लंदन, 14 जुलाई - अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) का वार्षिक सम्मेलन 15 जुलाई यानी सोमवार को यहां होना है। इस बैठक में दुनिया भर के गैर अनुबंधित खिलाड़ियों को अलग-अलग देशों में खेली जा रही टी-20 लीगों में खेलने के लिए अपने बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर ज्यादा रुचि नहीं ले रहा है। 

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा कि इस समय इस पर विचार करने की जरूरत नहीं है। 

अधिकारी ने कहा, "विदेशी लीगों में भारतीय खिलाड़ियों के हिस्सा लेने का जो बीसीसीआई का नियम है उसमें इस समय बदलाव की जरूरत नहीं है क्योंकि इससे बोर्ड की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है।"

अधिकारी ने कहा, "अगर आईसीसी के नियम किसी भी भारतीय खिलाड़ी को दूसरे देश की लीग में खेलने की इजाजत बिना बीसीसीआई की सहमति से देते हैं तो इससे ऐसी स्थिति बन जाएगी जो इस समय सही नहीं होगी, साथ ही इससे बीसीसीआई के रेवेन्यू पर भी खासा असर पड़ेगा साथ ही उन खिलाड़ियों के रेवेन्यू पर भी असर पड़ेगा जो अनुबंधित हैं।"

एक और अधिकारी ने कहा कि नीति में बदलाव के लिए भारतीय बोर्ड से चर्चा करनी होगी उसके बाद ही इस विचार को आगे ले जाया जा सकता है। 

अधिकारी ने कहा, "इससे न सिर्फ बीसीसीआई के रेवेन्यू पर असर पड़ेगा बल्कि आईपीएल पर भी। इस पर काफी चर्चा की जरूरत है क्योंकि इससे नीति में बदलाव करना पड़ेगा। इस पर सहमत होने का मतलब है कि हम अपने गैर अनुबंधित खिलाड़ी को अमेरिका, इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया की टी-20 लीग में हिस्सा लेने की इजाजत दें और उसे अपने प्रदेश की लीग में खेलने से वंचित रखें। पहली नजर में ही यह सही नहीं लगता है।"

वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अगर आईसीसी के सीओओ इयान हिग्गिनिस इसे कागजों पर उतारते हैं तो यह हितों के टकरावों का मुद्दा हो जाएगा। 

उन्होंने कहा, "आईसीसी सीओओ हिग्गिनिस ने कहा कि अगर इसे अपनी रिपोर्ट में लिखते हैं तो यह हितों के टकराव का केस हो जाएगा क्योंकि वह अमेरिका क्रिकेट संघ में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पद लेने वाले हैं। अगर आईसीसी में बैठे लोग इसे रोकते नहीं हैं तो यह बेहद खराब होगा।"


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आईएएनएस

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