योगेश कथुनिया देश के एक प्रसिद्ध पैराएथलीट हैं। उनके माता-पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन योगेश ने खेल के क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया है और देश को पैरालंपिक में रजत पदक दिलाया है।
डिस्कस थ्रोअर के खिलाड़ी योगेश कथुनिया का जन्म 3 मार्च 1997 को बहादुरगढ़, हरियाणा में हुआ था। योगेश के माता-पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बने, लेकिन 9 साल की उम्र में पता चला कि उन्हें गुइलेन-बैरे सिंड्रोम नामक खतरनाक बीमारी है। यह न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। इससे शरीर की गति प्रभावित होती है और मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। व्यक्ति अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाता। योगेश के साथ भी ऐसा ही था, लेकिन फिजियोथेरेपी की मदद से वह बैसाखी के सहारे खड़े हुए। इसमें उनकी मां मीना देवी का अहम योगदान रहा।
योगेश कथुनिया की रुचि खेल में थी। 2016 में, किरोड़ीमल कॉलेज में छात्र संघ के महासचिव सचिन यादव ने उन्हें पैरा एथलीटों के वीडियो दिखाकर खेलों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद कथुनिया ने पैरा स्पोर्ट्स में कदम रखा। 2018 में, उन्होंने बर्लिन में 2018 वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स यूरोपियन चैंपियनशिप में एफ36 कैटेगरी में 45.18 मीटर तक डिस्कस थ्रो करके विश्व रिकॉर्ड बनाया।