महाराजा रणजीत सिंह भारत के महान क्रिकेटर्स में गिने जाते हैं। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इंग्लैंड के लिए खेलने वाले पहले भारतीय थे। शानदार बल्लेबाजी शैली के लिए प्रसिद्ध इस दिग्गज खिलाड़ी के नाम पर 'रणजी ट्रॉफी' का नाम रखा गया, जो भारत का प्रमुख घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट है।
10 सितंबर 1872 को गुजरात स्थित काठियावाड़ के नवानगर (जामनगर) राजघराने में जन्मे रणजीतसिंहजी को भारतीय क्रिकेट का 'पितामह' कहा जाता है, जो जामनगर के महाराज थे। 16 साल की उम्र में रणजीत सिंह पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए थे।
कलाई के जादूगर रणजीत सिंह 'लेट कट' और 'लेग ग्लांस' जैसे स्टाइलिश शॉट्स के लिए मशहूर थे। इसमें उन्होंने 'बैक-फुट डिफेंस' की कला को भी शामिल किया था। मई 1895 में लॉर्ड्स के मैदान पर एमसीसी के खिलाफ ससेक्स टीम के लिए खेलते हुए उन्होंने अपने पहले ही मैच में 77 और 150 रन बनाकर शानदार शुरुआत की। उनके इसी कौशल ने इंग्लैंड क्रिकेट टीम के चयनकर्ताओं को उन्हें अपनी टीम में शामिल करने के लिए मजबूर कर दिया था। उस दौर में भारत में अंग्रेजों का शासन था, जिसके चलते रणजीत सिंह का चयन इंग्लैंड टीम के लिए हुआ।