हाल ही में 'वंदे मातरम' की रचना की 150वीं सालगिरह पर खबरों में राजनीतिक चर्चा ज्यादा रही। यहां राजनीति की कोई बात नहीं करेंगे। 1875 में बंगाली लेखक बंकिम चंद्र चटर्जी (Bankim Chandra Chatterjee), जो 19वीं सदी के भारत के सबसे प्रभावशाली फिलॉस्फर में से एक गिने जाते हैं, ने एक ऐसी कविता लिखी जो भारत पर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध लड़ाई में स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा बनी। यह कविता, पहली बार उनके 1882 के उपन्यास 'आनंदमठ (Anandmath)' में 'वंदे मातरम' हेडिंग के तहत छपी थी। 1937 में इसे 'नेशनल सांग' का दर्जा दिया गया।
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इसका क्रिकेट से एक अजीब कनेक्शन है। कई इतिहासकार तो इस कविता के जन्म का श्रेय क्रिकेट मैच से जुड़े एक किस्से को देते हैं।
150 साल से भी पहले, बहरामपुर (Berhampore, पश्चिम बंगाल का एक शहर-कोलकाता से लगभग 186 किमी दूर) के बैरक स्क्वायर (Barrack Square), जिसका नाम अब स्क्वायर फील्ड (Square Field) है, स्पोर्ट्स ग्राउंड में एक झगड़ा हुआ था। वह 15 दिसंबर 1873 का दिन था। तब कर्नल डफिन (Col. Duffin) बहरामपुर छावनी के कमांडिंग ऑफिसर थे और बंकिम चंद्र मुर्शिदाबाद जिले के डिप्टी कलेक्टर (Deputy Collector of Murshidabad District), जिनकी ड्यूटी थी बहरामपुर में।