गुड फ्राइडे वाले दिन इंग्लैंड में क्रिकेट सीजन 2026 की शुरुआत काउंटी चैंपियनशिप के साथ हो गई। ये सीजन, क्रिकेट में बदलाव की चर्चा में हमेशा ख़ास रहेगा। देखिए ये सीज़न कैसे अलग है:
* तीन साल का कूकाबुरा गेंद का ट्रायल खत्म हो गया और इंग्लिश क्रिकेट पूरी तरह से ड्यूक्स गेंद पर वापस। असल में 2023 में, ECB ने तय किया कि काउंटी चैंपियनशिप के दो राउंड के मैच ऑस्ट्रेलियाई कूकाबुरा गेंद से खेलेंगे और 2024 में इसे बढ़ाकर चार राउंड कर दिए। गेंद बदलने के पीछे सोच ये थी कि इंग्लिश गेंदबाज विदेशी टूर, ख़ास तौर पर एशेज टूर के लिए बेहतर तैयारी कर सकें। इस समय 7 देश, अपने यहां टेस्ट खेलने में, कूकाबुरा गेंद का इस्तेमाल करते हैं। सोच अच्छी थी पर ये प्रयोग पूरी तरह से फ्लॉप रहा, इसकी आलोचना ही होती रही और इसे 'अब तक का सबसे घटिया एक्सपेरिमेंट' कह दिया गया।
* सब्स्टीट्यूट की एक नई कंडीशन: सबसे खास तो ये है। अब किसी खिलाड़ी की जगह, एक पूरी तरह से खेलने वाला सब्स्टीट्यूट टीम में आ सकता है यानि कि वह सिर्फ एक फील्डर नहीं होगा। किसकी जगह फील्डर आ सकता है, उसमें अब बीमारी और जिंदगी की बड़ी और ख़ास घटना जैसे कि बच्चे का जन्म या परिवार में किसी की बीमारी और खैर चोटिल होना तो है ही।
नोट कीजिए, पहले कहां सब्स्टीट्यूट मिलता था बच्चे के जन्म या परिवार में किसी की बीमारी के लिए? मौजूदा युग में खिलाड़ियों के बच्चे के जन्म के समय, पत्नी के साथ रहने की चाह के किस्से बढ़े हैं पर ऐसे खिलाड़ी को मैच छोड़ने की इजाजत नहीं दी जाती थी। अब वे जा सकेंगे और उनकी जगह टीम में दूसरा खिलाड़ी ले सकते हैं। ऐसा सब्स्टीट्यूट बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों करेगा और साफ़ बात ये है कि टीम के 11 से कम खिलाड़ियों के साथ खेलने वाला नुकसान अब नहीं होगा।
ऐसा बदलाव हो, ये चर्चा तो चल रही थी पर इस बीच एक ऐसा किस्सा हुआ जिसने इस तरह के बदलाव को तेज कर दिया। ये किस्सा है न्यूजीलैंड के क्रिकेटर ब्लेयर टिकनर का जो 2024 में इंग्लैंड में डर्बीशायर काउंटी के लिए खेल रहे थे। मैच के दौरान, उन्हें मेसेज मिला कि उनकी पत्नी सारा को ल्यूकेमिया है। वे मैच से हटना चाहते थे पर टीम को सब्स्टीट्यूट नहीं मिल रहा था। वे नहीं चाहते थे कि उनकी वजह से डर्बीशायर टीम आगे सिर्फ 10 खिलाड़ियों के साथ खेले। इस तरह का किस्सा अब नहीं होगा, खिलाड़ी मैच छोड़कर जा सकता है और उसकी जगह सब्स्टीट्यूट मिल जाएगा। आगे इस किस्से पर और ज्यादा बात करेंगे।
पिछले सीजन में मिडिलसेक्स के ओपनर सैम रॉबसन वाला एक और दिलचस्प मामला सामने आया। किसी ख़ास वजह से मेडिकल टीम उन्हें ये नहीं बता पा रही थी कि उनकी पत्नी किस तारीख के आस-पास उनके पहले बच्चे को जन्म देगी। तारीख मालूम होती तो उसके आस-पास वाला मैच वे न खेलते और पत्नी के साथ मौजूद रहते। इस मामले में तारीख न मालूम होने से हुआ ये कि वे बच्चे के जन्म के इंतजार में घर बैठ गए, चैंपियनशिप के कई मैच में नहीं खेले। आज जैसी गाइडलाइन होतीं तो ऐसा न होता।
