हाल ही में भारत के पूर्व क्रिकेटर और कप्तान नारी कॉन्ट्रैक्टर ( Nari Contractor) ने अपना 92वां जन्मदिन मनाया। उन्हें एक ऐसे क्रिकेटर के तौर पर याद करते हैं जिनके सिर पर, 1962 के कैरिबियन टूर पर बारबाडोस के विरुद्ध एक टूर मैच में पेसर चार्ली ग्रिफिथ का एक बाउंसर लगा था और बुरी तरह से चोट आई। यह मैच किंग्स्टन में दूसरे टेस्ट (उन का 31वां और आखिरी इंटरनेशनल मैच) और बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल में, 5 टेस्ट की सीरीज के तीसरे टेस्ट के बीच खेले थे। 

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उनकी खोपड़ी चटक गई और कई सर्जरी की ज़रूरत पड़ी जिनसे वे बच गए। हर जगह यही लिखा है कि इस घातक चोट ने उनका इंटरनेशनल क्रिकेट करियर खत्म कर दिया। टेस्ट क्रिकेट में वापसी की उनकी हिम्मत की पर कामयाब नहीं हुए। एक बड़ा ही दिलचस्प सवाल है ये कि ठीक होने के बाद भी वे टेस्ट क्यों नहीं खेले? आइए फैक्ट्स देखते हैं:

सच ये है कि ठीक होने के बाद, नारी कॉन्ट्रैक्टर क्रिकेट में वापस लौटे और बहुत जल्द फर्स्ट क्लास क्रिकेट भी खेलने लगे। तो टेस्ट क्रिकेट में वापसी क्यों नहीं की? इस सवाल का जवाब देने के लिए, चोट लगने पर जो हुआ उसका जिक्र बहुत ज़रूरी है।

जब चार्ली ग्रिफ़िथ का बाउंसर कॉन्ट्रैक्टर को लगा, तो सिर में बुरी तरह से चोट लगी। फ़ौरन इलाज की ज़रूरत थी। इत्तेफ़ाक से, वेस्टइंडीज़ के कप्तान फ्रैंक वॉरेल वहीं मौजूद थे और उन्होंने नारी की जान बचाने के लिए फटाफट इंतजाम किए। 

तब, भारत के पूर्व कप्तान गुलाम अहमद टूर टीम के मैनेजर थे। वे तो हर समय नारी के साथ थे। सर्जरी के लिए स्पेशलिस्ट, समय पर जुटाने में लगे रहे। यहां तक कि ‘अपनी ज़िम्मेदारी पर' बिना कोई समय बर्बाद किए, गुलाम अहमद ने ही सर्जरी के लिए इजाजत दी थी। सर्जरी के लिए खून की जरूरत थी और कई लोग इसके लिए तैयार थे। आखिर में, ब्लड ग्रुप मिलने पर 5 (फ्रैंक वॉरेल, चंदू बोर्डे, बापू नाडकर्णी, पॉली उमरीगर और भारतीय जर्नलिस्ट केएन प्रभु) ने खून दिया। कॉन्ट्रैक्टर ने हमेशा कहा, ‘अगर मैं आज जिंदा हूं तो सिर्फ़ गुलाम की वजह से।’

एक बात जो ज्यादा जानकारी में नहीं है, वह ये कि उन्हें बचाने के लिए डाक्टरों ने उनके सिर में जाली लगाने के बजाय, एक स्टील प्लेट डाली थी, ताकि अगर फिर कभी इसी (दाईं) तरफ चोट लगे, तो उन्हें कुछ न हो। इस सर्जरी में ढाई घंटे लगे लेकिन इस प्लेट की मदद से वह ठीक हो गए। इस सर्जरी से कॉन्ट्रैक्टर को फिर से खेलने का आत्मविश्वास तो मिला लेकिन उन्हें सलाह यही दी गई कि टेस्ट क्रिकेट से रिटायर हो जाएं। वे न माने और वापसी पर टेस्ट खेलने का पक्का इरादा था। 

नारी कॉन्ट्रैक्टर ने 1962-63 में गुजरात (रणजी ट्रॉफी) और वेस्ट ज़ोन (दलीप ट्रॉफी) के लिए फर्स्ट-क्लास क्रिकेट खेलना फिर से शुरू किया और 1970-71 तक खेलते रहे। कई बार टेस्ट टीम के लिए उनके नाम की चर्चा हुई और भारत के 1967-68 के ऑस्ट्रेलिया टूर के लिए तो वे चुने जाने के बड़े जोरदार दावेदार थे। 

