Kapil Dev First Test Century:उन खिलाड़ियों में से एक जो कभी टी20 क्रिकेट नहीं खेले पर खेलते, तो जरूर कामयाब रहते, एक नाम हमारे कपिल देव का भी है। ये कहना बेहतर होगा कि टी20 क्रिकेट ने उन्हें खेलते देखने का मौका गंवा दिया। फिलहाल कपिल देव को याद करने की एक वजह और भी है।

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हालिया एशेज सीरीज में इंग्लैंड के लिए जो कुछ बातें अच्छी रहीं, उनमें से एक थी जैकब बेथेल का सिडनी में 100। उनके 100 से जुड़ा सबसे ख़ास रिकॉर्ड ये है कि ये टेस्ट 100 वास्तव में उनका पहला फर्स्ट क्लास 100 भी था और ऐसा करने वाले वे 47वें खिलाड़ी बन गए। पिछले साल सितंबर में, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध एक वनडे में अपना पहला प्रोफेशनल 100 बनाया था। टेस्ट मैच में, अपना पहला फर्स्ट क्लास 100 बनाने वाले पहले खिलाड़ी चार्ल्स बैनरमैन थे (1877 में)।

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* जैकब बेथेल ऐसा रिकॉर्ड बनाने इंग्लैंड के 6वें खिलाड़ी हैं। उनसे पहले: हेनरी वुड 1891/92 में; बिली ग्रिफिथ्स 1947/48 में; जैक रसेल 1989 में; स्टुअर्ट ब्रॉड 2010 में; गस एटकिंसन 2024 में।

* 22 साल और 76 दिन की उम्र में इस रिकॉर्ड को बना, जैकब बेथेल ऐसा रिकॉर्ड बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में से एक हैं।

वैसे कुछ ऐसा ही गेंदबाजी में तलाश करें तो जिम्बाब्वे के ऑफ स्पिनर उजेश रांचोड ( Ujesh Ranchod) का जिक्र जरूरी है। उन्होंने तो टेस्ट मैच में, अपना पहला फर्स्ट-क्लास विकेट (और वह भी सचिन तेंदुलकर का) लिया और ये उनका एकमात्र टेस्ट विकेट रहा।

टेस्ट मैच में, अपना पहला फर्स्ट क्लास 100 बनाने वाले बल्लेबाजों के क्लब में भारतीय क्रिकेटरों की लिस्ट देखें तो इसमें कपिल देव और हार्दिक पांड्या दोनों हैं। हार्दिक का पहला टेस्ट 100 (विरुद्ध श्रीलंका 108, पल्लेकेले, अगस्त 2017) तो वास्तव में न सिर्फ उनका पहला फर्स्ट क्लास 100 था, किसी भी सीनियर क्रिकेट में उनका पहला 100 था। हार्दिक ने उसके बाद कोई और टेस्ट 100 नहीं बनाया।

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जैकब की खूबी ये कि टेस्ट में पहला फर्स्ट-क्लास 100 बनाने की तरह, एक ओडीआई मैच में अपना पहला लिस्ट ए 100 बनाया। इस तरह दोनों फॉर्मेट में अपना पहला 100, इंटरनेशनल मैच में बनाया। ऐसा जिन और 4 ने किया है उनमें हमारे अपने कपिल पाजी भी शामिल हैं। कपिल देव ने:

*जनवरी 1979 में दिल्ली में वेस्टइंडीज के विरुद्ध टेस्ट में 126* रन बनाए जो उनका पहला फर्स्ट-क्लास 100 भी था।

*जून 1983 में टनब्रिज वेल्स में जिम्बाब्वे के विरुद्ध ओडीआई में 175* बनाए जो उनका पहला लिस्ट ए 100 भी था। ये रिकॉर्ड बनाने वाले बाक़ी तीन खिलाड़ी:

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*बांग्लादेश के मेहदी हसन मिराज : फरवरी 2021 में चटोग्राम में वेस्टइंडीज के विरुद्ध टेस्ट में 103 रन और दिसंबर 2022 में मीरपुर में भारत के विरुद्ध वनडे में 100 रन।

*आयरलैंड के कर्टिस कैम्फर: अप्रैल 2023 में गाले में श्रीलंका के विरुद्ध टेस्ट में 111 और उसी साल बुलावायो में स्कॉटलैंड के विरुद्ध वनडे में 120 रन।

*वेस्टइंडीज के मार्लन सैमुअल्स: भारत के विरुद्ध अक्टूबर 2002 में कोलकाता टेस्ट में 104 रन और एक महीने बाद विजयवाड़ा वनडे में 108* रन।

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1983 वर्ल्ड कप में कपिल देव के मशहूर 175* रन के बारे में बहुत कुछ लिखा जाता है पर उनके पहले टेस्ट 100 (जनवरी 1979 में दिल्ली में 126*) के बारे में ज्यादा नहीं लिखा गया हालांकि सही मायने में यही वह पारी थी जिसने कपिल देव की टैलेंट का परिचय दिया क्रिकेट की दुनिया को। खुद कपिल ने इसे टेस्ट क्रिकेट में अपने सबसे बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक माना।

वे कहते हैं, 'मैंने 5 विकेट लेने से भी पहले टेस्ट 100 बनाया था। उपमहाद्वीप की पिचें बल्लेबाजों को ज्यादा मदद देती होती हैं। टेस्ट क्रिकेट मेरे लिए नया था- मेरा डेब्यू टेस्ट तो वास्तव में ऐसा पहला था जो मैंने देखा था। इसलिए मुझे ये समझने में समय लगा कि गेंदबाजी कैसे करनी है और विकेट कैसे लेने हैं? वह 100 बड़ा खास था क्योंकि उसी से मुझे एक अलग पहचान मिली। लोग कहने लगे, वह एक ऑलराउंडर है, बल्लेबाजी कर सकता है, और इससे ही टीम में बने रहने में मदद मिलती है।'

टेस्ट में भारत ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। एक सपाट, वैसी ही फ्लैट पिच जिसे बनाने के लिए सीता राम मशहूर थे, भारत ने पूरे दो दिन और तीसरे दिन तीन चौथाई घंटे की बैटिंग में 566 रन बनाए (उस समय भारत का सबसे ज्यादा स्कोर)। गावस्कर (120 रन बनाने में लगभग 6 घंटे लिए) और वेंगसरकर (जो पिछले टेस्ट में दो बार 0 पर आउट होने के बाद अपनी जगह बचाने के लिए खेल रहे थे- कप्तान जैसे ही खेले और 109 रन बनाने में साढ़े पांच घंटे लिए) के मेहनत से बने 100 (ऐसी बैटिंग जिसे देखना भी किसी दर्द से कम नहीं था) के उलट, कपिल ने 124 गेंद में 11 चौकों और 1 छक्के की मदद से 126* रन बनाए। भारत को इस धीमी स्कोरिंग (रन रेट 3.97) का भारी नुकसान हुआ क्योंकि चौथे और पांचवें दिन की बारिश की मदद से वेस्टइंडीज ने टेस्ट बचा लिया।

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उस दिन सभी ने जाना कि ये कपिल देव हैं। ऐसे बैटिंग नहीं की जैसे कोई डरा हुआ हो। दूसरे दिन का खेल खत्म होने पर वे 94* पर थे, और अगली सुबह पहले ही ओवर में 4 और फिर 6 मारकर अपनी सेंचुरी पूरी की। टेस्ट क्रिकेट में छक्का मारकर, अपनी पहली सेंचुरी पूरी करने वाले पहले क्रिकेटर बने।

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चरनपाल सिंह सोबती
 

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Charanpal Singh Sobti
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