वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 7 रन से हराकर फाइनल में जगह बना ली। भारतीय टीम को फाइनल का टिकट दिलाने में स्टार तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह ने अहम योगदान दिया। बुमराह ने अपने आखिरी दो ओवर में सिर्फ़ 14 रन दिए, जबकि दूसरे सभी गेंदबाज लगभग 16 रन प्रति ओवर दे रहे थे।
ऐसा हो सकता है कि वो प्लेयर ऑफ़ द मैच या टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ न बनें, लेकिन बुमराह ने मुश्किल मौकों पर भारत को बार-बार बचाया है। इस बार भी उन्होंने टीम की नैय्या डूबने से बचाई है। बुमराह जैसा गेंदबाज़ जनरेशन में एक ही बार आता है और ये कई क्रिकेटर्स भी मान चुके हैं, ऐसे में इस जनरेशनल प्लेयर को ढूंढने में जिस व्यक्ति का योगदान रहा है, आज उसके बारे में भी बात करना बेहद जरूरी है।
हम उनके कोच का शुक्रिया अदा किए बिना कैसे रह सकते हैं जिन्होंने उन्हें सबसे पहले खोजा था। ये उस कोच, किशोर त्रिवेदी की कहानी है, जिसने अहमदाबाद में सबसे पहले जसप्रीत बुमराह को खोजा था। अहमदाबाद के SPIPA कॉर्पोरेट रोड के पास, एक छोटा सा क्रिकेट ग्राउंड है। यहीं पर 79 साल के किशोर त्रिवेदी आज भी अपनी रॉयल क्रिकेट एकेडमी चलाते हैं।