जब कॉन्ट्रैक्टर ने 1962 में क्रिकेट फिर से शुरू किया तो क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया में प्रैक्टिस करते थे। तब बीसीसीआई ने ख़ास तौर पर एक और चार्ली (स्टेयर्स) को उनके लिए गेंदबाजी के लिए बुलाया ताकि उन्हें अंदाजा हो जाए कि पेस को खेल पाएंगे या नहीं? ये स्टेयर्स, उन चार वेस्टइंडीज तेज गेंदबाजों में से एक थे जिन्हें बोर्ड ने उस सीजन में भारत में घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए बुलाया था। कॉन्ट्रैक्टर रणजी और दूसरे टूर्नामेंट में तो खेले लेकिन टेस्ट क्रिकेट नहीं। कॉन्ट्रैक्टर को आज तक इस बात का अफसोस है कि वे फिर से टेस्ट नहीं खेले। वे ‘सिर में चोट लगने के बाद कम से कम एक टेस्ट तो जरूर खेलना चाहते थे।'

ये रिकॉर्ड में है कि जिन डॉ. चांडी (Dr. Chandy) ने कॉन्ट्रैक्टर के सिर में मेटल प्लेट डाली थी, उन्होंने कॉन्ट्रैक्टर को तब ही कह दिया था, ‘मैं तुम्हें (कॉन्ट्रैक्टर) सीधी और साफ़-साफ़ इंग्लिश में बता रहा हूं कि अगर तुम अपनी बाकी की जिंदगी सकून से रहना चाहते हो तो फिर कभी क्रिकेट मत खेलना।’ कॉन्ट्रैक्टर का इरादा कुछ और ही था और वह क्रिकेट में लौट आए।

कई साल बाद, कॉन्ट्रैक्टर ने बताया कि सिलेक्टर्स इस डर से उन्हें फिर से टेस्ट खेलने के लिए नहीं चुन रहे थे कि कहीं फिर से चोट न लग जाए। सिलेक्टर्स बड़े डरे हुए थे कि अगर फिर से चोट लग गई तो नतीजा और भी बुरा हो सकता है। सिलेक्टर्स ऐसी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं थे। तब भी कॉन्ट्रैक्टर घरेलू क्रिकेट खेलते रहे।

एक और बड़ी दिलचस्प बात ये है कि जब भी नारी को फिर से टेस्ट टीम में चुनने की चर्चा हुई तो उनकी हालत के बारे में गुलाम अहमद से ही पूछा गया। नारी ने हमेशा कहा कि उनकी जान टीम मैनेजर गुलाम अहमद ने बचाई थी: लोकल सर्जन को ठीक समय पर बुलाया, जब वह बाल्टी में खून की उल्टी कर रहे थे तो हालत बिगड़ने से बचाई, बिना चिंता किए सर्जरी की इजाजत दी और कॉन्ट्रैक्टर की पत्नी के वहां पहुंचने के बाद ही हॉस्पिटल से हटे। मजेदार संयोग ये कि जब कॉन्ट्रैक्टर टेस्ट में वापसी की कोशिश कर रहे थे तो यही गुलाम अहमद सिलेक्शन कमेटी के चेयरमैन बन गए। 

एक शाम गुलाम, नारी से मिले और उन्हें बताया कि वह इतना अच्छा खेल रहे हैं कि फिर से टेस्ट टीम में आ सकते हैं लेकिन वह उन्हें नहीं चुनेंगे। वजह? वह अपने सबसे प्यारे दोस्त को एक और जानलेवा चोट लगते देखने का दर्द नहीं झेल पाएंगे। नारी ने कोई बहस नहीं की और मान गए। जिस व्यक्ति ने उनकी जान बचाई थी, उससे बहस की हिम्मत नहीं जुटा पाए वे। 

आपको बता दें: नारी कॉन्ट्रैक्टर के सिर में जो टाइटेनियम प्लेट डाली थी, उसे 60 साल बाद मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में निकाल दिया। उनके शरीर में उस प्लेट से गड़बड़ शुरू हो गई थी जिस वजह से से उसे निकालना ज़रूरी हो गया था।

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चरनपाल सिंह सोबती

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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