जैवलिन थ्रो : शिकार का तरीका, जो ओलंपिक में बन गया वैश्विक खेल (Image Source: IANS)
आज जैवलिन थ्रो यानी भाला फेंक को एक खेल के तौर पर जाना जाता है, लेकिन मध्य पुरापाषाण काल से इसे शिकार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था।
करीब 2,00,000 ईसा पूर्व मानव ने परतदार किनारों वाले पत्थर को ब्लेडनुमा बनाना शुरू किया। इस पत्थर को लकड़ी की लंबी छड़ी के आगे बांधकर हथियार के रूप में बनाया गया, ताकि अपना पेट भरने के लिए जानवरों का शिकार किया जा सके। इसके साथ ही यह रक्षा के रूप में भी एक प्रमुख हथियार था। आगे चलकर इसी भाले का इस्तेमाल युद्ध में होने लगा।
708 ईसा पूर्व में ग्रीस में हुए प्राचीन ओलंपिक गेम्स में पहली बार इस हथियार को एक खेल के रूप में शामिल किया गया। ओलंपिक खेलों में जैतून की लकड़ी के भाले का इस्तेमाल किया गया।