Lowest Score Defended In First Class Cricket: पड़ोसी देश पाकिस्तान से हाल ही में खबर आई कि उनकी फर्स्ट क्लास क्रिकेट टीम पाकिस्तान टेलीविज़न (PTV) ने 2025-26 प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी ग्रेड-I मैच में सुई नॉर्दर्न को हराया और इस जीत के साथ एक 232 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। तो रिकॉर्ड ये है कि पाकिस्तान टेलीविज़न टीम, फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में सबसे कम स्कोर (40) का बचाव करने में कामयाब रही यानि कि दूसरी टीम को इसे भी जीत के लिए बनाने न दिया।
ये मैच था कराची के नेशनल स्टेडियम में जहां जीत के लिए 40 रन के लक्ष्य के सामने खेलते हुए सुई नॉर्दर्न गैस पाइप लाइंस लिमिटेड (SNGPL) इस ट्रॉफी के चौथे राउंड के मैच में तीसरे दिन 19.4 ओवर में 37 रन पर ही आउट हो गई और इस तरह से 2 रन से हार गए।
पिछला रिकॉर्ड: ओल्डफील्ड के नाम था और उन्होंने अगस्त 1794 में लॉर्ड्स ओल्ड ग्राउंड में एमसीसी (MCC) को 41 रन का ही लक्ष्य होने के बावजूद हरा दिया और 6 रन से जीत हासिल की थी।
मैच का ब्यौरा: पाकिस्तान टीवी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 166 रन बनाए। जवाब में सुई नॉर्दर्न (पाकिस्तान के टेस्ट कप्तान शान मसूद उनके कप्तान हैं) ने अपनी पारी में 238 रन बनाए और 72 रन की बढ़त हासिल की। पाकिस्तान टीवी ने दूसरी पारी में सिर्फ 111 रन बनाए और सुई नॉर्दर्न को आसान जीत दर्ज करने के लिए सिर्फ 40 रन का लक्ष्य मिला।
पांच बार की प्रेसिडेंट्स ट्रॉफी चैंपियन, सुई नॉर्दर्न खराब पिच पर अली उस्मान (6-9) और अमाद बट (4-28) के सामने जूझते ही रहे और इन दोनों ने क्रमशः 9.4 और 10 ओवर लगातार फेंके। अली ने तो अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और मैच में उनका प्रदर्शन 10-75 रहा। जिन शान मसूद ने कुछ दिन ही पहले 177 गेंद में 200 रन बनाए थे, यहां 0 पर आउट हो गए।
अब वापस उस पिछले रिकॉर्ड पर लौटते हैं जहां ओल्डफील्ड ने 1794 में एमसीसी को जीत के लिए 41 रन भी नहीं बनाने दिए थे और 6 छह रन से जीत हासिल की थी। साल नोट कीजिए यानि कि ये रिकॉर्ड तो 200 साल से भी पहले बना था। तब भी अगर आप कुछ साल पहले की क्रिकेट रिकॉर्ड बुक्स और अलमैनेक पर नज़र डालें, तो हैरानी की बात ये कि आपको इस रिकॉर्ड का कहीं ज़िक्र नहीं मिलेगा। दशकों तक, क्रिकेट की किताबों में ईस्टर्न प्रोविंस बनाम बॉर्डर 1946-47 मैच में जो हुआ उसे ही रिकॉर्ड मानते रहे। वहां 42 रन का लक्ष्य भी हासिल नहीं करने दिया था और 7 रन से जीते। असल में बात ये है कि 1794 वाले मैच को फर्स्ट क्लास गिनते ही नहीं थे और इसीलिए रिकॉर्ड में उसका जिक्र नहीं था।
इस के बाद हुआ ये कि पिछली सदी के आखिर में, आईसीसी ने बीते सालों के सभी मैचों पर फिर से नजर डालने का अभियान चलाया और इस अभियान में कई मैचों को फर्स्ट क्लास मैच का दर्जा दे दिया। इन्हीं में ये 1794 वाला मैच भी शामिल था। तो इस तरह से मैच खेलने के लगभग 200 साल बाद ओल्डफील्ड के नाम रिकॉर्ड आ गया। दूसरे शब्दों में, रिकॉर्ड उस मैच के नाम आ गया जो 1794 में खेले थे पर उस रिकॉर्ड को 1990 के सालों में मान्यता मिली।
फर्स्ट क्लास मैच में सबसे कम लक्ष्य जो हासिल न करने दिया
लक्ष्य स्कोर बनाया विजेता टीम हारी टीम कहां, सीज़न
40 37 पीटीवी एसएनजीपीएल कराची, 2025/26
41 34 ओल्डफील्ड एमसीसी लॉर्ड्स (पुराना),1794
42 34 ईस्टर्न
प्रोविंस बॉर्डर ईस्ट लंदन,1946/47
44 39 इंग्लैंड केंट और ससेक्स लॉर्ड्स, 1856
49 32 केंट ससेक्स हॉकहर्स्ट, 1825
क्या आप जानते हैं कि भारत में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डिफेंड किया सबसे क़म टारगेट कौन सा है? जामथा, नागपुर में रणजी ट्रॉफी 2022/23 के एक मैच में, विदर्भ ने गुजरात के विरुद्ध सिर्फ 73 रन का टारगेट भी सफलतापूर्वक डिफेंड किया था और ये रिकॉर्ड अभी भी कायम है। उन्होंने भारत में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट का नया रिकॉर्ड बनाते हुए 1948/49 की उपलब्धि को पीछे छोड़ा था। तब जमशेदपुर के कीनन स्टेडियम में बिहार के विरुद्ध सिर्फ 78 रन के टारगेट का पीछा करते हुए दिल्ली ने एक समय 38-2 का स्कोर बना लिया था लेकिन कमाल ये कि तब भी 48 रन पर ऑल आउट हो गए। इस तरह से एकदम आउट होने के सूत्रधार शूते बनर्जी (6-22) और 'पोटला' बोस (4-25) थे।
विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम, नागपुर वाले मैच में लक्ष्य 73 रन का था और इसे हासिल करने की कोशिश में गुजरात ने एकदम विकेट गिरने का किस्सा दोहरा दिया। एक समय वे 26-2 पर थे और तब तो हार का कोई खतरा नहीं था। उसके बाद आखिरी 8 विकेट, 20.2 ओवर में 28 रन में गिर गए। विकेटों का पतन हुआ खब्बू स्पिनरों आदित्य सरवटे (6-17) और हर्ष दुबे (3-11) की बदौलत। इन दोनों ने मैच में क्रमशः 11-71 और 5-38 के आंकड़े दर्ज किए और सरवटे को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। गुजरात टीम 54 रन पर ऑल आउट हो गई, जिसमें 10 एक्स्ट्रा रन शामिल थे। सिर्फ सिद्धार्थ देसाई (18) ने ही दो अंक का स्कोर बनाया।
Also Read: LIVE Cricket Score
चरनपाल सिंह सोबती