हाल ही में, खबर आई कि सर डॉन ब्रैडमैन (Don Bradman) की एक मशहूर ‘बैगी ग्रीन’ कैप, गोल्ड कोस्ट में नीलाम हुई : कैप के लिए मिले 460,000 ऑस्ट्रेलिया डॉलर + 15 प्रतिशत नीलाम करने वालों की कमीशन। आज तक इस महान ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज की जो भी कैप नीलाम हुई हैं- उनमें से सबसे बड़ी कीमत का रिकॉर्ड इस कैप से बना।
ये कैप ब्रैडमैन ने, स्वतंत्र भारत की पहली टेस्ट सीरीज (1947-48) यानि कि 1948 में रिटायर होने से पहले, अपनी आखिरी घरेलू टेस्ट सीरीज में पहनी थी। उनका आख़िरी टेस्ट करियर बैटिंग एवरेज 99.94 रहा।
ये कैप इसके बाद भी भारत से जुड़ी रही क्योंकि ब्रैडमैन ने इसे, उस सीरीज में खेले भारत के क्रिकेटर रंगा सोहोनी (Ranga Sohoni) को गिफ्ट कर दिया। कैप के अंदर ‘डी.जी. ब्रैडमैन’ और ‘एस.डब्ल्यू. सोहोनी’ नाम लिखे हैं और इतने साल बाद भी ये अच्छी कंडीशन में है। कैप को जिसने भी खरीदा (नाम गुप्त रखा है), इस सहमति से खरीदा कि कैप एक ऑस्ट्रेलियाई म्यूज़ियम में डिस्प्ले के लिए ही रखी रहेगी।
रंगा सोहोनी सिर्फ 4 टेस्ट खेले, जिसमें 2 विकेट लिए और 83 रन बनाए। इसकी तुलना में उनका फर्स्ट क्लास करियर रिकॉर्ड कहीं बेहतर है। ये कैप तब से, यानि कि पीढ़ियां बदलती रहीं पर सोहोनी परिवार के पास ही थी। उन्होंने इसे कभी किसी को नहीं दिखाया। लॉयड्स ऑक्शनियर्स एंड वैल्यूअर्स (Lloyds Auctioneers and Valuers) के चीफ ऑपरेटिंग ऑफ़िसर ली हेम्स (Lee Hames) ने बोली शुरू होने से पहले इस कैप को 'क्रिकेट की एक पवित्र अमानत' कहा था।
ली हेम्स के अनुसार, 'सोहोनी की आखिरी इच्छा थी कि यह कैप वापस ऑस्ट्रेलिया भेज दो। 75 साल से यानि कि तीन पीढ़ियों से भी ज़्यादा समय से कैप ताले में बंद रखी हुई थी। परिवार में भी 16 साल की उम्र पर पहुंचने पर इसे सिर्फ 5 मिनट के लिए ही देख पाए।'
नीलामी के डॉक्यूमेंट में, कैप के बारे में लिखा था, ‘ये एक ऐसी बैगी ग्रीन है जो खुद ब्रैडमैन ने गिफ्ट की और जिसे, उसी परिवार ने 75 साल से भी ज्यादा से बड़े ध्यान से और संभालकर रखा है। ये अभी भी बहुत अच्छी हालत में है, इतिहास का एक हिस्सा है, राष्ट्रीय महत्व की है और जिसे उस परिवार के बाहर शायद ही कभी किसी ने देखा हो।’
इस समय ब्रैडमैन की 11 बैगी ग्रीन के बारे में जानकारी है। आज के ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के उलट, उस ज़माने में टेस्ट क्रिकेटर हर सीरीज़ के लिए अलग कैप पहनते थे।
ये सारी चर्चा हमें एक और बैगी ग्रीन की लगभग अनजान स्टोरी की ओर ले जाती है। ये तो आज भी भारत में है। इस कैप को भी कभी पब्लिक में नहीं दिखाया गया है। सबसे बड़ी बात, कई साल तो ये भी न पता चला कि ये है किसके पास? ये एक बड़ी मजेदार स्टोरी है।
