भारतीय क्रिकेट में जब भी तेज गेंदबाजों की चर्चा होती है, तो निश्चित रूप से दाएं हाथ के तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद का नाम आता है। एक योद्धा की तरह क्रिकेट के मैदान में विपक्षी टीम से लड़ने वाले वेंकटेश प्रसाद संन्यास के बाद कोच और प्रशासक की भूमिका में सफल रहे हैं। मौजूदा समय में वह कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं।
वेंकटेश प्रसाद का जन्म 5 अगस्त 1969 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने 1994 में 25 साल की उम्र में भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया था। 1994 से लेकर 2001 तक वह टेस्ट और वनडे में जवागल श्रीनाथ और अनिल कुंबले के साथ भारतीय गेंदबाजी आक्रमण का प्रमुख चेहरा रहे। प्रसाद ने सात साल के अपने करियर में 33 टेस्ट और 161 वनडे खेले। उन्होंने टेस्ट में 96 और वनडे में 196 विकेट लिए। वेंकटेश प्रसाद ने 21 मार्च 2005 को 35 साल की उम्र में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से आधिकारिक तौर पर संन्यास की घोषणा की।
वेंकटेश प्रसाद के करियर से जुड़ी एक बड़ी घटना 1996 में घटी थी, जो आज भी क्रिकेट इतिहास की चर्चित कहानियों में से एक मानी जाती है। वनडे विश्व कप 1996 के क्वार्टर फाइनल में भारत-पाकिस्तान आमने-सामने थे। मैच के दौरान पाकिस्तान के आमिर सोहेल ने वेंकटेश प्रसाद की गेंद पर चौका लगाने के बाद उन्हें चिढ़ाने का प्रयास किया। वेंकटेश ने अगली ही गेंद पर आमिर सोहेल को बोल्ड मारकर न सिर्फ उनकी, बल्कि पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी थी। उस मैच को जीतकर भारतीय टीम सेमीफाइनल में पहुंची थी। मैच में वेंकटेश प्रसाद ने 10 ओवर में 45 रन देकर 3 विकेट लिए थे।