ब्रिजटाउन के केंसिंग्टन ओवल में न्यूजीलैंड के विरुद्ध पांचवें वनडे के दौरान, क्रिकेट वेस्टइंडीज ने केमार रोच को 300 टेस्ट विकेट लेने वाले पांचवें वेस्टइंडीज खिलाड़ी बनने पर सम्मानित किया। उससे पहले इस रिकॉर्ड की लिस्ट में कर्टनी वॉल्श (519), कर्टली एम्ब्रोस (405), मैल्कम मार्शल (376) और लांस गिब्स (309) जैसे दिग्गजों के नाम थे। गिब्स के बाद, ये रिकॉर्ड बनाने वाले वे दूसरे बारबाडियन हैं। रोच ने ये मुकाम हासिल किया था एंटीगा में श्रीलंका के विरुद्ध पहले टेस्ट के दौरान।
आम तौर पर वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज जोड़ी में चमके हैं जैसे मार्शल-होल्डिंग और वॉल्श-एम्ब्रोस पर इसके उलट, रोच का रिकॉर्ड और भी ख़ास है क्योंकि उन्होंने लगभग दो दशक तक अकेले ही गेंदबाजी की जिम्मेदारी को संभाला: 89 टेस्ट, 161 पारी और 2,590 ओवर में 300 विकेट और गेंदबाजी की जिम्मेदारी बांटने कभी कोई दूसरा मुख्य तेज गेंदबाज नहीं रहा। उनके टेस्ट करियर के दौरान सिर्फ शैनन गेब्रियल (110 विकेट) और जेसन होल्डर (109) ही तेज गेंदबाज़ी में कुछ ख़ास कर पाए और इनके साथ विकेट की गिनती में फर्क साफ़ बताता है कि रोच पर कितनी बड़ी ज़िम्मेदारी थी।
बारबाडोस में उन्हें ये सम्मान एक बड़े ख़ास मौके पर दिया। उस वनडे के लिए, क्रिकेट वेस्टइंडीज ने सर गारफ़ील्ड सोबर्स की याद में स्टेडियम में एंट्री फ्री कर दी थी और ये मौका था हजारों फैंस के लिए क्रिकेट के मौजूदा दौर के इस महान खिलाड़ी के रिकॉर्ड के जश्न में शामिल होने का। एक ऐसे दौर में जब नए खिलाड़ियों का फोकस टेस्ट करियर है ही नहीं, रोच 17 साल टेस्ट खेलते रहे और करियर उनके विकेटों की तरह ही शानदार रहा है।
लंबाई सिर्फ 5 फुट 8 इंच जो तेज गेंदबाज के लिए सही नहीं मानते, इसलिए रोच को स्पिनर बनने की सलाह मिली थी पर वे नहीं माने और साबित कर दिया कि स्किल और पक्के इरादे से, कम कद की कमी को पूरा किया जा सकता है। डेब्यू 2009 में बांग्लादेश के विरुद्ध और ये मौका वास्तव में तब मिला जब वेस्टइंडीज के टॉप खिलाड़ी हड़ताल पर थे और वेस्टइंडीज ने ऐसी टीम बनाई जिसमें 9 खिलाड़ी डेब्यू कर रहे थे। रोच ने दो टेस्ट में 13 विकेट लिए और जब सुलह के बाद सीनियर लौटे तो नए खिलाड़ियों में से वे अकेले थे जो टीम में बचे रहे।
ऐसा नहीं कि करियर आसान रहा और सब सही चला। 2009 के ऑस्ट्रेलिया टूर पर उनकी गेंद की तेजी तो ऐसी थी कि रिकी पोंटिंग जैसे बल्लेबाज भी डरे से दिखाई दिए। 6 टेस्ट में पोंटिंग को 5 बार आउट किया। 2013 में कंधे की सर्जरी हुई और एक साल बाद बारबाडोस में एक बड़े कार एक्सीडेंट ने भी करियर को संकट में डाल दिया था। इस सब से गेंदबाजी पर असर पड़ा और पहले जैसी रफ़्तार न रही। करियर का सबसे बुरा दौर तो 2015 में ऑस्ट्रेलिया में आया जब 3 टेस्ट में एक भी विकेट न मिला। नतीजा- टीम से बाहर कर दिया।
तब लगा था कि उनका बेहतरीन दौर खत्म लेकिन रोच ने मेहनत की और रफ्तार के बजाय गेंद के मूवमेंट, सटीकता और अपने अनुभव पर ज्यादा फोकस किया और ये था उन के करियर का एक शानदार और दूसरा दौर। 2018 के बाद से, 24.34 औसत से 153 टेस्ट विकेट लिए और 30+ की उम्र के बावजूद, इस दौरान दुनिया के टॉप तेज गेंदबाजों में गिनती रही।