2008 में ऑस्ट्रेलिया में, बैगी ग्रीन कैप पर एक किताब, ‘द बैगी ग्रीन: द प्राइड, पैशन एंड हिस्ट्री ऑफ़ ऑस्ट्रेलियाज़ स्पोर्टिंग आइकॉन (The Baggy Green: The Pride, Passion and History of Australia's Sporting Icon)’ क्रिकेट पब्लिशिंग कंपनी ने पब्लिश की और लेखक हैं माइकल फेही और माइक कावर्ड (Michael Fahey and Mike Coward)। इस किताब में ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट क्रिकेट कैप के इतिहास और विकास के बारे में बताया गया है। जो भी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट से जुड़ा है, बैगी ग्रीन कैप का बड़ा सम्मान करता है। इस किताब में बैगी ग्रीन कैप से जुड़ी कई स्टोरी हैं और इनमें से एक स्टोरी पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर आर्थर मॉरिस से जुड़ी है। 2015 में उनकी मौत हुई (तब वे ब्रैडमैन की 1948 की आखिरी टेस्ट सीरीज के बचे दो खिलाड़ियों में से एक थे), तो उनके पास अपनी तीन बैगी ग्रीन कैप में से एक भी नहीं थी।
इस किताब के अनुसार (जैसा कि लेखकों को मॉरिस ने बताया), उन्होंने एक कैप सर फ्रैंक वॉरेल को गिफ्ट कर दी थी, दूसरी एरिक हॉलीज़ के साथ बदल ली और एक ‘उस युवा भारतीय लड़के’ को दी जिसने मुंबई मुंबई में मॉरिस के सामने एक चैरिटी मैच के दौरान कुछ अच्छे रन बनाए थे।’ मॉरिस बाद में भूल गए कि यह युवा लड़का कौन था जबकि उस ‘युवा लड़के’ ने भी कहीं भी, कभी इस कैप का जिक्र नहीं किया। इसीलिए, समय बीतता गया तो हर कोई इसके बारे में भूल गया।
कुछ साल पहले, मुंबई के अखबार ‘मिड-डे’ के स्पोर्ट्स एडिटर क्लेटन मुर्ज़ेलो (Clayton Murzello) को मुंबई में सड़क किनारे एक बुक स्टॉल पर ‘स्पोर्ट एंड पासटाइम (Sport & Pastime)’ नाम की एक मैगजीन का एक पुराना इश्यू (अक्टूबर 1966 का) मिला। इस इश्यू के कवर पर भारत के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर हनुमंत सिंह (जन्म मार्च 1939) की फोटो थी और अंदर उन पर सीएन वेणुगोपाल द्वारा लिखा ‘क्रिकेटर्स के बीच एक प्रिंस’ टाइटल वाला एक आर्टिकल था।
इस आर्टिकल के मुताबिक, मुंबई में इंडियन बोर्ड प्रेसिडेंट XI और इंडिया प्राइम मिनिस्टर XI के बीच एक मैच खेला गया था। हनुमंत (जो तब 24 साल के थे) ने उस मैच में 140+61 (कुल 201 रन) बनाए जिसमें कुछ देर ऑस्ट्रेलियाई लेजेंड आर्थर मॉरिस के साथ भी बैटिंग की थी। आर्थर मॉरिस, उनकी बैटिंग से इतने प्रभावित हुए कि तारीफ में, अपनी कैप उन्हें गिफ्ट कर दी (वेणुगोपाल को हनुमंत सिंह बताया कि उन्हें ‘इस कैप पर गर्व' था)।
तो इस तरह से, उस आर्टिकल को पढ़ने से ये राज़ खुल गया कि आर्थर मॉरिस की बैगी ग्रीन कैप के वे अनजान युवा मालिक और कोई नहीं बल्कि हनुमंत सिंह थे। उन्हें अब भारत के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ों में से एक के तौर पर याद किया जाता है। हनुमंत सिंह की 2006 में डेंगू बुखार और हेपेटाइटिस से मौत हो गई थी।
तो अब यह कैप कहां है? ये कैप अब हनुमंत सिंह के बेटे संग्राम सिंह के पास है (वे खुद भी एक फर्स्ट-क्लास क्रिकेटर रहे हैं)। संग्राम सिंह ने बताया, 'मेरे पास है बैगी ग्रीन। मेरे पापा ने मुझे कभी इसे पहनने नहीं दिया; ट्राई करने के लिए भी नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी चीजें हासिल करनी पड़ती हैं! मुझे लगता है कि उन्होंने इसे खुद भी कभी नहीं पहना।' उन्होंने बस इसे संभालकर रखा।'
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चरनपाल सिंह सोबती