Ravi kumar dahiya
चांदी पर बैठना पसंद नहीं, मेरा लक्ष्य सोना: रवि दहिया
रवि दहिया के नाम से मशहूर इस पहलवान का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के नहरी में 12 दिसंबर 1997 को हुआ था। हरियाणा को भारतीय कुश्ती का केंद्र माना जाता है। रवि को अपने प्रदेश के साथ ही कुश्ती का प्रभाव अपने घर में भी देखने को मिला। रवि के पिता राकेश दहिया तो किसान हैं, लेकिन उनकी मां ऊर्मिला देवी और चाचा मुकेश दहिया कुश्ती से जुड़े रहे हैं। इस वजह से रवि को कुश्ती विरासत में मिली है, जिसे उन्होंने अपने अथक परिश्रम से सफल और समृद्ध बनाया है।
रवि ने महज 10 साल की उम्र में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कुश्ती प्रशिक्षण के लिए दाखिला लिया। घर से दूर प्रशिक्षण के लिए पहुंचे रवि के लिए उनके पिता रोजाना 39 किलोमीटर की दूरी तय कर दिल्ली स्टेडियम में उनके लिए घर से ताजा दूध व फल लेकर आते थे। यह प्रक्रिया तब तक जारी थी। रवि के एक बड़े पहलवान के रूप में लोकप्रिय होने तक यह प्रक्रिया जारी रही। ऐसे में रवि के पिता की साधना उन्हें पहलवान बनाने की दिशा में एक बड़ी प्रेरणा है।
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