मेसी इवेंट के आयोजक शताद्रु दत्ता ने सॉल्ट लेक स्टेडियम में मची भगदड़ के मामले में चुप्पी तोड़ी है। शताद्रु ने खुद को 'बलि का बकरा' बताते हुए कहा है कि उन्हें मेसी को कोलकाता लाने का अफसोस है। शताद्रु ने तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास की मैदान पर मौजूदगी को लेकर सवाल उठाते हुए खुलासा किया है कि जब पुलिस ने उन्हें विमान के अंदर गिरफ्तार किया था, तो मेसी और उनके मैनेजर ने इसका विरोध किया।

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दरअसल, 13 दिसंबर 2025 को दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम आए थे, जहां भारी अव्यवस्था देखने को मिली। जब फैंस को अपने पसंदीदा फुटबॉलर की एक झलक तक नसीब नहीं हुई, तो नाराज फैंस ने स्टेडियम में तोड़फोड़ की। इस घटना के बाद आयोजक शताद्रु दत्ता को गिरफ्तार किया गया था।

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शताद्रु दत्ता ने 'आईएएनएस' के साथ खास बातचीत में कहा, "मुझे मेसी को कोलकाता लाने का अफसोस है। कोलकाता से मेरा एक भावनात्मक जुड़ाव है। मैं चाहता था कि यह शहर मेसी को देखे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा। यह पुलिस की पूरी तरह से नाकामी थी। गृह मंत्रालय (एमएचए) ने इसके लिए बंगाल सरकार को जेड प्लस श्रेणी दी थी। तत्कालीन सीएम ममता बनर्जी भी आने वाली थीं, लेकिन इवेंट में मची भगदड़ पुलिस की बहुत बड़ी नाकामी थी। मुझे तकनीकी बातों की ज्यादा जानकारी नहीं है। मुझे एक चिट्ठी मिली थी, जिसमें लिखा था कि यह एक जेड प्लस श्रेणी का कार्यक्रम है। शाहरुख खान, मेसी, सौरव गांगुली की मौजूदगी में यह एक बहुत ही कड़ी सुरक्षा वाला कार्यक्रम था। हमने कई बैठकें कीं। कार्यक्रम के दौरान मैदान पर कौन-कौन मौजूद रहेगा, इसकी पूरी रूपरेखा पुलिस ने मंजूर की थी।

शताद्रु दत्ता ने तत्कालीन खेल मंत्री अरूप बिस्वास की मैदान पर मौजूदगी को लेकर सवाल उठाते हुए कहा, "पुलिस ने सिर्फ 8-10 लोगों को ही मैदान पर जाने की इजाजत दी थी। एक अनुभवहीन खेल मंत्री ने फैंस की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया, और इल्जाम मुझ पर आया। उनके इस रवैये से पूरा कार्यक्रम ही खतरे में पड़ गया। उन्होंने अपने रसूख का गलत इस्तेमाल किया। अरूप बिस्वास कार्यक्रम की रूपरेखा का हिस्सा नहीं थे। मेरे पास कार्यक्रम की रूपरेखा मौजूद है। पुलिस को अच्छी तरह पता था कि मैदान पर किसे होना चाहिए और किसे नहीं। तीन दिन पहले ही हमने डीजी पुलिस के साथ इस बारे में चर्चा की थी। मैदान पर सिर्फ शाहरुख खान, लियोनेल मेसी, मेसी की टीम के अन्य सदस्य, सुआरेज, मैं, कुछ बच्चे, ममता बनर्जी और सौरव गांगुली को ही जाने की अनुमति थी। कार्यक्रम की रूपरेखा को मेसी और उनकी टीम ने भी मंजूरी दी थी।"

उन्होंने कोलकाता पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा, "पुलिस ने अरूप बिस्वास को मैदान पर जाने की इजाजत क्यों दी? क्या उन्हें फीफा के किसी कार्यक्रम में जाने दिया जाता? यह एक टिकट वाला सार्वजनिक कार्यक्रम था। वह मैदान पर अपने दोस्तों और परिवार वालों को फोटो खिंचवाने के लिए नहीं बुला सकते थे। मैंने उन्हें रोकने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की था। जब मैंने मैदान में प्रवेश किया, तो वहां इतने सारे लोगों को देखकर मैंने पुलिस कमिश्नर (सीपी) से बात की। मुझे नहीं लगता कि स्थिति उनके नियंत्रण में थी। डीजी पुलिस भी मैदान पर ही मौजूद थे। मैदान पर हजारों की संख्या में पुलिसकर्मी तैनात थे। उन्हें सबसे पहले वहां मौजूद सभी लोगों को मैदान से बाहर निकालना था।"

