हर खेल में कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं, जिनके प्रदर्शन की मिसालें दी जाती हैं। अपने त्याग, बलिदान और सफलता से यह खिलाड़ी अपने पीछे विरासत छोड़ जाते हैं। लंबी कूद के खेल में भारत के लिए ऐसे ही खिलाड़ी रहे थडायुविला चंदापिल्लई योहानन (टी.सी. योहानन)। एशियाई खेलों में देश को मेडल दिलाने की खातिर योहानन अपने दर्द को नजरअंदाज करके मैदान पर इंजेक्शन लेकर उतरे थे।
टी.सी. योहानन का जन्म केरल के कोल्लम जिले के एक छोटे से गांव में 19 मई 1947 को हुआ। योहानन को बचपन से ही कूदने में काफी रुचि थी। योहानन एक बार कूदकर नहर को पार करने में नाकाम रहे थे। इसके बाद उनके पिता ने नहर पार करने के लिए एक गिलास नींबू पानी का इनाम रखा था।
इनाम की चाह में योहानन नहर को पार करने में सफल रहे और लंबी कूद के खेल में उनके करियर की असल शुरुआत यहीं से हुई। हालांकि, योहानन इसे शुरुआत में करियर के तौर पर नहीं देखते थे। वह अपनी पढ़ाई में व्यस्त थे और उन्होंने भिलाई जाकर अपनी मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी।