इस इंग्लिश समर में न्यूजीलैंड (3 टेस्ट), भारत (5 टी20 और 3 वनडे), पाकिस्तान (3 टेस्ट) और श्रीलंका (3 टी20 और 3 वनडे) के साथ इंटरनेशनल क्रिकेट मैच का प्रोग्राम है। इनमें से कोई भी मेहमान टीम, मैच खेलने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के पार्क्स क्रिकेट ग्राउंड या कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के फेनर्स नहीं जाएगी जबकि कुछ साल पहले तक इंटरनेशनल टीम, इन दोनों यूनिवर्सिटी ग्राउंड में से कम से कम एक में तो जरूर मैच खेलती थीं।

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इसी तरह, अब, इंग्लिश क्रिकेट सीजन की शुरुआत, काउंटी टीमों के यूनिवर्सिटी टीम के विरुद्ध मैच से नहीं होती जबकि सालों यही परंपरा रहा। असल में, ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज, इन दोनों यूनिवर्सिटी से पिछले कुछ सालों में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट खेलने का दर्जा छिन गया और न ही अब उनके ग्राउंड पर फर्स्ट क्लास क्रिकेट मैच खेलते हैं। यहां तक कि लॉर्ड्स के शेड्यूल से यूनिवर्सिटी टीमों के बीच पारंपरिक मैच भी हटा दिए हैं।

आज के क्रिकेट प्रशंसक ये जानते हैं कि टीम इंडिया में खेलना है तो रास्ता आईपीएल और इसी तरह इंग्लैंड टीम में खेलना है तो रास्ता द हंड्रेड से है। कुछ साल पहले तक ऐसा नहीं था। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी (जिसके अंतर्गत 43 कॉलेज आते हैं), दुनिया की सबसे पुरानी इंग्लिश बोलने वाली यूनिवर्सिटी है, जहां 1096 से पढ़ाई चल रही है, ऊंचे दर्जे की क्रिकेट खेलने का सबसे सही रास्ता थी। इंग्लैंड में तो कहते थे कि सिर्फ़ ऑक्सफोर्ड या कैम्ब्रिज का स्टूडेंट ही, इंग्लैंड का कप्तान बनने के लिए क्वालीफाई करता है। पहले वर्ल्ड वॉर से पहले, इंग्लैंड का हर दूसरा कप्तान ऑक्सफोर्ड से था। ऐसा ही प्राइम मिनिस्टर के लिए था। कुछ इंग्लैंड क्रिकेट कप्तान जो ऑक्सफोर्ड में पढ़े: लॉर्ड हैरिस, प्लम वार्नर, रेगी फ़ॉस्टर, सीबी फ्राई, डगलस जार्डिन, कॉलिन काउड्रे और एमजेके स्मिथ।

जिन जॉर्ज एबेल के नाम नारदर्न इंडिया के लिए खेलते हुए, रणजी ट्रॉफी में पहला 200 बनाने का रिकॉर्ड है, वे यहीं पढ़े थे। लाहौर (तब अविभाजित भारत में) के लॉरेंस गार्डन्स क्रिकेट ग्राउंड को उन्होंने ही डिज़ाइन किया था और यहां का पवेलियन लगभग पार्क्स जैसा ही बना दिया। इतना खूबसरत कि चारों ओर पेड़ों से घिरे इस ग्राउंड को आज भी दुनिया के सबसे खूबसूरत क्रिकेट ग्राउंड में से एक गिनते हैं।

यूनिवर्सिटी के पुराने स्टूडेंट्स में पटौदी के दोनों नवाब और इमरान खान का नाम भी है। इमरान ने यहां नॉटिंघमशायर के विरुद्ध दोनों पारी में 100 बनाए। 1931 की ऑक्सफोर्ड टीम में तीन ऐसे दक्षिण अफ्रीकी थे, जो टेस्ट खेले। मंसूर अली खान पटौदी ने 1961 में पार्क्स में, तब की काउंटी चैंपियन यॉर्कशायर के विरुद्ध दोनों पारी में 100 बनाए। उसके कुछ दिन बाद ही एक कार एक्सीडेंट में उनकी एक आंख की रोशनी चली गई थी।

