विजय सैमुअल हजारे की गिनती भारत के महान बल्लेबाजों में होती है। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया और भारतीय क्रिकेट के शुरुआती दौर में टीम को मजबूती दी। उनके सम्मान में भारत के घरेलू वनडे टूर्नामेंट का नाम रखा गया है।
विजय हजारे का जन्म 11 मार्च 1915 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। ग्रामीण इलाके में विजय हजारे को ऑस्ट्रेलिया के महान स्पिन गेंदबाज क्लैरी ग्रिमेट ने कोचिंग दी थी।
1934/35 में फर्स्ट क्लास करियर की शुरुआत करने वाले विजय हजार ने साल 1946 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी। 31 साल की उम्र में भारत की ओर से पहला मैच खेलते हुए विजय हजारे ने 31 रन और 34 रन की पारियां खेली थीं।
विजय हजारे भारत की ओर से 1,000 रन का आंकड़ा छूने वाले पहले खिलाड़ी थे। वह टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक (116 और 145 रन) लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी भी हैं। यह कारनामा उन्होंने जनवरी 1948 में एडिलेड के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध किया था। वह प्रथम श्रेणी में तिहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय भी हैं, जिन्होंने यह कारनामा जनवरी 1940 में महाराष्ट्र की तरफ से खेलते हुए बड़ौदा के खिलाफ किया था।
प्रथम श्रेणी में 50 शतक लगाने वाले पहले भारतीय विजय हजार ने भारत की तरफ से 30 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान 52 पारियों में 47.65 की औसत के साथ 2,192 रन बनाए, जिसमें 7 शतक और 9 अर्धशतक शामिल रहे। उनकी कप्तानी में ही आजाद भारत ने पहली टेस्ट जीत हासिल की थी। यह मैच साल 1952 में खेला गया, जिसमें इंग्लैंड के खिलाफ भारत ने पारी और 8 रन से मुकाबला अपने नाम किया था।
विजय हजारे भारत की ओर से 1,000 रन का आंकड़ा छूने वाले पहले खिलाड़ी थे। वह टेस्ट मैच की दोनों पारियों में शतक (116 और 145 रन) लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी भी हैं। यह कारनामा उन्होंने जनवरी 1948 में एडिलेड के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध किया था। वह प्रथम श्रेणी में तिहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय भी हैं, जिन्होंने यह कारनामा जनवरी 1940 में महाराष्ट्र की तरफ से खेलते हुए बड़ौदा के खिलाफ किया था।
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साल 1960 में विजय हजारे को 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया, जिसके बाद साल 1996 में 'सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार' से नवाजा गया। आज इसी दिग्गज के नाम पर भारतीय घरेलू क्रिकेट में वनडे ट्रॉफी खेली जाती है, जिसकी शुरुआत 2002-03 में हुई थी। इसमें रणजी की सभी टीमें हिस्सा लेती हैं।