जिस दिन ECB (इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड) ने 'द हंड्रेड' की सभी 7 शहर वाली, 8 टीम (दो टीम लंदन से) में से हर एक में कम से कम 49 प्रतिशत हिस्सेदारी की नीलामी को मंज़ूरी दी, उसी दिन मालूम था कि सबसे ज्यादा नजरें लंदन वाली दोनों टीम: सरे काउंटी क्रिकेट क्लब (बेस : द ओवल स्टेडियम) की 'ओवल इनविंसिबल्स (Oval Invincibles)' और एमसीसी (MCC : मार्लेबॉन क्रिकेट क्लब) की लॉर्ड्स वाली 'लंदन स्पिरिट (London Spirit)' पर होंगी।
सभी 8 टीम में से 'लॉर्ड्स' वाली टीम के सबसे ज्यादा कीमत का होने का भी अनुमान था और उस पर हर कोई जानता था कि मुकेश अंबानी, भारत के सबसे अमीर व्यक्ति जो मुंबई इंडियंस के साथ-साथ तीन और टीम (SA20 में MI केपटाउन, ILT20 में MI एमिरेट्स और MLC में MI न्यूयॉर्क) के भी मालिक हैं, लंबे समय से 'लॉर्ड्स' से जुड़ने के इच्छुक हैं। इसलिए जब ये मौका सामने आया तो मालूम था कि वे बड़ी बोली लगाएंगे तथा किसी भी और खरीदार को टिकने नहीं देंगे। उन्होंने फटाफट ऑफिशियल तौर पर 'लंदन स्पिरिट' में अपनी दिलचस्पी भी जाहिर कर दी और उसके पसंदीदा बोली लगाने वाले बन गए।
रिलायंस के फाइनेंस के जानकारों ने अब ये हिसाब लगाना शुरु कर दिया कि कितनी बड़ी और किस हद तक बोली लगाना सही रहेगा। इरादा साफ़ था कि 'लंदन स्पिरिट' में हिस्सेदारी खरीदो और इसे 'MI लंदन' के नाम के साथ एक नया ब्रांड बना दो। दूसरी तरफ ECB को भी ये मालूम था कि 'लंदन स्पिरिट' उनके 'द हंड्रेड' का सबसे बड़ा आकर्षण है इसके लिए बाकी फ्रेंचाइजी से बड़ी बोली लगेगी। यहां तक अंदाजा था कि कुल बिक्री के अनुमान का एक-चौथाई हिस्सा तो अकेली ये टीम ला सकती है।
'लंदन स्पिरिट' के 'लॉर्ड्स' कनेक्शन के साथ-साथ, बाकी टीमों से 'अलग' होने की एक वजह और भी थी। इस टीम के मालिकाना हक असल में खुद ECB के पास थे जबकि बाकी टीमों के किसी न किसी काउंटी क्रिकेट क्लब के पास। जब ECB ने इसमें भी 49% हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया तो बचा 51% हिस्सा उन MCC को गिफ्ट कर दिया जिनके पास लॉर्ड्स स्टेडियम के अधिकार हैं। MCC ने तय किया कि वे टीम पर अपना कंट्रोल रखेंगे और अपनी 51% हिस्सेदारी कभी नहीं बेचेंगे। जब 2025 में 'लंदन स्पिरिट' महिला टीम ने पहली बार ट्रॉफी जीती, वह भी 'द हंड्रेड' के किसी महिला मैच के लिए रिकॉर्ड तोड़ 22000 दर्शकों की मौजूदगी में, 'वेल्श फायर' को 4 विकेट से हराकर, तो इस टीम में लोगों की दिलचस्पी और भी ज़्यादा बढ़ गई।
उधर रिलायंस ने बड़ी समझदारी से, साथ ही साथ 'प्लान B' पर भी काम करना शुरू कर दिया क्योंकि अगर कोई 'लंदन स्पिरिट' के लिए उनसे भी बड़ी लगा गया, तो वे क्या करेंगे? साथ में उन्हें MCC से ये फ़ीडबैक मिल रहा था कि MCC की उन्हें 49% हिस्सेदारी बेचने में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं है। MCC को डर था कि अगर वे लॉर्ड्स में आ गए तो एक दिन ये पॉवरफुल अंबानी परिवार, 'लॉर्ड्स' पर भी MCC की पकड़ कमज़ोर कर देगा। साथ में ये भी डर था कि अंबानी परिवार के बोली लगाने से कहीं ये एकतरफ़ा न हो जाए। भला कौन उनके मुकाबले में बोली आगे बढ़ाएगा? इस तरह दोनों पक्ष लंदन स्पिरिट की डील में पीछे हटते से दिखाई दिए।
