किसी भी मां के लिए उसके बच्चे से दूर होना सबसे मुश्किल होता है, लेकिन कभी-कभी जिंदगी में ऐसे मौके आते हैं जब हमें ये फैसला लेना पड़ता है और इस त्याग का परिणाम हक में आने पर ऐसी कहानियां मिसाल बन जाती हैं। ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ में हिस्सा लेने वाली असम की पल्लवी पायेंग की कहानी कुछ ऐसी ही है।
मिसिंग जनजाति से आने वाली वेटलिफ्टर पल्लवी पायेंग ने ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ में महिलाओं की 69 किलोग्राम श्रेणी में रजत पदक जीतकर त्याग, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश की है।
पल्लवी के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। जब उनकी बेटी सिर्फ छह महीने की थी, तब उन्हें एक कठिन फैसला लेना पड़ा। उन्हें वेटलिफ्टिंग या फिर अपनी 6 महीने की बेटी में किसी एक को चुनना था। पल्लवी ने दिल पर पत्थर रखकर वेटलिफ्टिंग को चुना। इस फैसले में उनके परिवार का अहम योगदान रहा। उनके पति सुखावन थौवमुंग ने उनका पूरा साथ दिया, जबकि उनकी मां ने बच्ची की देखभाल की जिम्मेदारी संभाली।