शताद्रु ने बताया, "मैंने अरूप से कहा कि वीडियो लाइव है। आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? यह वीडियो मौजूद था। पुलिस सीपी ने उनसे चले जाने को कहा, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अरूप मेसी का पीछा कर रहे थे। इसके चलते मेसी के मैनेजर अरूप से नाराज थे। मुझे पूरा भरोसा था कि जैसे ही मुख्यमंत्री आएंगी, भीड़ छंट जाएगी। मेसी तब परेशान हो गए जब एक पुलिसवाले ने सुआरेज को धक्का दिया। मेसी चिढ़ गए थे। जब तक आपको कहा न जाए, आप उन्हें छू नहीं सकते। लैटिन अमेरिका में इसे 'बैड टच' (गलत तरीके से छूना) माना जाता है। अरूप ने उनकी कमर पकड़ ली थी। लियो एक अच्छे इंसान हैं, इसलिए उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। कार में, मेसी के मैनेजर ने मुझसे कहा कि यह सुरक्षा में सेंध थी। कोई मेसी को कैसे छू सकता है? जब पुलिस मुझे विमान के अंदर गिरफ्तार कर रही थी, तो मेसी और उनके मैनेजर ने इसका विरोध किया। उन्होंने पूछा, "आप इन्हें क्यों गिरफ्तार कर रहे हैं?"

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शताद्रु दत्ता ने नई सरकार से निष्पक्ष जांच की अपील करते हुए कहा, "अभिषेक बनर्जी का फुटबॉल क्लब 'डायमंड हार्बर' इस आयोजन में एक पार्टनर था। फुटबॉल क्लब के तीन अधिकारी इस कार्यक्रम के संचालन का हिस्सा थे। उनके पास इसके लिए एक्रेडेशन था और मोहन बागान के अधिकारियों के पास भी यही एक्रेडेशन थी। योजना यही थी। मुझे नहीं पता कि वहां आईएएस अधिकारी कैसे मौजूद थे। जिस तरह से चीजें हो रही थीं, कोई भी व्यक्ति एक तस्वीर लेने के लिए उन्हें धक्का दे सकता था। तब इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? मैं बलि का बकरा हूं।"

शताद्रु ने बताया, "मैंने अरूप से कहा कि वीडियो लाइव है। आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? यह वीडियो मौजूद था। पुलिस सीपी ने उनसे चले जाने को कहा, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अरूप मेसी का पीछा कर रहे थे। इसके चलते मेसी के मैनेजर अरूप से नाराज थे। मुझे पूरा भरोसा था कि जैसे ही मुख्यमंत्री आएंगी, भीड़ छंट जाएगी। मेसी तब परेशान हो गए जब एक पुलिसवाले ने सुआरेज को धक्का दिया। मेसी चिढ़ गए थे। जब तक आपको कहा न जाए, आप उन्हें छू नहीं सकते। लैटिन अमेरिका में इसे 'बैड टच' (गलत तरीके से छूना) माना जाता है। अरूप ने उनकी कमर पकड़ ली थी। लियो एक अच्छे इंसान हैं, इसलिए उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। कार में, मेसी के मैनेजर ने मुझसे कहा कि यह सुरक्षा में सेंध थी। कोई मेसी को कैसे छू सकता है? जब पुलिस मुझे विमान के अंदर गिरफ्तार कर रही थी, तो मेसी और उनके मैनेजर ने इसका विरोध किया। उन्होंने पूछा, "आप इन्हें क्यों गिरफ्तार कर रहे हैं?"

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शताद्रु दत्ता ने उम्मीद जताई है कि वह जल्द मेसी को फिर से वापस भारत लाएंगे। उन्होंने कहा, "जब आप पुलिस को आजादी से काम करने देते हैं तो वे कर सकते हैं। जब मुझे बेल मिली तो मेसी और उनके पिता बहुत खुश हुए। मेरा रिकॉर्ड साफ है। वे जानते हैं। मुझे यकीन है कि मैं फिर से मेसी को यहां वापस लाऊंगा।"

Article Source: IANS
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