ऐसे में, अचानक ही, लंदन की दूसरी टीम, 'ओवल इनविंसिबल्स', फोकस में आ गई। अंबानी परिवार ने भी 'इनविंसिबल्स' पर ज़्यादा ध्यान इसलिए दिया क्योंकि यहां उन्हें लगा कि वे किसी न किसी दिन ('सरे काउंटी' के अपनी 51% हिस्सेदारी बेचने पर) 100 फीसदी मालिकाना हक़ या कम से कम कंट्रोलिंग हिस्सेदारी हासिल कर लेंगे।
तो इस तरह से आखिरकार, रिलायंस ने 'ओवल इनविंसिबल्स' में 49% हिस्सेदारी, 123 मिलियन पौंड के वैल्यूएशन पर 60 मिलियन पौंड से ज्यादा का भुगतान कर, हासिल कर ली। दूसरी तरफ़, जैसी कि उम्मीद थी 'लंदन स्पिरिट' सबसे ज्यादा वैल्यू वाली टीम साबित हुई और उसकी वैल्यूएशन 295 मिलियन पौंड थी। ECB को टेक दिग्गजों के एक ग्रुप से इस डील के 145 मिलियन पौंड मिले।
'इनविंसिबल्स' को हासिल करने के लिए, रिलायंस को सबसे बड़ी टक्कर CVC कैपिटल (आईपीएल में 'गुजरात टाइटन्स' के मालिक) से मिली। इसी CVC कैपिटल ने बाद में 'क्रिकेट इन्वेस्टर होल्डिंग्स लिमिटेड' के ज़रिए 'लंदन स्पिरिट' को हासिल कर लिया। अब तो ये भी लीक हो गया है कि आखिरकार ECB ने, 8 टीम में से, सबसे पहले 'ओवल' की टीम में हिस्सेदारी को क्यों बेचा? वे नहीं चाहते थे कि अंबानी परिवार नाराज रहे। उनके नाराज होने से फिजूल में दूसरी टीमों के लिए ऐसा टकराव होता जिसमें और कोई दूसरा भारतीय बिजनेस हाउस या फ़्रैंचाइज़ी अंबानी परिवार के सामने बोली लगाकर उनका गुस्सा मोल नहीं लेता।
ये नजरिया ओवल इनविंसिबल्स' की बिक्री में जो हुआ उससे सही साबित हो गया। नीलामी 120 मिलियन पौंड से शुरू हुई और 123 मिलियन पौंड पर रूक गई- रिलायंस के सामने बोली बढ़ाने वाला ही कोई नहीं था। इस तरह से रिलायंस ने बड़े फ़ायदे का सौदा किया- कहीं कम पैसा खर्च कर वे लंदन की ही एक टीम ले गए और वह भी इस उम्मीद के साथ कि किसी न किसी दिन ये 'उनकी' ही टीम होगी।
नीता अंबानी के लिए, 'क्रिकेट सिर्फ़ एक खेल नहीं, उससे कहीं ज़्यादा है; यह एक ऐसा जुनून है जो अलग-अलग जगह और कल्चर के लोगों को आपस में जोड़ता है।' आगे कहा, ‘ओवल इनविंसिबल्स को अपने मुंबई इंडियंस परिवार में शामिल करना हमारे लिए गर्व का और एक खास अंबानी मोमेंट है।’
‘इस पार्टनरशिप के साथ, हम भारत, न्यूयॉर्क, यूएई, दक्षिण अफ्रीका और अब इंग्लैंड तक अपने MI फ़ैन बेस को बढ़ा रहे हैं – जो हमारी ग्लोबल क्रिकेट यात्रा का एक नया चेप्टर है। मुंबई इंडियंस में, हम युवा टेलेंट को निखारने, चैंपियन टीमें बनाने और फ़ैन्स को खेल के और करीब लाने के लिए पूरी तरह से लगे हैं।’
ओवल इनविंसिबल्स को इसके बाद द हंड्रेड में MI London के तौर पर रीब्रांड कर दिया। सरे की चाह थी कि वे सरे-ब्रांडेड टीम के तौर पर ही पहचान में रहें पर नाम बदलना तो एक बड़े टेकओवर की बस शुरुआत है।
Also Read: LIVE Cricket Score
चरनपाल सिंह सोबती