भारत के अनुदीप रेड्डी न सिर्फ ओलंपिक का सपना देख रहे हैं, बल्कि देश में लैक्रोस के विकास में भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। नेशनल टीम 2026 एशियन गेम्स की तैयारी कर रही है। रेड्डी ने बताया कि वह एक ऐसा सिस्टम बनाने पर काम कर रहे हैं जो कुछ ही सालों में भारत को लैक्रोस का पावरहाउस बना देगा।
कानून के विद्यार्थी और पहले हॉकी खिलाड़ी रहे रेड्डी, ओलंपिक गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे वैश्विक मल्टी-स्पोर्ट इवेंट से जुड़े कम जाने-पहचाने खेलों की जानकारी लेने के क्रम में लैक्रोस के बारे में जान गए।
ओलंपिक्स डॉट कॉम को रेड्डी ने बताया, "मैं एक दिन बोर हो रहा था और ऐसे नए खेल खोजने लगा जो ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे मल्टी-स्पोर्ट इवेंट का हिस्सा हों। तभी मेरी नजर लैक्रोस पर पड़ी। ओलंपिक किसी भी एथलीट के लिए सबसे बड़ा स्टेज होता है। यह मेरे लिए इस खेल को अपनाने की मुख्य वजहों में से एक था।"