Zim Afro T10: हर हिंदुस्तानी की धड़कनें तेज थीं, क्योंकि दूसरी बार वर्ल्ड कप जीतने का मौका था, लेकिन श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मुकाबले से पहले वह कुछ घट चुका था। आशीष नेहरा, जो पूरी सीरीज में भारत के लिए विकेट बंटोरने में लगे हुए थे, फाइनल से पहले चोट के कारण अचानक से मैदान से बाहर जा चुके थे। टीम इंडिया के सामने बॉलिंग ऑप्शन चुनने की चुनौती थी, तब सामने उस खिलाड़ी को लाया गया, जो 42 दिन से खुद क्रिकेट के मैदान से बाहर था, मगर जब मैदान पर आया और फाइनल मुकाबला खेला गया तो भारत दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनकर आया था।
यह कहानी है अक्सर विवादों में रहे बॉलर श्रीसंत की। 6 फरवरी 1983 को केरल में जन्मे श्रीसंत ने क्रिकेट में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। 6 फरवरी 1983 को जन्मे केरल के इस तेज गेंदबाज को बचपन में लेग स्पिन का शौक था, लेकिन भाई की सलाह पर मीडियम पेस अपनाई। 2000 में पेस फाउंडेशन में चयन और 2002 में रणजी पदार्पण के बाद वे भारत के लिए खेलने वाले केरल के पहले टी-20 खिलाड़ी बने।
वे ऐसे खिलाड़ी हैं जो दो बार वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा रहे। जहां 2007 के वर्ल्ड कप मैच में उन्हें अक्सर फाइनल मुकाबले में पकड़े गए कैच के लिए याद किया जाता है, तो वहीं 2011 का फाइनल मुकाबला उनके जीवन का एक ऐसा किस्सा है जब चुनौती उनके सामने सबसे अधिक थी।