नई दिल्ली, 2 अगस्त | भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के क्रिकेट निदेशक राहुल द्रविड़ ने कहा है कि कोविड-19 का घरेलू क्रिकेट पर असली असर अक्टूबर से महसूस होना शुरू होगा। द्रविड़ ने कहा कि अगर साल के अंत तक वैक्सीन आ भी जाए तो भी घेरलू क्रिकेट का कुछ हिस्सा उससे महरूम रह ही जाएगा।

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द्रविड़ ने डेक्कन हेराल्ड के साथ एक वेबीनार में बात करते हुए कहा, "उम्मीद है, अगर हम साल के अंत तक वैक्सीन या इसका इलाज ढूंढ़ लेते हैं तो हम प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में होंगे, अगर पूरा सीजन नहीं तो उसके अधिकतर हिस्से में।"

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उन्होंने कहा, "जाहिर सी बात है कि इसे प्राथमिकता देना जरूरी है ताकि हमारे युवा लड़के, लड़कियां क्रिकेट से महरूम न रहें। हम इस बात में भाग्यशाली रहे हैं (महामारी की शुरुआत भारत में मार्च के अंत में हुई थी और तब बीसीसीआई का घरेलू सीजन लगभग खत्म हो गया था), लेकिन अक्टूबर आने दीजिए चीजें हो सकता हैं कि और खराब होना शुरू हो जाएं।"

द्रविड़ ने कहा कि अक्टूबर वो समय होता है जब आयुवर्ग के टूर्नामेंट्स शुरू होते हैं और इस महामारी में उन पर गाज गिर सकती है।

उन्होंने कहा, "कुछ अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट्स स्थगित हो गए हैं या उन्हें स्थगित किया गया है, लोग उनके लिए हमेशा समय और जगह ढूंढ़ सकते हैं, लेकिन एक बार अक्टूबर आने दीजिए, मुझे लगता है कि तब चीजें हमें ज्यादा तकलीफ देना शुरू करेंगी।"

पूर्व कप्तान ने कहा, "हमारे कई युवा खिलाड़ियों- जूनियर, अंडर-16, अंडर-19 और महिला क्रिकेट का हमारा अगला घरेलू सीजन अक्टूबर से शुरू होता है। तब अगर हम सामान्य जीवन की तरफ नहीं आते हैं तो, इसमें समय लगेगा। हम तब अपने घरेलू क्रिकेट और जमीनी स्तर के क्रिकेट पर इसका असर देखेंगे।"

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द्रविड़ ने इस साल आईपीएल के सफल आयोजन को लेकर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि घरेलू क्रिकेट का कोई टूर्नामेंट रेवेन्यू नहीं लाता बल्कि इनकी मेजबानी में काफी पैसा लगता है। इसलिए अगर आप युवा लड़के, लड़कियों को मौका देना चाहते हो, अगर आप उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देना चाहते हो तो, पैसा कहीं न कहीं से आना चाहिए।"

द्रविड़ ने कहा, "सच्चाई यह है कि टूर्नामेंट्स कराना और उच्च स्तर के खिलाड़ी बनाना, इसमें काफी पैसा लगता है। इसमें वित्तीय पहलू शामिल है।"

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उन्होंने कहा, "यह कहना आसान है कि हम इसे करा रहे हैं क्योंकि इससे बड़ा वित्तीय फायदा जुड़ा हुआ है। मैं सोचूंगा, कि सुरक्षा को ताक पर रखे बिना, एसओपी का पालन करते हुए सुरक्षित टूर्नामेंट का आयोजन कराया जाए, आईपीएल से जो पैसा मिलता है इससे हमारे जूनियर और घेरलू क्रिकेट को फंड में मदद मिलती है।"

दाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज ने कहा, "इसलिए खेल संगठन इस तरह के टूर्नामेंट्स को आयोजित कराने को लेकर व्याकुल रहते हैं। वह जानते हैं कि अगर हमारे पास पैसा नहीं होगा तो न सिर्फ इस टूर्नामेंट पर असर पड़ेगा बल्कि इसका असर हर जगह होगा।"
 

लेखक के बारे में

Saurabh Sharma
An ardent cricket fan, Saurabh is covering cricket for last 12 years. He has started his professional journey with the Hindi publication, Navbharat Times (Times of India Group). Later on, he moved to TV (Sadhna News). In 2014, he joined Cricketnmore. Currently, he is serving as the editor of cricketnmore.com. His grasp on cricket statistics and ability to find an interesting angle in a news story make him a perfect fit for the online publishing business. He is also acting as a show producer for our ongoing video series - Cricket Tales, Cricket Flashback, & Cricket Trivia Read More
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