कृष्णमाचारी श्रीकांत अपने दौर में भारतीय क्रिकेट के 'इंडियाना जोन्स' कहलाते थे। 1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे श्रीकांत ने सलामी बल्लेबाज के तौर पर अपनी पहचान बनाई। उनकी बल्लेबाजी शैली बेहद विस्फोटक थी, जिससे फैंस को काफी उम्मीद रहती थी।

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21 दिसंबर 1959 को मद्रास (चेन्नई) में जन्मे सुपर-क्विक रिफ्लेक्सिस के धनी श्रीकांत ने महज 21 साल की उम्र में ही चयनकर्ताओं का ध्यान खींच लिया था। नवंबर 1981 में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाले श्रीकांत करीब डेढ़ साल के अंदर विश्व कप 1983 की विजेता टीम का हिस्सा थे। उन्होंने 1987 और 1992 में भी इस विश्व कप खेला था। हालांकि, टीम से उन्हें बार-बार अंदर-बाहर किया जाता रहा, लेकिन 80 के दशक के मध्य तक उन्होंने चयनकर्ताओं का भरोसा जीत लिया।

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'चीका' नाम से मशहूर श्रीकांत की तुलना मुश्ताक अली से होती थी, जो बेखौफ पुलिंग, हुकिंग और ड्राइविंग से दुनिया के सबसे मजबूत गेंदबाजी खेमे को तबाह करने का माद्दा रखते थे।

साल 1989 में कृष्णमाचारी श्रीकांत को भारतीय क्रिकेट टीम की कमान सौंपी गई। उन्होंने पाकिस्तान दौरे पर टेस्ट और वनडे टीम की कप्तानी की।

एक कप्तान के तौर पर श्रीकांत ने 4 टेस्ट मैच खेले। ये सभी मुकाबले ड्रॉ रहे। वहीं, 13 वनडे मुकाबलों में उन्होंने 4 मैच जीते। पाकिस्तान के दौरे पर श्रीकांत ने बतौर बल्लेबाज चयनकर्ताओं को निराश किया, जिसके बाद उन्हें करीब 2 साल टेस्ट टीम में मौका नहीं मिल सका। दिसंबर 1991 में जब उन्होंने वापसी की, तो बढ़ती उम्र की वजह से अब पहले जैसे रिफ्लेक्सिस नहीं थे। साल 1993 में उन्हें साउथ जोन टीम के लिए सेलेक्ट नहीं किया गया। ऐसे में 33 साल की उम्र में श्रीकांत ने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी।

श्रीकांत ने भारत की तरफ से 43 वनडे मुकाबलों में 29.88 की औसत के साथ 2,062 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 2 शतक और 12 अर्धशतक लगाए। वहीं, 146 वनडे मुकाबलों में उन्होंने 4 शतक और 27 अर्धशतकों के साथ 4,091 रन बनाए।

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एक कप्तान के तौर पर श्रीकांत ने 4 टेस्ट मैच खेले। ये सभी मुकाबले ड्रॉ रहे। वहीं, 13 वनडे मुकाबलों में उन्होंने 4 मैच जीते। पाकिस्तान के दौरे पर श्रीकांत ने बतौर बल्लेबाज चयनकर्ताओं को निराश किया, जिसके बाद उन्हें करीब 2 साल टेस्ट टीम में मौका नहीं मिल सका। दिसंबर 1991 में जब उन्होंने वापसी की, तो बढ़ती उम्र की वजह से अब पहले जैसे रिफ्लेक्सिस नहीं थे। साल 1993 में उन्हें साउथ जोन टीम के लिए सेलेक्ट नहीं किया गया। ऐसे में 33 साल की उम्र में श्रीकांत ने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी।

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संन्यास के बाद श्रीकांत क्रिकेट विश्लेषक की भूमिका में नजर आए। वह चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं। क्रिकेट में उत्कृष्ट योगदान के लिए कृष्णमाचारी श्रीकांत को साल 2019 में 'सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया।

Article Source: IANS

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