भारत के पूर्व क्रिकेटर दत्ताजी राव गायकवाड़ दाएं हाथ के बल्लेबाज और ऑफब्रेक गेंदबाज रहे, जिन्होंने 1950–60 के दशक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुछ समय के लिए टीम की कप्तानी भी की। घरेलू क्रिकेट में दत्ताजी राव गायकवाड़ का योगदान उल्लेखनीय रहा है।
27 अक्टूबर 1928 को गुजरात के बड़ौदा में जन्मे दत्ताजी राव गायकवाड़ की डिफेंस तकनीक बेहद शानदार थी। वह न सिर्फ एक कुशल बल्लेबाज थे, बल्कि एक वर्सेटाइल फील्डर भी थे, जो अपनी कवर ड्राइव से विपक्षी टीम को काफी परेशान करते थे।
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के साथ दत्ताजी राव गायकवाड़ ने जून 1952 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बतौर सलामी बल्लेबाज डेब्यू किया था। उनका टेस्ट करियर 1952 से 1961 तक चला, लेकिन इस दौरान सिर्फ 11 टेस्ट मैच ही खेल सके। दत्ताजी राव ने साल 1959 के इंग्लैंड दौरे पर पांच टेस्ट मुकाबलों की सीरीज में से चार में भारत की कप्तानी की थी। इस दौरे में टीम इंडिया को पांचों मैच में हार का झेलनी पड़ी थी।
साल 1952 में दत्ताजी ने 3 टेस्ट मैच खेले, जिसमें कुल 88 रन बनाए। इसके बाद अगले साल उन्हें 2 टेस्ट खेलने के मौके मिले, जिसमें 43 रन की पारी भी खेली, लेकिन इसके बाद अगले मौके के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
साल 1959 में वेस्टइंडीज के विरुद्ध दत्ताजी टेस्ट खेलने उतरे और इस मुकाबले में 52 रन की पारी खेलकर खुद को साबित किया। इस साल उन्होंने कुल 5 टेस्ट खेले, जिसमें क्रमश: 58, 64, 33, 5 और 26 रन बनाए। साल 1961 में उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला, जिसमें 9 रन ही बना सके। गायकवाड़ ने 4 टेस्ट मुकाबलों में भारत की कमान संभाली, जिसमें 16 की औसत के साथ 128 रन बना सके।
साल 1952 में दत्ताजी ने 3 टेस्ट मैच खेले, जिसमें कुल 88 रन बनाए। इसके बाद अगले साल उन्हें 2 टेस्ट खेलने के मौके मिले, जिसमें 43 रन की पारी भी खेली, लेकिन इसके बाद अगले मौके के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।
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13 फरवरी 2024 को 95 साल की उम्र में यह दिग्गज खिलाड़ी दुनिया को अलविदा कह गया। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए अंशुमन गायकवाड़ ने भी क्रिकेट को चुना। वह भारत की ओर से 40 टेस्ट और 15 वनडे खेले।