पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाने चाहिए कि पूर्व खिलाड़ियों को कोच और मेंटोर के तौर पर भारतीय खेल जगत में वापस लाया जाए। उन्होंने कहा कि अनुभवी पूर्व खिलाड़ियों को सिर्फ प्रशासनिक दफ्तरी कामों में लगाकर देश एक कीमती संसाधन को बर्बाद कर रहा है।
ठाकुर ने यह बात 'स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया' (एसजेएफआई) के स्वर्ण जयंती राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन खेल पत्रकारों को संबोधित करते हुए कही। यह कार्यक्रम 'कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया' में आयोजित किया गया था और इसकी मेजबानी 'दिल्ली स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट एसोसिएशन' (डीएसजेए) ने की थी। उन्होंने कहा, "कई खिलाड़ी जिन्हें खेलों के जरिए नौकरियां मिलीं, वह अब दफ्तरों में काम कर रहे हैं, जबकि उनमें से कई कोच या मेंटोर के तौर पर फिर से खेल से जुड़ सकते हैं। इन भूमिकाओं में वह खेलों में कहीं ज्यादा योगदान दे सकते हैं।"
ठाकुर ने खिलाड़ियों के विकास के लिए डेटा-आधारित दृष्टिकोण पर भी जोर दिया, जिससे किसी खिलाड़ी के करियर के शुरुआती चरणों से ही उसकी प्रतिभा को पहचाना और निखारा जा सके। उन्होंने कहा, "हमें डेटा का विश्लेषण करने और किसी खिलाड़ी की पूरी यात्रा के लिए एक उचित ट्रैकिंग सिस्टम बनाने की जरूरत है, ताकि प्रतिभा को जल्दी पहचाना जा सके और सही सहयोग के साथ उसे तराशा जा सके।"