उनकी वापसी में स्किल को चमकाने में काउंटी क्रिकेट में खेलना भी ख़ास रहा। 2021 में सरे ने उन्हें साइन किया और उनके 97 विकेट की मदद से लगातार तीन बार काउंटी चैंपियनशिप टाइटल जीता। वे उन खिलाड़ियों में से एक थे जो रेड-बॉल क्रिकेट को सम्मान दिला रहे थे।
वेस्टइंडीज ने 2025 में अचानक ही तय किया कि भविष्य की तैयारी में युवा तेज गेंदबाजों को मौका देंगे और रोच को टीम से बाहर कर दिया। जल्दी ही, जब टीम खिलाड़ियों की चोटों से संकट में फंसी तो उन्हें वापस बुलाना पड़ा। तब क्राइस्टचर्च में रोच ने अपने क्रिकेट का एक और पहलू दिखाया और 233 गेंद खेलते हुए 58* बनाए और टेस्ट बचाने में मदद की। इसके बाद, अब 2026 में एंटीगा में श्रीलंका के विरुद्ध टेस्ट में 300 विकेट का जादुई रिकॉर्ड हासिल किया।
कई और रिकॉर्ड उनकी इस उपलब्धि को खास बनाते हैं:
टेस्ट क्रिकेट में 300 विकेट लेने वाले 41वें गेंदबाज और उनके 89 से ज्यादा टेस्ट खेलकर यह रिकॉर्ड सिर्फ़ चमिंडा वास (90 टेस्ट), डेनियल विटोरी (94) और इशांत शर्मा (98) ने ही बनाया। ये रिकॉर्ड उनके लंबे करियर में टिके रहने का प्रतीक है।
ये 300 विकेट लेने में 45 अलग-अलग फील्डर (विकेटकीपर सहित) ने रोच की मदद की और 300 विकेट तक का ही रिकॉर्ड देखें तो डेनियल विटोरी (उनके पहले 300 विकेट) और डेरेक अंडरवुड (297 विकेट) को भी इतने ही फील्डर ने मदद की थी।
वैसे किसी भी गेंदबाज के लिए सबसे ज्यादा फील्डर (विकेटकीपर सहित) की मदद के रिकॉर्ड में, जेम्स एंडरसन टॉप पर हैं और उन्हें अपने 704 विकेट लेने में 63 फील्डर (विकेटकीपर सहित) ने मदद की थी। इसके बाद: स्टुअर्ट ब्रॉड (604-53), नाथन लियोन (567-52), डेनियल विटोरी (362-51), हरभजन सिंह (417-48), अनिल कुंबले (619-47), एम. मुरलीधरन (800-47), आर अश्विन (537-46), कर्टनी वॉल्श (519-46), केमार रोच (300-45), वसीम अकरम (414-45) और डेरेक अंडरवुड (297-45) के नाम हैं।
उनका 51.8 का स्ट्राइक रेट वेस्टइंडीज के कई महान तेज गेंदबाजों के साथ मुकाबले का है- कर्टनी वॉल्श (57.0) और कर्टली एम्ब्रोस (54.6) से भी बेहतर जबकि गेंदबाजी औसत भी उनके मुकाबले में कोई ख़ास ख़राब नहीं है। बहुत संभव है कि रोच को मार्शल, होल्डिंग, रॉबर्ट्स, एम्ब्रोस या वॉल्श जैसी चर्चा और मशहूरी कभी न मिले और इसकी सबसे बड़ी वजह है वेस्टइंडीज टीम का मौजूदा दौर का साधारण से टेस्ट रिकॉर्ड। तब भी, उनकी उपलब्धि किसी भी तरह से इन महान खिलाड़ियों से कम नहीं।
अक्सर कम अनुभव वाले गेंदबाजी अटैक को संभाला, चोट लगी पर वापस लौटे, सभी ने कहा कि करियर खत्म पर वे नई स्किल के साथ वापस लौटे और 38 साल की उम्र में, क्रिकेट में टेस्ट में किसी भी गेंदबाज के लिए इस सबसे खास मुकाम को हासिल किया।
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कभी-कभी महानता को सिर्फ रिकॉर्ड से नहीं, जिस जिम्मेदारी को खिलाड़ी ने निभाया, उस से आंकना चाहिए। आज के दौर के बहुत कम तेज गेंदबाज ऐसे हैं जो केमार रोच की तरह सम्मान के साथ और बिना विवाद अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे।