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वाशिंगटन सुंदर: जन्म से हैं बहरे, इस वजह से पड़ा Washington नाम

23 साल के वाशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) का जीवन संघर्षों से भरा हुआ रहा है। वाशिंगटन सुंदर के नाम के पीछे की क्या कहानी है और क्या आप जानते हैं कि ये खिलाड़ी एक कान से बहरे हैं।

Prabhat  Sharma
By Prabhat Sharma November 30, 2022 • 12:18 PM

India vs New Zealand 3rd ODI: वाशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) सुर्खियों में हैं। क्राइस्टचर्च के हेगले ओवल (Hagley Oval in Christchurch) में खेले गए भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरे वनडे मुकाबले में वाशिंगटन सुंदर ने 51 रनों की धमाकेदार पारी खेली। पहले वनडे मुकाबले में भी वाशिंगटन सुंदर का बल्ला गरजा था और उन्होंने 16 गेंदों पर 37 रन बनाए थे। टीम इंडिया के इस खिलाड़ी का जीवन संघर्षों से भरा हुआ रहा है या यूं कह लें कि वाशिंगटन सुंदर अभी भी जूझ रहे हैं।

जन्म से बहरे हैं वाशिंगटन सुंदर: ये बात बहुत कम ही लोग जानते हैं कि वाशिंगटन सुंदर एक कान से बहरे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वाशिंगटन सुंदर जन्म से ही एक कान से बहरे हैं। कहा जाता है कि जब वह चार से पांच साल के थे, तब उनके माता-पिता इस मुद्दे को लेकर डॉक्टर के पास ले गए थे, लेकिन इसे हल करने का कोई तरीका नहीं निकला।

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कुछ इस तरह रहा है इंटरनेशनल करियर: कान की समस्या ने उनके हौंसले को प्रभावित नहीं किया है और उन्होंने खेलना जारी रखा। हालांकि, कभी-कभी मैदान पर उन्हें कान की इस समस्या के चलते दिक्कत में देखा गया है। 23 साल के वाशिंगटन सुंदर ने भारत के लिए अब तक 4 टेस्ट, 9 वनडे और 32 टी20 मैच खेले हैं।

वाशिंगटन सुंदर के नाम के पीछे की कहानी: ये यूनीक नाम उन्हें उनके पिता ने दिया था। वाशिंगटन सुंदर के पिता ने एक दोस्त और सलाहकार को श्रद्धांजलि के रूप में अपने बेटे का नाम वाशिंगटन सुंदर रखा। वाशिंगटन सुंदर के पिता ने कहा, 'ट्रिप्लीकेन में मेरे घर से दो गली दूर पी.डी. वाशिंगटन नाम के पूर्व सैनिक रहते थे। वाशिंगटन को क्रिकेट का अत्यधिक शौक था और वह हमें खेलते हुए देखने आया करते थे। उन्हें मेरा खेल पसंद था।

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हदपार गरीबी में बीता है वाशिंगटन सुंदर के पिता का जीवन: वाशिंगटन सुंदर के पिता ने कहा, 'मैं गरीब था और वो ही वो इंसान थे जो मेरे लिए ड्रेस खरीदते थे। मेरी स्कूल की फीस देते थे, मुझे किताबें दिलवाते थे, मुझे अपनी साइकिल से ले जाते थे और लगातार मुझे प्रोत्साहित करता थे। मैंने उस आदमी की याद में अपने बेटे का नाम वाशिंगटन रखने का फैसला किया जिसने मेरे लिए इतना कुछ किया।'