Guy de Alwis and Rasanjali Silva: इस साल जनवरी में, ऑस्ट्रेलिया की महिला क्रिकेटर एलिसा हीली ने कहा कि वे इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायर हो रही हैं और अपने करियर का आखिरी मैच, भारत के विरुद्ध WACA में टेस्ट खेला। मिचेल स्टार्क और हीली ने अप्रैल 2016 में शादी की थी और ऐसे तीसरे शादीशुदा कपल बने जिसमें दोनों टेस्ट खेले।

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बाकी दो में से, श्रीलंकाई डी एल्विस कपल (गाय और रसंजलि) कोई ज्यादा मशहूर नहीं हैं और पता नहीं क्यों उनकी क्रिकेट में कोई ख़ास चर्चा भी नहीं होती (दूसरा: इंग्लिश कपल प्राइडॉक्स, रोजर और रूथ)। गाय और रसंजलि ने 2001 में शादी की और इस कपल की कहानी बड़ी दिलचस्प है।

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गाय डी एल्विस (Guy de Alwis)1980 के दशक में एक भरोसेमंद विकेटकीपर-बैटर थे, जबकि रसंजलि सिल्वा (Rasanjali Silva) एक टैलेंटेड ऑल-राउंडर थीं। दोनों ने अलग-अलग तरह से श्रीलंका क्रिकेट में बड़ा ख़ास योगदान दिया। रसंजलि को तो खास तौर पर श्रीलंका की युवा लड़कियों में क्रिकेट में बड़े सपने देखने और बेहतर क्रिकेट खेलने का जोश पैदा करने के लिए याद किया जाता है। वे श्रीलंका के सबसे लोकप्रिय क्रिकेट कपल में से एक थे।

ये दोनों एक-दूसरे से कैसे मिले और शादी का फैसला कैसे किया? उनकी स्टोरी बड़ी अनोखी है जो शुक्र है सोशल मीडिया के ज़माने से पहले की होने की वजह से विवाद होने से बच गई।1997 में श्रीलंका में महिला क्रिकेट की शुरूआत हुई। तब तक डी एल्विस का क्रिकेट करियर खत्म हो चुका था और वे महिला टीम के कोच बन गए। रसंजलि सिल्वा तब टीम में थीं।

जब 2000 वर्ल्ड कप आया तब भी डी एल्विस कोच थे और रसंजलि कप्तान बन गई थीं। तब की बात है उन्होंने तो डी एल्विस को बड़ा सख्त टास्क-मास्टर कहा था और यहां तक कहा, ‘वह तो हमें ट्रेनिंग के दौरान ड्रिंक भी नहीं लेने देते।’ उनके आइडल सनथ जयसूर्या थे, जो तब श्रीलंका टीम के कप्तान थे। संयोग से टीम वर्ल्ड कप में कुछ ख़ास न कर पाई और आलोचना हुई तो डी एल्विस ने वर्ल्ड कप 2000 के बाद कोच की ड्यूटी छोड़ दी।

इसके बाद, जब वह महिला टीम के कोच नहीं थे, तो उन्होंने टीम की क्रिकेटर रसंजलि, जिसे पहले कोचिंग दी थी, उससे शादी कर ली। क्रिकेट में शायद ही ऐसी कोई और मिसाल है।  उनकी जोड़ी के साथ जुड़ी और ख़ास बातें:

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* ये दोनों टेस्ट क्रिकेट खेले और टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पति-पत्नी की पहली जोड़ी थे।

* ये दोनों क्रिकेट वर्ल्ड कप में खेले। रसंजलि तो न्यूजीलैंड में 2000 महिला वर्ल्ड कप के दौरान कप्तान भी थीं, जबकि गाय 1983 और 1987 वर्ल्ड कप  में श्रीलंका के विकेटकीपर-बल्लेबाज थे।