2012 में, मंसूर अली खान पटौदी के सम्मान में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ग्राउंड के पवेलियन में, उनके परिवार की मौजूदगी में दीवार पर लगी, एक प्लाक (स्मारिका) का अनावरण किया गया। तब यूनिवर्सिटी में डेवलपमेंट (स्पोर्ट) के हेड एंड्रयू थॉमस ने कहा था, 'हमें ऑक्सफोर्ड और भारत के एक लेजेंड को पार्क्स में यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक क्रिकेट पवेलियन में एक परमानेंट प्लाक लगाकर, सम्मान देते हुए बड़ी खुशी हो रही है।’ मंसूर अली खान पटौदी बैलिओल कॉलेज में अरबी और फ्रेंच पढ़ने आए थे और यूनिवर्सिटी के लिए लगातार तीन फर्स्ट-क्लास मैच में 100 के रिकॉर्ड के लिए आज तक मशहूर हैं।

यहां न्यूजीलैंड के क्रिकेटर मार्टिन डोनेली के नाम पर भी एक बेंच है। वे ऑक्सफोर्ड में पढ़ाई के बाद 1949 में न्यूजीलैंड टीम के लिए इंग्लैंड में सीरीज खेले तो फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में 2287 रन बनाए थे जिसमें लॉर्ड्स में इंग्लैंड के विरुद्ध 200 शामिल है।

डकवर्थ-लुईस मेथड के मैथमेटिशियन, डॉ. लुईस, ऑक्सफोर्ड में लेक्चरर थे और अक्सर यहां मैच देखने आते थे। तब जिस बेंच पर बैठते थे, उसी पर उनका नाम लिखा है। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान कॉलिन काउड्रे के नाम पर भी एक प्लाक है जिस पर लिखा है, 'उनके ऑक्सफोर्ड के दोस्तों की तरफ से उनकी याद में'। ऑक्सफोर्ड में रहने वाले उन्हें याद करते हुए कहते हैं, 'वे यहां आए तो थे पढ़ने पर बहुत ज़्यादा क्रिकेट खेलने की वजह से अपनी PhD पूरी न कर पाए। वे बस खेलते रहे, खेलते रहे और खेलते रहे।'

क्रिकेट लीजेंड इमरान खान ने 1972 से 1975 तक ऑक्सफोर्ड के क्लेबे कॉलेज में फिलॉसफी, पॉलिटिक्स और इकोनॉमिक्स (PPE) की पढ़ाई की। वे यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। 2024 में, इमरान ने इसलिए ही, जेल में होने के बावजूद, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का चांसलर बनने के लिए अप्लाई किया था पर रिजेक्ट कर दिए गए। वह क्लेब कॉलेज के ऑनरेरी फेलो हैं। एक बात जो आम तौर पर मालूम नहीं है, ये कि पॉलिटिक्स में आने से पहले, वे 2005 से 2014 तक ब्रैडफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर थे।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के पार्क्स ग्राउंड पर, फर्स्ट-क्लास क्रिकेट अब धीरे-धीरे इतिहास बन रही है। यूनिवर्सिटी टीम से 2020-21 सीजन के बाद फर्स्ट-क्लास क्रिकेट खेलने का दर्जा छिन गया। वहां अभी भी क्रिकेट खेलते हैं और ऐसा ग्राउंड जहां फ्लड लाइट, चीयरलीडर्स, स्पाइडर-कैम, दर्शकों के लिए स्टैंड, क्रिकेट देखने के टिकट और लाउडस्पीकर में से कुछ भी नहीं है, पर क्रिकेट का पुराना रोमांच बरकरार है। यूनिवर्सिटी टीम के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इंग्लैंड के हर काउंटी क्लब की टीम को कम से कम एक बार हराने का अनोखा रिकॉर्ड है (डरहम को छोड़कर, जो फर्स्ट क्लास क्रिकेट का दर्जा पाने वाले आखिरी काउंटी क्लब टीम थे)। संयोग से, पार्क्स में ही डरहम ने अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच खेला था (अप्रैल 1992 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ)। 2020 का वर्सिटी मैच, वह आख़िरी यूनिवर्सिटी मैच था जिसे फर्स्ट क्लास क्रिकेट मैच गिना था।

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पार्क्स में पुराना पवेलियन ज़रा भी नहीं बदला है। अंदर लकड़ी के बोर्ड पर 1827 से हर सीजन के ब्लूज की लिस्ट है। पार्क्स का 1881 में पूरा हुआ क्रिकेट पवेलियन, सर थॉमस जैक्सन ने डिज़ाइन किया था। वे तब सबसे जाने-माने आर्किटेक्ट में से एक थे।

लेखक के बारे में

Charanpal Singh Sobti
Charanpal Singh Sobti is a veteran cricket writer with more than five decades of experience covering the game. At Cricketnmore, he brings his extensive knowledge, unique perspective and deep understanding of cricket to readers through insightful news, analysis, historical pieces and fascinating stories from the world of cricket. Read More
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