क्रिकेट से संयास लेने के बाद खिलाड़ी या तो क्रिकेट के खेल से जुड़े दूसरे क्षेत्र जैसे कमेंटरी, कोचिंग या फिर क्रिकेट के किसी अन्य पद पर काम करते हैं या फिर क्रिकेट से हटकर किसी अन्य पेशे में लग जाते हैं।

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ऐसा ही एक प्रतिष्ठित क्षेत्र है राजनीती जिसमें कई क्रिकेटरों ने अपनी किस्मत आजमाई है। आइये आज बात करते है वैसे टॉप-5 क्रिकेट खिलाड़ियों की जो राजनीती के क्षेत्र में एक अलग मुकाम बनानें में सफल रहे।

 
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नवजोत सिंह सिद्धू

नवजोत सिंह सिद्धू ने क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद टीवी जगत और राजनीती में अपनी पहचान बनाई है। सिद्धू साल 2004 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और उस साल वो अमृतसर में हुए इलेक्शन में खड़े हुए जिसमें उन्हें जीत हासिल हुई।

साल 2016 में बीजेपी छोड़ने से पहले उनका नामांकन राज्य सभा सदस्य के रूप में हुआ लेकिन साल 2017 में सिद्धू ने बीजेपी छोड़ कांग्रेस ज्वाइन किया और वो अपने क्षेत्र अमृतसर से फिर विजयी हुए। 

 
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विनोद कांबली

भारत के पूर्व मिडिल आर्डर बल्लेबाज विनोद कांबली ने क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद फिल्म और टीवी की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाई लेकिन वो उसमें सफल नहीं रहे।

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बाद में कांबली ने लोक भारती पार्टी को ज्वाइन किया जहाँ उन्हें पार्टी के उप सचिव के रूप में चुना गया। साल 2009 में कांबली ने मुंबई के विखरोली क्षेत्र से इलेक्शन में हिस्सा लिया जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 

 

अर्जुन राणातुंगा

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श्रीलंका क्रिकेट की सूरत को बदलने में अर्जुन राणातुंगा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। राणातुंगा के कप्तानी में ही श्रीलंका ने अपना पहला और एकमात्र वर्ल्ड कप जीतने का कमाल किया है।

राणातुंगा ने क्रिकेट से दूरी बनाने के बाद श्रीलंकन फ्रीडम पार्टी को ज्वाइन किया और साल 2001 में हुए पार्लियामेंट्री इलेक्शन में उन्हें जीत हासिल हुई जिसके बाद उन्हें पर्यटन विभाग के डिप्टी मंत्री के रूप में चुना गया। वर्तमान में राणातुंगा श्रीलंका के केंद्रीय पोर्ट एवं शिपिंग मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं।

 

मोहम्मद अज़हरुद्दीन

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मोहम्मद अज़हरुद्दीन भारत के सफल कप्तानों में शुमार रहे हैं। साल 2000 में बीसीसीआई ने उन्हें मैच फिक्सिंग के आरोप के बाद क्रिकेट खेलने से बैन कर दिया जिसके बाद उनके क्रिकेट खेलने पर पूर्णविराम लग गया।

साल 2009 में अज़हरुद्दीन इंडियन नेशनल कांग्रेस पार्टी से जुड़े और उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से इलेक्शन जीतने के बाद वो लोकसभा के सदस्य बने। 

 
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इमरान खान

पाकिस्तान को पहला वर्ल्ड कप दिलाने वाले इमरान खान शायद क्रिकेट खिलाड़ियों में राजनीती के क्षेत्र में सबसे ऊँचा मुकाम हासिल किया है। क्रिकेट से रिटायरमेंट के बाद इमरान ने साल 1996 में एक पार्टी का गठन किया जिसका नाम पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ है। शुरूआत में वो ज्यादा सफल नहीं रहे।

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22 सालों के बाद इमरान खान आज पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में चुने गए हैं। अब ये देखना दिलचस्प होगा की वो अपनी इस नई पारी में कितना सफल रहते हैं।

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Shubham Shah
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