इंडोनेशिया मूल का पारंपरिक मार्शल आर्ट 'पेंचक सिलाट' आत्मरक्षा, फुर्ती, संतुलन और मानसिक अनुशासन पर जोर देता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय यह खेल एशियन गेम्स में भी अपनी धाक जमा चुका है।
यह खेल इंडोनेशियाई और मलय लोगों के इतिहास और संस्कृति से जुड़ा है, जो प्राचीन काल में वहां से युवा पुरुषों की शिक्षा का हिस्सा होता था। इसके प्रमुख हिस्से हैं– मानसिक भावना, कला, संस्कृति, आत्मरक्षा और खेल।
'पेंचक' शब्द जावा के पश्चिमी भाग में स्थित सुंदानी भाषा के 'पेंका' से आया है। सदियों से सुंदानी लोग इस खेल का अभ्यास करते आए हैं। एक ओर जावा के लोग इस खेल के लिए 'पेंचक' शब्द का इस्तेमाल करते थे, तो दूसरी तरफ सुमात्रा, बोर्नियो और मलय लोग इसे 'सिलाट' नाम से जानते थे। 18 मई 1948 को इंडोनेशियाई युद्ध शैलियों के लिए एक एकीकृत शब्द 'पेंचक सिलाट' चुना गया।