टीम 45.3 ओवरों में 219 रन पर सिमट गई। भारत मैच 35 रन से हारकर वर्ल्ड कप से बाहर हो गया था ।

इंग्लैंड के ग्रहम गूच को उनके शानदार शतक के लिए मैन ऑफ द मैच के खिताब से नवाजा गया। गौरतलब है कि इंग्लैंड 1987 वर्ल्ड कप फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से इर्डन गार्डन के मैदान पर भिड़ी थी। 

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विशाल भगत (Cricketnmore)

 

लेखक के बारे में

Saurabh Sharma
Saurabh Sharma is the Editorial Head of Cricketnmore Hindi and a passionate cricket journalist with over 14 years of experience in sports media. He began his journalism career with Navbharat Times, part of the Times of India Group, before moving to television media with Sadhna News. In 2014, he joined Cricketnmore and currently serves as the editor of the platform.
Known for his deep understanding of cricket statistics and unique storytelling approach, Saurabh specializes in cricket news, match analysis, records, and feature stories. Along with editorial responsibilities, he also works as a show producer for popular cricket video series such as Cricket Tales, Cricket Flashback, and Cricket Trivia. Read More
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