चुन्नी गोस्वामी: भारत के महान खिलाड़ी, जिन्होंने फुटबॉल से संन्यास के बाद क्रिकेट में जलवा बिखेरा

Updated: Wed, Jan 14 2026 18:08 IST
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चुन्नी गोस्वामी की गिनती भारतीय फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में होती है, जिन्होंने एशियन गेम्स 1962 में देश को गोल्ड मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई। शानदार ड्रिब्लिंग और नेतृत्व क्षमता के लिए मशहूर गोस्वामी ने फुटबॉल से संन्यास के बाद प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी जलवा बिखेरा।

15 जनवरी 1938 को किशोरगंज में जन्मे सुबिमल गोस्वामी उच्च मध्यम वर्गीय परिवार से थे, जिन्होंने अपने पूरे करियर में सिर्फ एक ही क्लब 'मोहन बागान' की ओर से खेला। हालांकि, इस बीच उन्हें दूसरे क्लबों से भी ऑफर मिला, लेकिन मोहन बागान के साथ उनका लगाव बेहद खास था।

1956 से 1964 तक, गोस्वामी ने एक फुटबॉलर के तौर पर भारत के लिए 50 मैच खेले। साल 1962 में उनकी कप्तानी में भारत ने एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था, जिसके बाद साल 1964 में मर्डेका कप में सिल्वर अपने नाम किया।

गोस्वामी साल 1946 में महज 8 साल की उम्र में मोहन बागान क्लब की जूनियर टीम में शामिल हुए थे, जिसके बाद 1954 तक इसी का हिस्सा रहे। साल 1954 में वह मोहन बागान सीनियर टीम का हिस्सा बने। 1960-1964 तक गोस्वामी 5 सीजन के लिए कप्तान रहे और बतौर स्ट्राइकर इस टीम के लिए साल 1968 में रिटायरमेंट तक खेले। चुन्नी गोस्वामी को न सिर्फ फुटबॉल, बल्कि क्रिकेट का भी शौक था। उन्होंने मोहन बागान के लिए क्लब क्रिकेट भी खेला।

महज 30 साल की उम्र में फुटबॉल को अलविदा कहने के बाद चुन्नी गोस्वामी ने क्रिकेट के जुनून को पूरा किया। उन्होंने रणजी ट्रॉफी 1972 में बंगाल को फाइनल तक पहुंचाया।

चुन्नी गोस्वामी ने साल 1967 में गैरी सोबर्स की वेस्टइंडीज टीम के खिलाफ प्रैक्टिस मैच में 8 विकेट हासिल किए थे। इस मुकाबले के दौरान चुन्नी गोस्वामी ने 25 गज तक दौड़ लगाते हुए एक शानदार कैच लपका था, जिसके बाद खुद सोबर्स ने उनकी जमकर तारीफ की। इस पर गोस्वामी ने मजाकिया लहजे में कहा, "सोबर्स को नहीं पता था कि मैं अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर था। पीछे की ओर 25 गज दौड़ना मेरे लिए कोई मुश्किल काम नहीं है।"

महज 30 साल की उम्र में फुटबॉल को अलविदा कहने के बाद चुन्नी गोस्वामी ने क्रिकेट के जुनून को पूरा किया। उन्होंने रणजी ट्रॉफी 1972 में बंगाल को फाइनल तक पहुंचाया।

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शानदार खेल के लिए चुन्नी गोस्वामी को साल 1962 में एशिया के बेस्ट स्ट्राइकर का अवॉर्ड मिला, जिसके बाद साल 1963 में 'अर्जुन अवॉर्ड' और साल 1983 में 'पद्म श्री अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। साल 2005 में उन्हें 'मोहन बागान रत्न' से नवाजा गया। 30 अप्रैल 2020 को इस दिग्गज खिलाड़ी ने 82 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया।

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