इस तरह के बदलाव को अभी ट्रायल के तौर पर आईसीसी की सलाह पर इस सीजन के लिए लागू किया है। फ़ीडबैक पॉजिटिव रहा, तो बहुत संभव है जल्दी ही इसे टेस्ट क्रिकेट पर भी लागू कर दें। सब्स्टीट्यूट वाली सामान्य सभी शर्त लागू रहेंगी जैसे कि रिप्लेसमेंट में वैसा ही खिलाड़ी आएगा जैसा गया और कोई टीम इन बदलाव का 'गलत' फायदा न उठाने पाए। जो बीमारी या चोट की वजह से रिप्लेस होगा, वह अगले 8 दिन 'स्टैंड डाउन पीरियड' में रहेगा लेकिन इस दौरान 'द हंड्रेड' में खेल सकता है।
इस नई गाइडलाइन से पहले, चार दिन के काउंटी चैंपियनशिप मैच के दौरान, रिप्लेसमेंट की इजाज़त सिर्फ़ सिर में चोट (concussion) या इंटरनेशनल ड्यूटी पर बुलाए जाने पर ही थी जबकि चोट या बीमारी में सिर्फ़ सब्स्टीट्यूट फील्डर मिलता था। इसलिए अब इस छूट का गलत फायदा रोकने की जिम्मेदारी आ गई है। ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका और भारत में चोट लगने पर रिप्लेसमेंट की गाइडलाइन प्रयोग के तौर पर लागू है लेकिन ECB ने तो प्राइवेट ज़िंदगी से जुड़े मामलों (life events) के लिए भी सब्स्टीट्यूट की इजाज़त दे दी है।
अब न्यूजीलैंड के दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ब्लेयर टिकनर की स्टोरी पर और बात करते हैं और आपको बता दें कि हुआ क्या था? वे ससेक्स के विरुद्ध काउंटी चैंपियनशिप मैच के लिए डर्बीशायर टीम में थे। लगभग उसी समय, उनकी पत्नी सारा, अपने कुछ ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट लेने एक लोकल हॉस्पिटल गई थीं। ब्लेयर ने उन्हें ग्राउंड से फोन किया रिपोर्ट पूछने के लिए तो सारा ने रोना शुरू कर दिया और बोलीं कि उन्हें 'एक्यूट लिम्फ़ोब्लास्टिक ल्यूकेमिया' (एक तरह का ब्लड कैंसर) हो गया है। टिकनर घबरा गए, एकदम हॉस्पिटल भागे, लगभग पूरा दिन वहीं रहे और शाम को स्टेडियम इसलिए लौटे ताकि पार्किंग से अपनी कार उठा लें।
स्टेडियम पहुंचने उन्हें जो पता चला उसके बारे में तो उन्होंने सोचा भी न था। वे अभी भी मैच में खेल रहे थे। सभी ने मान लिया कि चूंकि उन्होंने मैच में हिस्सा लिया ही नहीं है इसलिए उन्हें रिप्लेस कर दें पर किसी भी गाइडलाइन में ऐसा करने की इजाजत नहीं थी। उनकी टीम ने तो मान ही लिया था कि 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेलेंगे पर अचानक ही वे स्टडियमा आ गए। विश्वास कीजिए, उसी शाम उन्होंने बैटिंग की और दिन का खेल खत्म होने पर 22* पर थे। अगले दिन उन्होंने अपने करियर का टॉप स्कोर, 47 रन बनाया। इतना ही नहीं आगे का पूरा मैच भी खेला ताकि टीम का नुकसान न हो।
मजे की बात ये है कि इस सीजन में नई कंडीशन लागू हुई और पहली ही दिन इसके तहत पहला रिप्लेसमेंट भी हो गया। एसेक्स, इंग्लैंड में ऐसी पहली ऐसी टीम बनी जिसने चोट लगने पर रिप्लेसमेंट लिया। टीम के कप्तान टॉम वेस्टली को हैंपशायर के विरुद्ध मैच में बल्लेबाजी करते हुए (28* रन पर थे) चोट लगी, उंगली टूट गई और मैच से बाहर हो गए। उनकी जगह, इंग्लैंड की अंडर-19 टीम के पूर्व ऑलराउंडर, नोआ थेन टीम में आए लेकिन इस शर्त पर कि आगे गेंदबाजी नहीं करेंगे, क्योंकि वेस्टली मैच खेलते तो गेंदबाजी न करते।
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चरनपाल सिंह सोबती