क्रिकेट भारत का सबसे लोकप्रिय खेल है। देश का सामान्य वर्ग हो संभ्रांत वर्ग, यह खेल हर वर्ग को एक समान उत्साहित और रोमांचित करता है। हालांकि, शुरुआत में ऐसा नहीं था। क्रिकेट भारत में अपने शुरुआती चरण में राजघरानों और वहां कार्य करने वाले लोगों तक ही सीमित था। राजघरानों ने ही इस खेल को देश में लोकप्रिय किया और इसमें एक बड़ा योगदान जामनगर के महाराजा कुमार रणजीत सिंह का भी है।
रणजीत सिंह भारतीय क्रिकेट का पितामह कहा जाता है। उनका जन्म 10 सितंबर 1872 को गुजराज के काठियावाड़ के सरोदर गांव में हुआ था। उन्हें रणजी सिंह के नाम से भी जाना जाता है। शुरुआती शिक्षा देश में ग्रहण करने के बाद वह 16 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भी गए थे। छात्र जीवन में वह क्रिकेट के अलावा, फुटबॉल और टेनिस भी खेलते थे, लेकिन क्रिकेट ने उन्हें अमिट पहचान दिलाई।
रणजी सिंह एक बेहतरीन बल्लेबाज थे। उनकी कलाईयों में जादू था। उन्होंने क्रिकेट को कई शानदार और ऑकर्षक शॉट दिए। इसमें लेग ग्लांस जैसे ऑन साइड के कई शॉट शामिल हैं। रणजी ऐसे शॉट खेलते थे जिसकी गेंदबाज या विपक्षी टीम ने अपेक्षा भी नहीं की होती थी। उनकी बल्लेबाजी क्षमता की वजह से ही उन्हें इंग्लैंड टीम में शामिल किया गया था। वह इंग्लैंड की टीम में शामिल होने वाले एशियाई मूल के पहले क्रिकेटर थे। उस वक्त भारत में अंग्रेजों का शासन था।