India vs Sri Lanka Test 2026: बीसीसीआई ने श्रीलंका के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारतीय क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया है। टीम में एक नए चेहरे को मौका मिला है, मध्य प्रदेश के 33 वर्षीय ऑफ स्पिनर ऑलराउंडर सारांश जैन (Who is Saransh Jain?)। पहली पार सारांश को भारतीय टीम मे मौका मिला और यह सिलेक्शन घरेलू क्रिकेट में एक दशक से अधिक समय तक लगातार शानदार प्रदर्शन और धैर्य का पुरस्कार माना जा रहा है।
कौन हैं सारांश जैन?
31 मार्च 1993 को इंदौर जन्मे सारांश जैन बाएं हाथ के बल्लेबाज और दाएं हाथ के ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं। उन्होंने 2014 में रणजी ट्रॉफी से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में डेब्यू किया और तब से मध्य प्रदेश के लिए लगातार खेलते हुए खुद को एक भरोसेमंद ऑलराउंडर के रूप में स्थापित किया।
घरेलू क्रिकेट में लगातार दमदार प्रदर्शन
सारांश ने रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी और अन्य घरेलू टूर्नामेंटों में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने बल्ले और गेंद दोनों से कई मैच जिताऊ योगदान दिए। दलीप ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन ने भारतीय टीम का दरवाजा खोलने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 2025-26 दलीप ट्रॉफी में सेंट्रल जोन के लिए खेलते हुए सिर्फ 2 मैच में 16 विकेट लिए और सेमीफाइनल और फाइनल में महत्वपूर्ण अर्धशतक भी जड़े। जिसके लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज भी चुना गया।
सारांश हाल ही में श्रीलंका दौरे पर गई इंडिया ए टीम का हिस्सा थे। इस दौरान उन्होंने दूसरे चार दिवसीय मुकाबले में उन्होंने नाबाद 70 रन की पारी खेली थी और 6 विकेट भी हासिल किए थे। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने अभी तक 54 मुकाबले खेले हैं, जिसमें 31.75 की औसत से 2223 रन बनाए हैं और गेंदबाजी 27.30 की औसत से 188 विकेट अपने खाते में डाले हैं।
पिता ने छिपाई कैंसर की बीमारी
सारांश की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा त्याग है। जब वह मध्य प्रदेश टीम के साथ ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे, तब उनके पिता को मुंह के कैंसर का पता चला। परिवार ने यह बात उनसे छिपाए रखी ताकि उनका ध्यान क्रिकेट से न भटके। इलाज के दौरान उनके पिता बोल नहीं पा रहे थे, इसलिए उन्होंने एक पर्ची पर लिखा, "बस अपने खेल पर ध्यान दो, मैं जल्द ठीक हो जाऊंगा।" यह संदेश आज भी सारांश के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।
सारांश के पिता सुबोध जैन ने भी मध्य प्रदेश की टीम के लिए रणजी ट्रॉफी खेली थी, उन्होंने 9 फर्स्ट क्लास मैच में 23 विकेट लिए औऱ बल्लेबाजी 80 रन बनाए। सुबोध बेशकर नेशनल टीम तक नहीं पहुंच पाए लेकिन उनका बेटा अब टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने की दहलीज पर है।
भाई ने छोड़ा अपना सपना
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सारांश के बड़े भाई भी क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन उन्होंने अपने सपने का त्याग कर सारांश के करियर को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया। परिवार के इस समर्थन ने सारांश को कठिन समय में भी आगे बढ़ने की ताकत दी।