इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के संस्थापक ललित मोदी ने कहा कि आईपीएल सिर्फ नए खिलाड़ियों को ढूंढता ही नहीं, बल्कि उन्हें दुनिया के सामने खुद को साबित करने का मौका भी देता है।
उन्होंने कहा कि आईपीएल को एक ऐसे सिस्टम के तौर पर सोचा गया था जो उभरते हुए टैलेंट को लंबे घरेलू सफर के बजाए सबसे ऊंचे स्तर पर दबाव में खुद को साबित करने पर मजबूर करे। ललित मोदी ने 'आईएएनएस' के साथ बात करते हुए कहा, "इंडियन प्रीमियर लीग का मकसद कभी भी क्रिकेट के पारंपरिक रास्तों पर चलना नहीं था—इसे उन रास्तों को बदलने के लिए बनाया गया था। पहले दिन से ही, आइडिया सीधा सा था -महानता को खोजने के लिए सालों इंतजार करना बंद करो और इसके बजाय उसे सबसे चमकदार रोशनी में दुनिया के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों के सामने खुद को जाहिर करने पर मजबूर करो। आज हम वैभव सूर्यवंशी, मुकुल चौधरी जैसे खिलाड़ियों और निडर युवा क्रिकेटरों की लगातार आती लहर में जो देख रहे हैं, वह कोई विकास नहीं है—यह वही बदलाव है जो बिल्कुल वैसा ही हो रहा है जैसा सोचा गया था।"
ये उभरते हुए खिलाड़ी खेल का चेहरा बदल चुके हैं और निडर होकर खेल रहे हैं, भले ही दूसरी तरफ उन्हें खेल के कुछ सबसे बेहतरीन क्रिकेटरों और दिग्गजों का सामना करना पड़ रहा हो। लीग ने टैलेंट की खोज के तरीके को कैसे बदला है इस पर विस्तार से बताते हुए मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि खिलाड़ी अब कितनी तेजी से गुमनामी से शोहरत की ओर बढ़ सकते हैं।