* दोनों सीनियर टीम के सिलेक्टर बने और बाद में उन्हें चीफ सिलेक्टर भी बनाया गया।

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6 फुट लंबे गाय डी एल्विस ने 1983 और 1988 के बीच 11 टेस्ट (152 रन और 23 विक्टिम) और 31 वनडे (401 रन और 30 विक्टिम) खेले श्रीलंका के लिए। अपने समय में, डी एल्विस श्रीलंका के सबसे बेहतर विकेटकीपर थे, तब भी जो उनसे कम थे, वे ज्यादा खेल गए क्योंकि वे बेहतर बल्लेबाज थे। डी एल्विस, रणतुंगा की तरह, सिंहली स्पोर्ट्स क्लब के लिए खेलते थे। 2008 में अर्जुन रणतुंगा की कमेटी को श्रीलंका क्रिकेट को चलाने की 'कामचलाऊ'  जिम्मेदारी मिली तो वे उस कमेटी में भी थे। सिलेक्शन कमेटी में आए और बाद में इसके चीफ भी बने। जब वे सिलेक्शन कमेटी के चीफ थे, तो सिलेक्शन में बहुत ज्यादा राजनीतिक दखलअंदाजी का आरोप लगाते हुए बीच में ही इस्तीफा दे दिया।

जब श्रीलंका ने अपना पहला और अब तक का अकेला महिला टेस्ट खेला (अप्रैल 1998 में कोलंबो में विरुद्ध पाकिस्तान, श्रीलंका की 309 रन से जीत) तब रसंजलि टीम की कप्तान थीं। रसंजलि (जन्म: 26 नवंबर, 1971) खब्बू बल्लेबाज और दाएं हाथ की तेज मीडियम गेंदबाज थीं और 1 टेस्ट (26 रन और 8 विकेट) और 22 वनडे (256 रन और 23 विकेट) खेले। बाद में वह सिलेक्टर और चीफ सिलेक्टर बनीं।

एक सिलेक्टर के तौर पर, वह सीधी बात करने वाली और सख्त मानी जाती थीं। लड़कियों को हमेशा सपोर्ट किया, उनका हौसला बढ़ाया बस उन्हें ये लग जाए कि इसमें स्टार क्रिकेटर बनने की खूबी है। डी एल्विस के निधन (2013 में) के बाद भी वे श्रीलंका क्रिकेट से जुड़ी रहीं और एक सिंगल मदर के तौर पर बच्चों की जिम्मेदारी भी उठाई। इस तरह उनका योगदान भी एक प्रेरणा देने वाली स्टोरी है। वह हमेशा कहती हैं, ‘फेल होना तो ज़िंदगी का हिस्सा है। मैं खुद भी खूब फेल हुई लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि फिर कभी उठना नहीं है। मैं हमेशा अपने बच्चों को कहती हूं कि अगर प्लान A फेल हो जाए तो तो कोई बात नहीं क्योंकि अल्फाबेट में 25 और लेटर बचे हैं।’

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गाय ने इंग्लैंड में 1983 वर्ल्ड कप में विकेटकीपर के तौर पर खेले लेकिन 55.66 औसत से 167 रन बनाकर अपने देश के बल्लेबाजी औसत में टॉप पर रहे, जिसमें पाकिस्तान और इंग्लैंड के विरुद्ध आउट हुए बिना बनाए 50 शामिल हैं। नवंबर 2012 में पता चला कि उन्हें पैंक्रियाटिक कैंसर है और 2013 में 52 साल की उम्र में उनकी मौत हो गई। वे आयुर्वेद इलाज करा रहे थे। वे श्रीलंका के ऐसे तीसरे टेस्ट क्रिकेटर थे जिनका निधन हुआ (उनसे पहले: श्रीधरन जगनाथन और अनुरा रणसिंघे)।

टीम में नंबर 1 विकेटकीपर के लिए हमेशा डी एल्विस का अमल सिल्वा के साथ मुकाबला हुआ। बाद में, इस दौड़ में ब्रेंडन कुरुप्पु भी उनके साथ शामिल हो गए और टीम में एक जगह के लिए, 'म्यूजिकल चेयर' का गेम खेलते रहे।

अब गाय डी एल्विस और रसंजलि डी सिल्वा की बेटी विटिनी डी एल्विस, परिवार की क्रिकेट विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। अभी पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया में गोल्ड कोस्ट डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट क्लब के लिए खेलते हुए उनका नाम चमका। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के विमेंस प्रीमियर कॉम्पिटिशन में विटिनी ने 100 बनाया। सिर्फ़ 73 गेंद पर 20 चौकों और 1 छक्के की मदद से 111 रन बनाए और उनकी टीम को सनशाइन कोस्ट क्रिकेट क्लब पर आसान जीत मिली।

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चरनपाल सिंह सोबती
 

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Charanpal Singh Sobti
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