टेबल टेनिस के खेल में जब दिग्गज खिलाड़ियों का जिक्र होता है, तो भारत के अचंत शरत कमल का नाम शान से लिया जाता है। चार साल की उम्र में शरत ने टेबल टेनिस की ट्रेनिंग शुरू कर दी थी। उन्होंने भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल मिलाकर 13 पदक जीते। वह 10 बार सीनियर नेशनल चैंपियन रहे, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।
शरत कमल का जन्म 12 जुलाई, 1982 को चेन्नई में हुआ। शरत को टेबल टेनिस का खेल विरासत में मिला। शरत के पिता श्रीनिवास राव और चाचा मुरलीधर राव राज्य-स्तरीय खिलाड़ी और कोच रहे। यही वजह रही कि शरत की टेबल टेनिस की ट्रेनिंग महज 4 साल की उम्र से ही शुरू हो गई। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर शरत ने जल्द ही इस खेल की बारीकियों से तालमेल बैठा लिया। शरत पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे, लेकिन उन्होंने आखिर में टेबल टेनिस की दुनिया में अपना करियर बनाने का फैसला लिया।
शरत को साल 2002 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत की 16 सदस्यीय टीम में पहली बार चुना गया और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने दमदार खेल के बूते वह विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाते चले गए। वह साल 2003 में पहली बार नेशनल टेबल टेनिस चैंपियन बने। शरत अपने करियर के दौरान 10 बार सीनियर नेशनल चैंपियन रहे और वह यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने वाले भारत के एकमात्र खिलाड़ी हैं। 2004 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में शरत ने अपना पहला इंटरनेशनल पदक जीता।
शरत कमल का जन्म 12 जुलाई, 1982 को चेन्नई में हुआ। शरत को टेबल टेनिस का खेल विरासत में मिला। शरत के पिता श्रीनिवास राव और चाचा मुरलीधर राव राज्य-स्तरीय खिलाड़ी और कोच रहे। यही वजह रही कि शरत की टेबल टेनिस की ट्रेनिंग महज 4 साल की उम्र से ही शुरू हो गई। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर शरत ने जल्द ही इस खेल की बारीकियों से तालमेल बैठा लिया। शरत पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे, लेकिन उन्होंने आखिर में टेबल टेनिस की दुनिया में अपना करियर बनाने का फैसला लिया।
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2004 एथेंस ओलंपिक शरत के करियर का पहला ओलंपिक रहा। शरत ने अपने करियर में कुल 5 ओलंपिक में हिस्सा लिया। पेरिस ओलंपिक में शरत भारतीय दल के ध्वजवाहक भी रहे। टेबल टेनिस के खेल में अहम योगदान के लिए भारत सरकार ने शरत को साल 2004 में 'अर्जुन पुरस्कार', 2019 में 'पद्म श्री' और 2022 में 'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार' से सम्मानित किया।