मंसूर अली खान पटौदी की गिनती भारतीय क्रिकेट के महान कप्तानों में होती है। 5 जनवरी 1941 को भोपाल के शाही खानदान में जन्मे पटौदी ने महज 21 साल की उम्र में टीम इंडिया की कमान संभाली। उनकी आक्रामक सोच, फिटनेस पर जोर और नेतृत्व ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई। अपने पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी के नक्शेकदम पर चलते हुए मंसूर अली खान ने न सिर्फ भारत की ओर से क्रिकेट खेला, बल्कि कप्तानी भी की।
1 जुलाई 1961 को इंग्लैंड के ईस्ट ससेक्स में कार एक्सीडेंट के दौरान पटौदी की दाहिनी आंख में कांच का टुकड़ा घुस गया, जिसके चलते उन्होंने एक आंख की रोशनी खो दी। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और कुछ ही महीनों बाद भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया।
'टाइगर पटौदी' के नाम से मशहूर दाएं हाथ के बल्लेबाज मंसूर अली खान पटौदी ने दिसंबर 1961 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया था। दूसरी टेस्ट पारी में ही पटौदी ने अर्धशतकीय पारी खेली। तीसरे मुकाबले में उन्होंने शतक भी जमा दिया।