मनोज सरकार: कभी रैकेट खरीदने के लिए नहीं थे पैसे, चुनौतियों से लड़कर देश को पैरालंपिक में दिलाया था (Image Source: IANS)
भारत के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार ने चुनौतियों से लड़कर देश का मान बढ़ाया है। 2020 टोक्यो पैरालंपिक के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट मनोज युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा और आदर्श हैं।
12 जनवरी 1990 को उत्तराखंड के रुद्रपुर में जन्मे मनोज जब महज डेढ़ साल के थे, तो उन्हें तेज बुखार आया। परिवार के आर्थिक हालात ऐसे नहीं थे कि बेटे का इलाज किसी अच्छे हॉस्पिटल में करा सके। ऐसे में एक झोलाछाप डॉक्टर से मनोज का इलाज कराया गया। गलत दवाओं से मनोज के पैर में कमजोरी आ गई।
मनोज बचपन से ही परिवार के हालात को अच्छी तरह समझते थे। यही वजह रही कि स्कूल की छुट्टियों में वह पिता के साथ लोगों के घरों में जाकर पुताई का काम करते, ताकि दो पैसे घर आ सकें।