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मां ने गहने गिरवी रखकर दिलाया था बैट, बेटे ने ट्रिपल सेंचुरी मारकर चुकाया कर्ज़

Sakibul Gani Triple Centurion of Bihar : किसी भी युवा बल्लेबाज़ का सपना होता है कि वो अपने पहले फर्स्ट क्लास मैच में शतक बनाए या दोहरा शतक बनाए लेकिन क्या हो जब कोई युवा खिलाड़ी अपने पहले ही फर्स्ट

By Shubham Yadav February 21, 2022 • 14:05 PM View: 1576

Sakibul Gani Triple Centurion of Bihar : किसी भी युवा बल्लेबाज़ का सपना होता है कि वो अपने पहले फर्स्ट क्लास मैच में शतक बनाए या दोहरा शतक बनाए लेकिन क्या हो जब कोई युवा खिलाड़ी अपने पहले ही फर्स्ट क्लास मैच मे ट्रिपल सेंचुरी लगा दे। जी हां, ऐसा हुआ है और ये कारनामा करने वाला कोई और नहीं बल्कि बिहार के युवा बल्लेबाज साकिबुल गनी (Sakibul Gani) हैं।

गनी ने अपने फर्स्ट क्लास डेब्यू पर तिहरा शतक लगाकर रिकॉर्डबुक में अपना नाम दर्ज कर दिया है। वो ऐसा करने वाले दुनिया के पहले क्रिकेटर बन गए हैं। 22 वर्षीय गनी ने कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में मिजोरम के खिलाफ खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी मुकाबले में इस कारनामे को अंज़ाम दिया। फर्स्ट क्लास करियर के पहले मुकाबले में धमाका करने के बाद एकदम से वो लाइमलाइट में आ गए हैं।

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साकिबुल गनी (Sakibul Gani) एक नए स्टार बनकर उभरे हैं, लेकिन इस खिलाड़ी को स्टार बनाने में उनकी मां का योगदान अतुलनीय है। जी हां, गनी की यहां तक पहुंचने की कहानी बेहद ही संघर्षपूर्ण रही है। चलिए आपको थोड़ा सा पीछे लेकर चलते हैं ताकि आप भी गनी और उनके परिवार के संघर्ष की कहानी को जान सकें। हम सब जानते हैं कि क्रिकेट के अच्छे बैट 30 से 35 हजार रुपए के आते हैं। ये वो रकम थी जो गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले गनी के पास नहीं थी। ऐसे में सवाल ये था कि अब गनी बैट कहां से खरीदते।

इस मुश्किल वक्त में उनकी मां ने अपने गहने गिरवी रखकर बेटे को बैट दिलाया और उन्होंने सपना देखा कि एक दिन उनका बेटा इस बैट से अपने सपने को पूरा करेगा। फिर क्या था गनी को हथियार मिल गया था और उन्होंने इस हथियार को अपने पहले ही फर्स्ट क्लास मैच में ऐसा चलाया कि दुनिया देखती रह गई। 22 साल के गनी ने रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) के इस मुकाबले में मिजोरम के खिलाफ 405 गेंद पर 341 रन बना डाले। उनकी इस पारी में उन्होंने 56 चौके और 2 छक्के भी जड़े।

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किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले गनी को उनके बड़े भाई का भी साथ मिला। इस दौरान उन्हें उनके मां-बाप ने भी पूरा समर्थन दिया और आज नतीजा आपके सामने है। ये तो थी सिर्फ एक गनी की कहानी, Cricketnmore आप तक ऐसी कहानियां लाता रहेगा क्योंकि हम जानते हैं कि ये कहानी पढ़कर अगर एक भी शख्स के अंदर चिंगारी उठी, तो वो कुछ कर गुजरेगा और अगर ऐसा हुआ तो हमारा ये आर्टिकल लिखने का मकसद पूरा हो जाएगा।

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